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अब पोषाहार से भी बनाइए लजीज व्यंजन
लखीमपुर खीरी
Updated Fri, 24 Jul 2015 07:41 PM IST
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केंद्रों पर बच्चों को वितरित किया जाने वाला पोषाहार बड़ी काम की चीज है। पोषाहार से आप 12 प्रकार के लजीज व्यंजन तैयार कर सकते हैं। डीएम किंजल सिंह के निर्देश पर बाल विकास पुष्टाहार विभाग ने पोषाहार से बनने वाले व्यंजनों की बुकलेट जारी की है, जिसमें व्यंजन बनाने का तरीका और व्यंजनों से होने वाले लाभ की जानकारी दी गई है।
पोषाहार से बनने वाले व्यंजनों में पकौड़ा, पराठा, काजू आकार के आसें, तिल के लड्डू, दही बड़े, मेवा कतली, खोया बर्फी और गरी के लड्डू शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि अमूनन यह देखने में आता है कि पंजीरी समझकर प्रतिदिन पोषाहार के सेवन से परहेज किया जाता है। लेकिन ऐसा नहीं है, पोषाहार से अलग-अलग स्वाद के कई प्रकार के व्यंजन तैयार कर उसका सेवन किया जा सकता है। बाल-विकास पुष्टाहार विभाग द्वारा व्यंजनों के बारे में तैयार की गई बुकलेट को आंगनबाड़ी केंद्रों पर कार्यकत्रियों को देने की तैयारी की जा रही है, ताकि पोषाहार को लेकर बच्चों और उनके अभिभावकों में उत्सुकता बढ़े और वे पोषाहार का अलग-अलग तरीकों से व्यंजन तैयार कर इस्तेमाल कर सकें।
जिला कार्यक्रम अधिकारी अखिलेंद्र दुबे ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर बांटी जाने वाली पंजीरी से कई प्रकार के व्यंजन तैयार किए जा सकते हैं। इस संबंध में व्यंजनों की एक बुकलेट तैयार की गई है। जो हर आंगनबाड़ी केंद्रों पर भेजी जा रही है। बुकलेट में व्यंजन तैयार करने की विधि और व्यंजन से होने वाले लाभ की जानकारी दी गई है। इससे पोषाहार की उपयोगिता बढ़ेगी।
थारू क्षेत्र में पोषाहार से कुपोषण मिटाने की मुहिम
थारू क्षेत्र के 37 गांवों में 53 केंद्र हैं, जिन पर 47 बच्चे अति कुपोषित की श्रेणी में हैं। इन बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषाहार दिया जा रहा है। अधिकरियों को भरोसा है कि पोषाहार और उनसे बनने वाले व्यंजनों के सेवन से अति कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार किया जा सकता है। साथ ही इन गांवों में गर्भवती महिलाएं की देखभाल सही तरीके से की जा रही है, ताकि पैदा होने वाले बच्चे भी स्वस्थ्य हों। थारू क्षेत्र से कुपोषण मिटाने के लिए सितंबर तक स्थितियों में सुधार लाने की कोशिश की जा रही है।
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पोषाहार से बनने वाले व्यंजनों में पकौड़ा, पराठा, काजू आकार के आसें, तिल के लड्डू, दही बड़े, मेवा कतली, खोया बर्फी और गरी के लड्डू शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि अमूनन यह देखने में आता है कि पंजीरी समझकर प्रतिदिन पोषाहार के सेवन से परहेज किया जाता है। लेकिन ऐसा नहीं है, पोषाहार से अलग-अलग स्वाद के कई प्रकार के व्यंजन तैयार कर उसका सेवन किया जा सकता है। बाल-विकास पुष्टाहार विभाग द्वारा व्यंजनों के बारे में तैयार की गई बुकलेट को आंगनबाड़ी केंद्रों पर कार्यकत्रियों को देने की तैयारी की जा रही है, ताकि पोषाहार को लेकर बच्चों और उनके अभिभावकों में उत्सुकता बढ़े और वे पोषाहार का अलग-अलग तरीकों से व्यंजन तैयार कर इस्तेमाल कर सकें।
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जिला कार्यक्रम अधिकारी अखिलेंद्र दुबे ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर बांटी जाने वाली पंजीरी से कई प्रकार के व्यंजन तैयार किए जा सकते हैं। इस संबंध में व्यंजनों की एक बुकलेट तैयार की गई है। जो हर आंगनबाड़ी केंद्रों पर भेजी जा रही है। बुकलेट में व्यंजन तैयार करने की विधि और व्यंजन से होने वाले लाभ की जानकारी दी गई है। इससे पोषाहार की उपयोगिता बढ़ेगी।
थारू क्षेत्र में पोषाहार से कुपोषण मिटाने की मुहिम
थारू क्षेत्र के 37 गांवों में 53 केंद्र हैं, जिन पर 47 बच्चे अति कुपोषित की श्रेणी में हैं। इन बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषाहार दिया जा रहा है। अधिकरियों को भरोसा है कि पोषाहार और उनसे बनने वाले व्यंजनों के सेवन से अति कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार किया जा सकता है। साथ ही इन गांवों में गर्भवती महिलाएं की देखभाल सही तरीके से की जा रही है, ताकि पैदा होने वाले बच्चे भी स्वस्थ्य हों। थारू क्षेत्र से कुपोषण मिटाने के लिए सितंबर तक स्थितियों में सुधार लाने की कोशिश की जा रही है।
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