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Lakhimpur Kheri News: अनूठी वास्तु संरचना के लिए प्रसिद्ध है काली मंदिर
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सिगाही का एतिहासिक काली देवी मंदिर
निघासन। कभी जिले की सबसे समृद्ध रियासत रही खैरीगढ़ स्टेट की राजधानी रहे सिंगाही कस्बे में राजमहल के निकट बना भव्य काली देवी मंदिर देवी भक्तों के लिए गहन आस्था का केंद्र है। यह अपनी खूबसूरत वास्तु संरचना के लिए भी प्रसिद्ध है। मंदिर का निर्माण तत्कालीन महारानी सूरत कुमार शाह ने कराया था। शारदीय और वासंतिक नवरात्र पर यहां भारी भीड़ जुटती है।
तहसील निघासन मुख्यालय से नौ किलोमीटर दूर स्थित सिंगाही कस्बे में स्थित मां काली मंदिर का निर्माण वर्ष 1927 में हुआ था। इसका उल्लेख मंदिर में लगे शिलालेख में अंकित है। मंदिर जमीन की सतह से करीब दो फीट की ऊंचाई पर एक हेक्टेयर परिक्षेत्र में बना है। मंदिर पक्की ईंटों से निर्मित है। प्रवेश द्वार खैरीगढ़ स्टेट की शान-ओ-शौकत को प्रदर्शित करता है। मंदिर के चारों ओर 15 फुट ऊंची पक्की चहारदीवारी है और इसी के अंदर मंदिर प्रांगण की सतह से 80 फुट चौड़े वर्गाकार पक्के चबूतरे पर मां काली का मुख्य मंदिर बना है। मंदिर के सामने चारों ओर प्रदक्षिणा पथ है।
मूर्ति अष्टधातु से निर्मित है। मूर्ति पर स्वर्ण छत्र लगा था जो चोरी हो चुका है। मंदिर परिसर में सूर्यदेव, चंद्रदेव, भगवान शंकर, काल भैरव, रामजानकी मंदिर भी हैं। शारदीय और वासंतिक नवरात्र में नेपाल तक से मां काली के दर्शन पूजन के लिए श्रद्धालु आते हैं।
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तहसील निघासन मुख्यालय से नौ किलोमीटर दूर स्थित सिंगाही कस्बे में स्थित मां काली मंदिर का निर्माण वर्ष 1927 में हुआ था। इसका उल्लेख मंदिर में लगे शिलालेख में अंकित है। मंदिर जमीन की सतह से करीब दो फीट की ऊंचाई पर एक हेक्टेयर परिक्षेत्र में बना है। मंदिर पक्की ईंटों से निर्मित है। प्रवेश द्वार खैरीगढ़ स्टेट की शान-ओ-शौकत को प्रदर्शित करता है। मंदिर के चारों ओर 15 फुट ऊंची पक्की चहारदीवारी है और इसी के अंदर मंदिर प्रांगण की सतह से 80 फुट चौड़े वर्गाकार पक्के चबूतरे पर मां काली का मुख्य मंदिर बना है। मंदिर के सामने चारों ओर प्रदक्षिणा पथ है।
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मूर्ति अष्टधातु से निर्मित है। मूर्ति पर स्वर्ण छत्र लगा था जो चोरी हो चुका है। मंदिर परिसर में सूर्यदेव, चंद्रदेव, भगवान शंकर, काल भैरव, रामजानकी मंदिर भी हैं। शारदीय और वासंतिक नवरात्र में नेपाल तक से मां काली के दर्शन पूजन के लिए श्रद्धालु आते हैं।
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