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होशियार रहना होगा कपटी रंगे सियारों से..
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गोला गोकर्णनाथ। लखीमपुर रोड स्थित हनुमान मंदिर में वसंत पंचमी की पूर्व संध्या पर काव्य गोष्ठी हुई, जिसमें कवियों ने अपनी विभिन्न विधाओं के काव्य रंग बिखेरे।
अखिल भारतीय साहित्य परिषद के तत्वावधान में कवि गोष्ठी का शुभारंभ कवियों ने मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पार्चन, दीप जलाकर किया। वाणी वंदना के साथ शुरू हुई कवि गोष्ठी में सुधीर अवस्थी ने पढ़ा कि-
ब्रह्म सुता का मान रख, दिया जगत को ज्ञान।
अपरा विद्या से किया, ऋषियों का सम्मान।
मशहूर गजलकार मधुकर सैदाई ने पढ़ा-
आग मिलकर सभी बुझाते तो
घर किसी का जला नहीं होता।
बृजेश तिवारी ने कहा कि-
जाने कितने फूलों ने शृंगार किया।
मेरी प्रतिभा का उत्तम विस्तार किया।
संचालन करते हुए रमेश पांडे शिखर ने कुछ यूं कहा-
सुलगा अंतस हर सपूत का देशद्रोह के नारों से।
होशियार रहना होगा इन रंगे सियारों से।
मुनेंद्र प्रताप ने पढ़ा कि-
कब से राह निहारता कब आओगे कांत,
पतझड़ हो खेलने लगा फिर से चमन बसंत।
गोष्ठी में द्वारिका प्रसाद रस्तोगी, संत कुमार बाजपेई, श्रीपाल वर्मा, श्रीकांत तिवारी, जसकरन लाल शर्मा, हितेश, सुशांत आदि ने काव्य पाठ किया।
इस मौके पर कन्हैया सिंह, डॉ. शिचंद्र प्रसाद, नत्थूलाल अवस्थी, श्याममोहन मिश्र आदि मौजूद रहे।
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अखिल भारतीय साहित्य परिषद के तत्वावधान में कवि गोष्ठी का शुभारंभ कवियों ने मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पार्चन, दीप जलाकर किया। वाणी वंदना के साथ शुरू हुई कवि गोष्ठी में सुधीर अवस्थी ने पढ़ा कि-
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ब्रह्म सुता का मान रख, दिया जगत को ज्ञान।
अपरा विद्या से किया, ऋषियों का सम्मान।
मशहूर गजलकार मधुकर सैदाई ने पढ़ा-
आग मिलकर सभी बुझाते तो
घर किसी का जला नहीं होता।
बृजेश तिवारी ने कहा कि-
जाने कितने फूलों ने शृंगार किया।
मेरी प्रतिभा का उत्तम विस्तार किया।
संचालन करते हुए रमेश पांडे शिखर ने कुछ यूं कहा-
सुलगा अंतस हर सपूत का देशद्रोह के नारों से।
होशियार रहना होगा इन रंगे सियारों से।
मुनेंद्र प्रताप ने पढ़ा कि-
कब से राह निहारता कब आओगे कांत,
पतझड़ हो खेलने लगा फिर से चमन बसंत।
गोष्ठी में द्वारिका प्रसाद रस्तोगी, संत कुमार बाजपेई, श्रीपाल वर्मा, श्रीकांत तिवारी, जसकरन लाल शर्मा, हितेश, सुशांत आदि ने काव्य पाठ किया।
इस मौके पर कन्हैया सिंह, डॉ. शिचंद्र प्रसाद, नत्थूलाल अवस्थी, श्याममोहन मिश्र आदि मौजूद रहे।