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सीओ धौरहरा के खिलाफ वकीलों ने किया प्रदर्शन, हड़ताल पर रहे
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डीएम को ज्ञापन देते अधिवक्ता।
रिश्वत न दे पाने पर पुलिस पर 164 के बयान न दर्ज कराने व न्यायालय की अवमानना का लगाया आरोप
लखीमपुर खीरी। सिविल कोर्ट के अधिवक्ता संत लाल वर्मा को गलत तरीके से जेल भेजे जाने के खिलाफ वकीलों ने सोमवार को जमकर हंगामा करते हुए सीओ धौरहरा टीएन दुबे पर गंभीर आरोप लगाते हुए डीएम कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
जिला अधिवक्ता संघ सभागार में वरिष्ठ अधिवक्ता धर्मेंद्र शुक्ल की अध्यक्षता में वकीलों की आपात बैठक बुलाई गई। बैठक का संचालन करते हुए महामंत्री विश्वपाल वर्मा ने बताया सिविल कोर्ट के अधिवक्ता संतलाल वर्मा के विरुद्ध कोई सबूत नहीं है। वादी मुकदमा और घटना से व्यथित पक्षकार उन्हें निर्दोष बताते हुए पुलिस अधिकारियों को शपथ पत्र भी दे चुके हैं, लेकिन विवेचना के नाम पर उनसे अवैध धनराशि मांगी गई। जब वह रिश्वत की रकम नहीं दे सके तो उन्हें झूठे मामले में जेल भेज दिया गया। पूर्व अध्यक्ष जंग बहादुर सिंह ने बताया कई बार मुकदमे के वादी राजेंद्र प्रसाद ने 164 सीआरपीसी के बयान दर्ज कराने के लिए प्रार्थना पत्र दिया लेकिन सीओ धौरहरा और उनके कार्यालय के पुलिसकर्मियों ने व्यक्तिगत कारणों से वादी के बयान नहीं दर्ज कराएं और मनमाने तरीके से वकील को जेल भेज दिया। वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुयश मिश्र ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद वादी मुकदमा के 164 सीआरपीसी के बयान दर्ज कराने के बजाए पुलिस ने उल्टे संतलाल को जेल भेज दिया जो उच्च न्यायालय के आदेशों का अपमान है। मीडिया प्रभारी और संयुक्त मंत्री गोपाल जी कश्यप ने बताया पुलिस के रवैया के खिलाफ अधिवक्ताओं ने सोमवार को न्यायिक कार्य से विरत रहने का फैसला लिया, जिसके बाद वकील नारेबाजी करते हुए जुलूस की शक्ल में डीएम दफ्तर पहुंच गए। वहां डीएम महेंद्र बहादुर सिंह को ज्ञापन सौंपते हुए दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।
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लखीमपुर खीरी। सिविल कोर्ट के अधिवक्ता संत लाल वर्मा को गलत तरीके से जेल भेजे जाने के खिलाफ वकीलों ने सोमवार को जमकर हंगामा करते हुए सीओ धौरहरा टीएन दुबे पर गंभीर आरोप लगाते हुए डीएम कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
जिला अधिवक्ता संघ सभागार में वरिष्ठ अधिवक्ता धर्मेंद्र शुक्ल की अध्यक्षता में वकीलों की आपात बैठक बुलाई गई। बैठक का संचालन करते हुए महामंत्री विश्वपाल वर्मा ने बताया सिविल कोर्ट के अधिवक्ता संतलाल वर्मा के विरुद्ध कोई सबूत नहीं है। वादी मुकदमा और घटना से व्यथित पक्षकार उन्हें निर्दोष बताते हुए पुलिस अधिकारियों को शपथ पत्र भी दे चुके हैं, लेकिन विवेचना के नाम पर उनसे अवैध धनराशि मांगी गई। जब वह रिश्वत की रकम नहीं दे सके तो उन्हें झूठे मामले में जेल भेज दिया गया। पूर्व अध्यक्ष जंग बहादुर सिंह ने बताया कई बार मुकदमे के वादी राजेंद्र प्रसाद ने 164 सीआरपीसी के बयान दर्ज कराने के लिए प्रार्थना पत्र दिया लेकिन सीओ धौरहरा और उनके कार्यालय के पुलिसकर्मियों ने व्यक्तिगत कारणों से वादी के बयान नहीं दर्ज कराएं और मनमाने तरीके से वकील को जेल भेज दिया। वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुयश मिश्र ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद वादी मुकदमा के 164 सीआरपीसी के बयान दर्ज कराने के बजाए पुलिस ने उल्टे संतलाल को जेल भेज दिया जो उच्च न्यायालय के आदेशों का अपमान है। मीडिया प्रभारी और संयुक्त मंत्री गोपाल जी कश्यप ने बताया पुलिस के रवैया के खिलाफ अधिवक्ताओं ने सोमवार को न्यायिक कार्य से विरत रहने का फैसला लिया, जिसके बाद वकील नारेबाजी करते हुए जुलूस की शक्ल में डीएम दफ्तर पहुंच गए। वहां डीएम महेंद्र बहादुर सिंह को ज्ञापन सौंपते हुए दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।
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