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मलेरिया : सात बरस का रिकॉर्ड टूटा, अब तक 216 लोग संक्रमित
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निर्मलनगर में खाली पड़े प्लाटों में भरा गंदा पानी
लखीमपुर खीरी। जिले में इस साल मिले मलेरिया रोगियों ने पिछले सात बरसों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। साल 2019 में जिले में जहां 209 रोगी मिले थे, वहीं इस साल 25 सितंबर तक यह संख्या 216 हो गई है। सबसे ज्यादा हालात सितंबर में ही खराब हुए हैं। बता दें कि पांच सितंबर तक जिले में सिर्फ 78 मलेरिया के रोगी थे।
इस बार जिले में मादा एनाफिलीज मच्छर का हमला ज्यादा तेज है। गत 20 दिन में 138 मरीज मलेरिया के मिले हैं, जबकि पांच सितंबर तक इनकी संख्या मात्र 78 थी। स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिम्मेदार शहर से लेकर गांवों में सफाई अभियान चलाने के दावे करते रहे, लेकिन इसकी हकीकत और ऐसे अभियानों की पोल जिले में मिले मलेरिया रोगियों की संख्या खोल रही है।
पांच सितंबर के बाद हर दिन औसतन सात मरीज मिले हैं, जिससे मलेरिया रोगियों का पिछले सात साल का रिकॉर्ड टूट गया है। हालांकि जिम्मेदार मच्छरों की रोकथाम को लेकर एंटीलार्वा का समय-समय पर छिड़काव कराने का दावा तो करते रहे, लेकिन असलियत में हुआ क्या, इसकी तस्दीक 20 दिन के आंकड़े कर रहे हैं।
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मादा एनाफिलीज है मलेरिया का कारण
मलेरिया अधिकारी हरिशंकर बताते हैं कि मलेरिया मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से होता है। यह मच्छर गंदगी और ठहरे हुए पानी में पनपता है। एक बार में माटा एनाफिलीज 100 से 200 अंडे तक देती है। मच्छर का जीवन 21 से 30 दिन का होता है। इसमें 15 दिन तक मच्छर अंडा, प्यूपा और लार्वा के रूप में पानी में और फिर मच्छर बनकर बाहर रहता है। नर मच्छर फूलों के पराग पर और मादा मच्छर मानव आदि के खून पर जीवित रहती है।
इलाज के लिए मौजूद दवाएं
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, जिले में मलेरिया रोग से निपटने के पुख्ता इंतजाम हैं। मलेरिया में प्रयोग होने वाली प्रामाक्वीन टेबलेट के साथ क्लोरोक्वीन टेबलेट और इंजेक्शन भी पर्याप्त मात्रा में मौजूद हैं। वहीं जांच के लिए भी करीब 60 हजार किटें हैं। सीएचसी पर इनका वितरण भी किया चुका है। विभागीय लोग बताते हैं कि इसके अलावा जांच के लिए हर सीएचसी को करीब 600-600 किट दी गई हैं।
14 दिन तक खानी होती हैं दवाएं
जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि मलेरिया के लिए 14 दिन तक दवाएं खानी होती हैं। पहले तीन दिन तक प्रामाक्वीन और उसके बाद क्लोरोक्वीन। कोर्स पूरा करने के बाद अगले कई साल तक मलेरिया बुखार होने की संभावना भी खत्म हो जाती है।
मादा एनाफिलीज मच्छर को यह पसंद है
1. घर के अंदर ठहरा पानी और गंदगी।
2- मोहल्ले व शहर में चोक नालियां, जलभराव व गंदगी।
3- सफाईकर्मियों का नियमित सफाई न करना।
4- नियमित एंटीलार्वा का छिड़काव न किया जाना।
वर्ष- मलेरिया- डेंगू
2016-194-31
2017- 148-26
2018-187-23
2019-209-62
2020-78-37
2021-115-58
2022-103-85
2023-216-42
नोट- 2023 के आंकड़े 25 सितंबर तक के हैं।
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इस बार जिले में मादा एनाफिलीज मच्छर का हमला ज्यादा तेज है। गत 20 दिन में 138 मरीज मलेरिया के मिले हैं, जबकि पांच सितंबर तक इनकी संख्या मात्र 78 थी। स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिम्मेदार शहर से लेकर गांवों में सफाई अभियान चलाने के दावे करते रहे, लेकिन इसकी हकीकत और ऐसे अभियानों की पोल जिले में मिले मलेरिया रोगियों की संख्या खोल रही है।
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पांच सितंबर के बाद हर दिन औसतन सात मरीज मिले हैं, जिससे मलेरिया रोगियों का पिछले सात साल का रिकॉर्ड टूट गया है। हालांकि जिम्मेदार मच्छरों की रोकथाम को लेकर एंटीलार्वा का समय-समय पर छिड़काव कराने का दावा तो करते रहे, लेकिन असलियत में हुआ क्या, इसकी तस्दीक 20 दिन के आंकड़े कर रहे हैं।
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मादा एनाफिलीज है मलेरिया का कारण
मलेरिया अधिकारी हरिशंकर बताते हैं कि मलेरिया मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से होता है। यह मच्छर गंदगी और ठहरे हुए पानी में पनपता है। एक बार में माटा एनाफिलीज 100 से 200 अंडे तक देती है। मच्छर का जीवन 21 से 30 दिन का होता है। इसमें 15 दिन तक मच्छर अंडा, प्यूपा और लार्वा के रूप में पानी में और फिर मच्छर बनकर बाहर रहता है। नर मच्छर फूलों के पराग पर और मादा मच्छर मानव आदि के खून पर जीवित रहती है।
इलाज के लिए मौजूद दवाएं
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, जिले में मलेरिया रोग से निपटने के पुख्ता इंतजाम हैं। मलेरिया में प्रयोग होने वाली प्रामाक्वीन टेबलेट के साथ क्लोरोक्वीन टेबलेट और इंजेक्शन भी पर्याप्त मात्रा में मौजूद हैं। वहीं जांच के लिए भी करीब 60 हजार किटें हैं। सीएचसी पर इनका वितरण भी किया चुका है। विभागीय लोग बताते हैं कि इसके अलावा जांच के लिए हर सीएचसी को करीब 600-600 किट दी गई हैं।
14 दिन तक खानी होती हैं दवाएं
जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि मलेरिया के लिए 14 दिन तक दवाएं खानी होती हैं। पहले तीन दिन तक प्रामाक्वीन और उसके बाद क्लोरोक्वीन। कोर्स पूरा करने के बाद अगले कई साल तक मलेरिया बुखार होने की संभावना भी खत्म हो जाती है।
मादा एनाफिलीज मच्छर को यह पसंद है
1. घर के अंदर ठहरा पानी और गंदगी।
2- मोहल्ले व शहर में चोक नालियां, जलभराव व गंदगी।
3- सफाईकर्मियों का नियमित सफाई न करना।
4- नियमित एंटीलार्वा का छिड़काव न किया जाना।
वर्ष- मलेरिया- डेंगू
2016-194-31
2017- 148-26
2018-187-23
2019-209-62
2020-78-37
2021-115-58
2022-103-85
2023-216-42
नोट- 2023 के आंकड़े 25 सितंबर तक के हैं।

निर्मलनगर में खाली पड़े प्लाटों में भरा गंदा पानी