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वकीलों ने बनाया मुंसिफ कोर्ट को चुनावी मुद्दा

Tue, 15 Feb 2022 02:06 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 15 Feb 2022 02:06 AM IST
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Lawyers made Munsif court an election issue
गोला तहसील - फोटो : LAKHIMPUR
श्याम किशोर अवस्थी
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गोला गोकर्णनाथ। गोला तहसील के अधिवक्ताओं के लिए तीन दशकों से चल रही मुंसिफ कोर्ट स्थापना की मांग महज एक उम्मीद बनकर रह गई है। मुंसिफ कोर्ट स्थापना के लिए अधिवक्ताओं ने समय-समय पर लंबे प्रदर्शन किए भूमि उपलब्ध कराने की प्रशासन से मांग की और सरकारों के क्षेत्रीय विधायकों एवं सांसदों से भी प्रयास करने की बात कही गई, लेकिन तहसील में मुंसिफ कोर्ट की स्थापना नहीं करा सके।
जिले में अपना विशिष्ट स्थान रखने वाले गोला गोकर्णनाथ में 1989 में तहसील सृजित हुई। तभी से मुंसिफ कोर्ट की मांग उठने लगी थी। अधिवक्ता संघर्ष समिति के अध्यक्ष बृजेश तिवारी तथा महामंत्री हरीकृष्ण माहेश्वरी और सेंट्रल बार एसोसिएशन ने मुंसिफ कोर्ट की स्थापना के लिए काफी प्रयास किए और शासन प्रशासन तक पत्राचार किया। अधिवक्ता संघर्ष समिति के अनवरत धरना प्रदर्शन होने के बाद 24 अगस्त 2017 को तत्कालीन एसडीएम योगानंद पांडे और डीएम आकाशदीप ने एक प्रस्ताव भेजा।
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गाटा संख्या 252 रकबा 1.862 हे. स्थित ग्राम गोला बाहर जोकि तहसील के नाम दर्ज है और गोला नगर पालिका सीमा के भीतर गाटा संख्या 2537 रकबा 1.238 हे जो कि सिंचाई विभाग के नाम दर्ज है। इसमें सहायक अभियंता प्रथम उपखंड गोला सिंचाई खंड प्रथम लखीमपुर कार्यालय जिलेदार प्रथम जूनियर इंजीनियर तथा चतुर्थ श्रेणी के आवास निर्मित है। इसके अतिरिक्त एक डेढ़ एकड़ से अधिक भूमि पर कार्यालय या आवासीय प्रयोजन में लाए जाने का प्रस्ताव शासन को भेजा था, लेकिन माननीयों के रुचि न लेने से तीन दशकों बाद भी मुंसिफ कोर्ट तहसील गोला को नहीं मिल पाई। (संवाद)
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मुंसिफ कोर्ट की स्थापना के लिए हर सरकार में वकीलों ने मांग उठाई है। वही सरकारी सुगम, सस्ता और सुलभ न्याय दिलाने का वादा भी करती हैं। लेकिन गोला तहसील में यह सारे वादे झूठे साबित होते हैं। - बृजेश तिवारी, अध्यक्ष अधिवक्ता संघर्ष समिति।
शासन व जनप्रतिनिधियों का पूर्ण सहयोग यदि मिल जाता तो आज गोला के अंदर सिविल जज जूनियर डिविजन न्यायालय शुरू हो जाता और आम जनता को जनपद लखीमपुर खीरी तथा मोहम्मदी वादों के लिए नहीं दौड़ना पड़ता, जबकि लगभग 20 वर्षों से मांग चल रही है। अन्य तहसीलों में सिविल जज जूनियर डिविजन की समस्त कार्यवाही या पूरी हो चुकी है। - हरिकृष्ण माहेश्वरी, महामंत्री अधिवक्ता संघर्ष समिति गोला।
गोला तहसील में मुंसिफ कोर्ट न होने से तहसील क्षेत्र की जनता को सुलभ और सुगम न्याय नहीं मिल पा रहा है। जनता को न्याय पाने के लिए परेशान होना पड़ता है। सरकारों में इस जनहित के मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया गया। -सविता वाजपेयी, तहसील गोला
सरकारों के लिए न्यायिक व्यवस्था सर्वोपरि होनी चाहिए। जिस सरकार में जनता को समय से सुगम और सुलभ न्याय नहीं मिल पाता वह सरकारी अपना भरोसा खो देती हैं। गोला विधानसभा में यही होता आया है। इस बार तहसील गोला का वकील मुंसिफ कोर्ट के मुद्दे पर सरकारों से जवाब मांगेगा। - संदीप अवस्थी, गोला तहसील

राजनीतिक पार्टियां जहां एक ओर अपना घोषणा पत्र जनता के सामने रखकर बड़े बड़े वादे कर रही हैं। जनहित का ढिंढोरा पीट रही है। वही तहसील गोला में तीन दशकों से जनहित का सबसे बड़ा मुद्दा मुंसिफ कोर्ट अटका पड़ा है। - अजय कुमार यादव सम्राट, तहसील गोला
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