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पिछले साल कटान, नहीं मिला अनुदान
अमर उजाला ब्यूरो/ईसानगर (लखीमपुर खीरी)।
Updated Sun, 07 Aug 2016 12:05 AM IST
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- फोटो : amar ujala
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कटान को रोकने के लिए भी नहीं हुई ठोस कार्रवाई
खेतिहर भूमि कटान का अभी तक नहीं हुआ सर्वे
केवल कागजों में रह गया हुलासपुरवा का वजूद
घाघरा धीरे धीरे लोगों के सपने लीलती रही और प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठा पाया। कटान रोकने के लिए किए गए उपायों की पोल खुल गई। एक महीने में 45 घरों के 130 परिवार बेघर हो गए। उनके जीवनयापन का साधन घाघरा में बह गया और प्रशासन कटान रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा पाया। कटान रोकने के उपाय तो दूर प्रशासन पीड़ितों को अभी राहत भी नहीं उपलब्ध करा पा रहा है। पिछले साल नदी में समा गए सिद्धनपुरवा के ग्रामीणों को अभी तक घर का मुआवजा नहीं मिला है वहीं हुलासपुरवा के किसानों की बह चुकी जमीन का मुआवजा भी नहीं दिया जा सका है।
हुलासपुरवा के कटान पीड़ितों को अभी तक कोई सरकारी इमदाद नहीं मिल पाई है। प्रशासन ने कुछ दिन पहले 80 परिवारों को तिरपाल और खाली डिब्बे थमा दिए गए थे। शनिवार को 50 और परिवारों को तिरपाल और डिब्बे दिए गए हैं। नियमों का हवाला देकर प्रशासन ने यह भी जानने की कोशिश नहीं की कि कटान पीड़ितों के पास कुछ खाने के लिए है या नहीं। इस साल के कटान पीड़ितों को मुआवजे की बात तो दूर पिछले साल के कटान पीड़ितों को कृषि भूमि और आवास अनुदान अभी तक नहीं मिल सका है।
रुद्रपुर ग्राम पंचायत का एक अन्य मजरा सिद्धनपुरवा पिछले साल पूरी तरह घाघरा में समा गया था। इस मजरे में रहने वाले ग्रामीणों को अभी तक मकानों और खेतिहर भूमि बहने का अनुदान नहीं मिल सका है। इसके अलावा हुलासपुरवा के किसानों की 200 एकड़ जमीन भी एक साल में बह चुकी है लेकिन अभी तक उसका सर्वे भी नहीं पूरा हुआ है। कृषि भूमि का मुआवजा तो मिलना दूर की बात है। एक साल पहले से घाघरा की विनाशलीला देखने के बाद बावजूद प्रशासन ने सबक नहीं लिया। हुलासपुरवा गांव का वजूद मिटाने के बाद घाघरा की विनाशकारी लहरें पड़ोस के गांव हटवा की तरफ बढ़ने लगी हैं। हुलासपुरवा का हश्र देखने के बाद अब हटवा के ग्रामीणों की रूह कांप रही है। हुलासपुरवा में गांव के बीच बना शिव मंदिर हो या सैकड़ों साल पुराना वट वृक्ष सब कुछ नदी के तेज लहरों में बह गया। नदी यहीं नही रुकी धीरे-धीरे गांव के निकट पहुंची घाघरा ने 15 जून को गांव के सोहन, कलीराम और तीरथ का घर कटान कर आगे बढ़ चली। नदी को आगे बढ़ता देख गांव वाले अपना घर खुद तोड़ कर पलायन करने लगे। आखिर शुक्रवार की रात घाघरा ने इस गांव का आखिरी श्रीकेशन का घर भी घाघरा की लहरों में समा गया।
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खोखली साबित हुई गांव बचाने की मुहिम
हुलासपुरवा गांव को कटान से बचाने को चलाई गयी सिंचाई विभाग की मुहिम खोखली साबित हुई। उनके बंबू कैरेट धरे रह गए और घाघरा ने अपना काम पूरा कर दिया। तहसीलदार नीरज पटेल कहते हैं कि सिंचाई विभाग ने काम तो किया लेकिन बहाव इतना तेज था कि वह सफल नही हो सका।
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खेतिहर भूमि कटान का अभी तक नहीं हुआ सर्वे
केवल कागजों में रह गया हुलासपुरवा का वजूद
घाघरा धीरे धीरे लोगों के सपने लीलती रही और प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठा पाया। कटान रोकने के लिए किए गए उपायों की पोल खुल गई। एक महीने में 45 घरों के 130 परिवार बेघर हो गए। उनके जीवनयापन का साधन घाघरा में बह गया और प्रशासन कटान रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा पाया। कटान रोकने के उपाय तो दूर प्रशासन पीड़ितों को अभी राहत भी नहीं उपलब्ध करा पा रहा है। पिछले साल नदी में समा गए सिद्धनपुरवा के ग्रामीणों को अभी तक घर का मुआवजा नहीं मिला है वहीं हुलासपुरवा के किसानों की बह चुकी जमीन का मुआवजा भी नहीं दिया जा सका है।
हुलासपुरवा के कटान पीड़ितों को अभी तक कोई सरकारी इमदाद नहीं मिल पाई है। प्रशासन ने कुछ दिन पहले 80 परिवारों को तिरपाल और खाली डिब्बे थमा दिए गए थे। शनिवार को 50 और परिवारों को तिरपाल और डिब्बे दिए गए हैं। नियमों का हवाला देकर प्रशासन ने यह भी जानने की कोशिश नहीं की कि कटान पीड़ितों के पास कुछ खाने के लिए है या नहीं। इस साल के कटान पीड़ितों को मुआवजे की बात तो दूर पिछले साल के कटान पीड़ितों को कृषि भूमि और आवास अनुदान अभी तक नहीं मिल सका है।
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रुद्रपुर ग्राम पंचायत का एक अन्य मजरा सिद्धनपुरवा पिछले साल पूरी तरह घाघरा में समा गया था। इस मजरे में रहने वाले ग्रामीणों को अभी तक मकानों और खेतिहर भूमि बहने का अनुदान नहीं मिल सका है। इसके अलावा हुलासपुरवा के किसानों की 200 एकड़ जमीन भी एक साल में बह चुकी है लेकिन अभी तक उसका सर्वे भी नहीं पूरा हुआ है। कृषि भूमि का मुआवजा तो मिलना दूर की बात है। एक साल पहले से घाघरा की विनाशलीला देखने के बाद बावजूद प्रशासन ने सबक नहीं लिया। हुलासपुरवा गांव का वजूद मिटाने के बाद घाघरा की विनाशकारी लहरें पड़ोस के गांव हटवा की तरफ बढ़ने लगी हैं। हुलासपुरवा का हश्र देखने के बाद अब हटवा के ग्रामीणों की रूह कांप रही है। हुलासपुरवा में गांव के बीच बना शिव मंदिर हो या सैकड़ों साल पुराना वट वृक्ष सब कुछ नदी के तेज लहरों में बह गया। नदी यहीं नही रुकी धीरे-धीरे गांव के निकट पहुंची घाघरा ने 15 जून को गांव के सोहन, कलीराम और तीरथ का घर कटान कर आगे बढ़ चली। नदी को आगे बढ़ता देख गांव वाले अपना घर खुद तोड़ कर पलायन करने लगे। आखिर शुक्रवार की रात घाघरा ने इस गांव का आखिरी श्रीकेशन का घर भी घाघरा की लहरों में समा गया।
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खोखली साबित हुई गांव बचाने की मुहिम
हुलासपुरवा गांव को कटान से बचाने को चलाई गयी सिंचाई विभाग की मुहिम खोखली साबित हुई। उनके बंबू कैरेट धरे रह गए और घाघरा ने अपना काम पूरा कर दिया। तहसीलदार नीरज पटेल कहते हैं कि सिंचाई विभाग ने काम तो किया लेकिन बहाव इतना तेज था कि वह सफल नही हो सका।