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साहब! कागजों पर हो रही फागिंग..... नालियों में दवा का भी छिड़काव नहीं
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लखीमपुर खीरी। मौसम के बदलाव के साथ ही मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ गया है। आलम यह है कि शहर में कागजों पर फॉगिंग कराई जा रही और नालियों में दवा के नाम पर भी खानापूरी हो रही। यही वजह है कि दिन पर दिन मच्छरों की संख्या बढ़ती जा रही है। इससे लोग परेशान है। मलेरिया, डेंगू, जेई बुखार (जापानी इंसेफ्लाइटिस) आदि बीमारियों की चपेट में लोगों के आने के बाद भी महकमा चेत नहीं रहा है। जिला अस्पताल से लेकर निजी चिकित्सालयों में मरीजों की बढ़ रही संख्या में अधिकांश बुखार से पीड़ित हैं। मगर, मलेरिया विभाग के आंकड़ों में इनकी संख्या सिर्फ 50 ही बताई जा रही है।
शहर में गंदगी और मच्छरों का बढ़ती संख्या से मलेरिया के अलावा डेंगू, जापानी इंसेफ्लाइटिस और फाइलेरिया के मरीजों की बढ़ती संख्या से लोग चिंतित नजर आ रहे लेकिन महकमे के अफसरों पर इसका असर होता नहीं दिख रहा है। शुक्रवार को जिला अस्पताल में करीब 1970 मरीज आए, इनमें से करीब 1600 मरीज बुखार से पीड़ित बताए गए। वहीं निजी अस्पतालों में भी मरीजों की कतारें लगी हैं। उधर ग्रामीण क्षेत्रों में भी बुखार के मरीज बढ़ते जा रहे हैं। अधिकांश गांवों में भी गंदगी का अंबार है, इस वजह से वहां भी मच्छर जनित बीमारियां फैल रही हैं।
मच्छरों की रोकथाम की जिम्मेदारी मलेरिया विभाग की है। मगर, इसका भी हाल बेहाल है। मच्छरों पर अंकुश लगाने के लिए शासन भले ही लाखों रुपये का बजट मुहैया कराता हो। मगर, फागिंग और छिड़काव उन्हीं जगहों पर कराई जाती है जहां पर इन बीमारियों के पीड़ित मिलते हैं। ऐसे में जिले भर में एंटी लार्वा और फॉगिंग न हो पाने के कारण मच्छरों पर अंकुश लगना नामुमकिन है।
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शहर में गंदगी और मच्छरों का बढ़ती संख्या से मलेरिया के अलावा डेंगू, जापानी इंसेफ्लाइटिस और फाइलेरिया के मरीजों की बढ़ती संख्या से लोग चिंतित नजर आ रहे लेकिन महकमे के अफसरों पर इसका असर होता नहीं दिख रहा है। शुक्रवार को जिला अस्पताल में करीब 1970 मरीज आए, इनमें से करीब 1600 मरीज बुखार से पीड़ित बताए गए। वहीं निजी अस्पतालों में भी मरीजों की कतारें लगी हैं। उधर ग्रामीण क्षेत्रों में भी बुखार के मरीज बढ़ते जा रहे हैं। अधिकांश गांवों में भी गंदगी का अंबार है, इस वजह से वहां भी मच्छर जनित बीमारियां फैल रही हैं।
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मच्छरों की रोकथाम की जिम्मेदारी मलेरिया विभाग की है। मगर, इसका भी हाल बेहाल है। मच्छरों पर अंकुश लगाने के लिए शासन भले ही लाखों रुपये का बजट मुहैया कराता हो। मगर, फागिंग और छिड़काव उन्हीं जगहों पर कराई जाती है जहां पर इन बीमारियों के पीड़ित मिलते हैं। ऐसे में जिले भर में एंटी लार्वा और फॉगिंग न हो पाने के कारण मच्छरों पर अंकुश लगना नामुमकिन है।
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