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Lakhimpur Kheri News: जीवनरक्षक सुविधाएं नदारद... गंभीर मरीजों को सिर्फ अस्पताल पहुंचा रहीं निजी एंबुलेंस

Thu, 25 Sep 2025 01:14 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Updated Thu, 25 Sep 2025 01:14 AM IST
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Life-saving facilities are missing... private ambulances are only taking critical patients to the hospital.
मोतीपुर ​स्थित जिला अस्पताल के बाहर खड़ी प्रइवेट एंबुलेंस। संवाद - फोटो : कंपोजिट विद्यालय जमुवारी की कक्षा आठ की छात्रा कशिश मौर्य बनी एक दिन के लिए उपजिलाधिकारी।
लखीमपुर खीरी। पड़ोसी जिला शाहजहांपुर की एक निजी एंबुलेंस में ऑक्सीजन की कमी से महिला की मौत होने की घटना का खतरा खीरी में भी गंभीर मरीजों के सिर पर मंडरा रहा है। आपातकालीन हालात में जहां एंबुलेंस जीवनरक्षक साबित होनी चाहिए तो जिले में पंजीकृत कुल 102 निजी एंबुलेंस में से अधिकांश बिना जरूरी सुविधाओं और प्रशिक्षित स्टाफ के मरीजों को सिर्फ अस्पताल तक ढो रही हैं।
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जिला व महिला अस्पताल के सामने पड़ताल में सामने आया कि वहां खड़ीं अधिकतर एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलिंडर तक नहीं है। वेंटिलेटर और कार्डियक मॉनिटर जैसी लाइफ सेविंग मशीनों की तो बात ही दूर है।
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नतीजा यह होता है कि सफर के दौरान मरीज को न तो प्राथमिक उपचार मिलता है और न ही हालत बिगड़ने पर कोई मदद। इन खामियों के बावजूद एंबुलेंस संचालक मनमाना किराया वसूल रहे हैं। कुछ ही किलोमीटर की दूरी के लिए हजारों रुपये तक वसूले जा रहे हैं। परिजनों की मजबूरी का फायदा उठाकर यह धंधा खुलेआम चल रहा है। प्रशासन पूरी तरह से चुप्पी साधे बैठा है।
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प्राइवेट अस्पतालों से मिलता है कमीशन
सरकारी अस्पतालों के बाहर खड़ी इन प्राइवेट गाड़ियों के चालक खुद के वाहन को एंबुलेंस बताते हुए मरीजों व तीमारदार को अपनी बातों में फंसाकर प्राइवेट अस्पताल ले जाते हैं। वहां उन्हें नजराने के तौर पर मोटा कमीशन भी दिया जाता है। यहीं नहीं, कई बार यह वाहन चालक अपनी गाड़ियों में शव भी ढो लेते हैं।
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ये होनी चाहिए सुविधाएं
सीएमओ डॉ. संतोष गुप्ता ने बताया कि जिले में दो प्रकार की सरकारी एंबुलेंस हैं। इसमें पहली बेसिक लाइफ सपोर्ट (बीएलएस) एंबुलेंस है। इसमें ऑक्सीजन सिलिंडर, स्ट्रेचर, दवाएं, मरहम-पट्टी सहित एक इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (ईएमटी) होता है। वहीं, एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) एंबुलेंस में इससे अधिक सुविधाएं होती हैं। इसमें वेंटिलेटर, मॉनीटर व कई उच्च तकनीकी उपकरण होते हैं। प्राइवेट एंबुलेंस में मास्क, ग्लब्स, स्ट्रेचर, ऑक्सीजन सिलिंडर, दवाएं, मरहम-पट्टी, वाहन में मरीज के लेटने की जगह होनी चाहिए। साथ ही टेक्नीशियन व ड्राइवर होना चाहिए।
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जिले में इतनी हैं एंबुलेंस
108 सेवा - 44
102 सेवा - 46
एएलएस - 4
प्राइवेट एंबुलेंस - 102
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प्राइवेट एंबुलेंस के पंजीकरण के दौरान स्वास्थ्य विभाग से परिवहन विभाग एनओसी लेता है। डिप्टी सीएमओ वाहन में होने वाली जरूरतों की जांच करते हैं। इसके बाद ही वाहन को एंबुलेंस में पंजीकृत करने के लिए एनओसी दी जाती है। निजी एंबुलेंस में भी मरीज के लिए बेसिक लाइफ सपोर्ट और एक प्रशिक्षित टेक्नीशियन का होना आवश्यक है।
डॉ. संतोष गुप्ता, सीएमओ
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जिले में 102 प्राइवेट एंबुलेंस पंजीकृत हैं। इनमें जरूरी संसाधन है या नहीं, इसकी जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग का सहयोग लिया जाएगा। अवैध तरीके से एंबुलेंस के रूप में संचालित वाहनों पर कार्रवाई की जा रही है। एक दिन पहले ही ऐसे चार वाहनों को सीज किया गया है।
शशिभूषण पांडे, एआरटीओ
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