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Lakhimpur Kheri News: जुनैद और सुनील जेल में ही लेंगे अंतिम सांस
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लखीमपुर खीरी। निघासन में अनुसूचित जाति की दो सगी नाबालिग बहनों की दुष्कर्म के बाद हत्या में सुनील और जुनैद को उम्रकैद की सजा के आदेश में एडीजे पाक्सो राहुल सिंह ने स्पष्ट किया उनका शेष प्राकृतिक जीवन जेल में ही बीतेगा। वे अपनी अंतिम सांस जेल में ही लेंगे। इसका पता लगते ही कोर्ट के बाहर खड़े सुनील के परिजन बिलख उठे।
कोर्ट में दोपहर करीब 12 बजे सबसे पहले अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी बृजेश पांडेय और संजय सिंह के साथ हाईकोर्ट से आए वादी के वकील एसके सिंघानिया ने इस मामले को जघन्यतम और विरल से भी विरलतम मामला बताया। दोषियों को फांसी की सजा सुनाए जाने की मांग की। बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेश सिंह मुन्ना, और फिरोज खां ने आपत्ति जताते हुए दोषियों की आर्थिक स्थिति और ठोस सबूत की कमी का हवाला देते हुए कम से कम सजा की मांग की।
सबूत मिटाने के दोषियों की ओर से वकार अहमद और वरुण सिंह ने भी कम सजा की मांग की। इसके विपरीत अभियोजन ने पूरी सजा के रूप में सात साल के कठोर कारावास की मांग की थी। अदालत ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद करीब साढे बारह बजे फैसला लिखवाने के लिए पत्रावली रख ली और लंच के बाद सजा सुनाने की बात कही।
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अदालत करीब पौने तीन बजे फिर से लगी। थोड़ी ही देर में दोनों पक्षों के वकीलों की मौजूदगी में अदालत ने दोषियों को सजा सुना दी। अदालत ने परिस्थितिजन्य सबूतों के मामले में कड़ी से कड़ी जोड़ने वाले अभियोजन कथन को सत्य पाया। अदालत ने वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर जुनैद और सुनील उर्फ छोटू को उम्रकैद की सजा सुनाते हुए स्पष्ट किया कि दोनों को अंतिम सांस भी जेल में ही बितानी होगी। वहीं सबूत मिटाने के दोषी करीमुदद्दीन उर्फ डीडी और मोहम्मद आरिफ को छह-छह साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। सजा के आदेश की नकल की मांग पर अदालत ने चार सेटो में 133 पेज के फैसले की सत्यापित नकल दोषियों को सौंपते हुए उनके फोटो भी कराए।
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कोर्ट में दोपहर करीब 12 बजे सबसे पहले अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी बृजेश पांडेय और संजय सिंह के साथ हाईकोर्ट से आए वादी के वकील एसके सिंघानिया ने इस मामले को जघन्यतम और विरल से भी विरलतम मामला बताया। दोषियों को फांसी की सजा सुनाए जाने की मांग की। बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेश सिंह मुन्ना, और फिरोज खां ने आपत्ति जताते हुए दोषियों की आर्थिक स्थिति और ठोस सबूत की कमी का हवाला देते हुए कम से कम सजा की मांग की।
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सबूत मिटाने के दोषियों की ओर से वकार अहमद और वरुण सिंह ने भी कम सजा की मांग की। इसके विपरीत अभियोजन ने पूरी सजा के रूप में सात साल के कठोर कारावास की मांग की थी। अदालत ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद करीब साढे बारह बजे फैसला लिखवाने के लिए पत्रावली रख ली और लंच के बाद सजा सुनाने की बात कही।
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अदालत करीब पौने तीन बजे फिर से लगी। थोड़ी ही देर में दोनों पक्षों के वकीलों की मौजूदगी में अदालत ने दोषियों को सजा सुना दी। अदालत ने परिस्थितिजन्य सबूतों के मामले में कड़ी से कड़ी जोड़ने वाले अभियोजन कथन को सत्य पाया। अदालत ने वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर जुनैद और सुनील उर्फ छोटू को उम्रकैद की सजा सुनाते हुए स्पष्ट किया कि दोनों को अंतिम सांस भी जेल में ही बितानी होगी। वहीं सबूत मिटाने के दोषी करीमुदद्दीन उर्फ डीडी और मोहम्मद आरिफ को छह-छह साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। सजा के आदेश की नकल की मांग पर अदालत ने चार सेटो में 133 पेज के फैसले की सत्यापित नकल दोषियों को सौंपते हुए उनके फोटो भी कराए।