फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   It will be treated as a court or date!

यहां इलाज मिलेगा या अदालत की तरह तारीख!

Wed, 07 Sep 2016 11:37 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/लखीमपुर खीरी।
अमर उजाला ब्यूरो/लखीमपुर खीरी। Updated Wed, 07 Sep 2016 11:37 PM IST
विज्ञापन
It will be treated as a court or date!
hospital - फोटो : amar ujala
जिला महिला अस्पताल माने परेशानी ही परेशानी, यहां हैं चिकित्सक कम, मरीज ज्यादा  
विज्ञापन

कहने को ये जिला महिला अस्पताल है पर यहां समय से इलाज मिल जाए इस बात की कोई गारंटी नहीं है। यहां डॉक्टरों की संख्या काफी कम है जबकि मरीजों की अधिक। ऐसे में अनेक मरीजों को इलाज कराए बगैर ही अदालत की तरह अगली तारीख लेकर लौट जाना पड़ता है।  
प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बेहद संजीदा है, लेकिन जिले में महिला अस्पताल की सुध लेने वाला कोई नहीं है। यही वजह है कि मरीजों की अधिक संख्या को देखते हुए सीएचसी और पीएचसी की महिला डाक्टरों को यहां अटैच्ड किया गया है, बावजूद इसके बहुत से मरीज डॉक्टरों को दिखाए बिना ही लौट जाते हैं। महिला अस्पताल में रोजाना पांच सौ से अधिक पर्चे बनते हैं। आलम यह है कि दवा लेने के लिए सुबह सात बजे से ही महिलाओं की भीड़ लगने लगती है। बुधवार को महिला अस्पताल में 12 बजे तक 450 से अधिक पर्चे बन चुके थे। हालांकि महिला अस्पताल में डॉ.नम्रता मिश्रा और डॉ.अंजली वर्मा ओपीडी में मरीजों को देख रहीं थी। बावजूद इसके दो बजे के बाद कई महिलाएं दिखाए बिना ही लौट गईं। महिला डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को न तो उचित परामर्श ही मिल पाता है और न उचित उपचार। मरीजों का कहना है कि दवा लेने के लिए जल्दी अस्पताल आना पड़ता है, सिर्फ दो डॉक्टर होने के कारण वे सही से देख भी नहीं पाते। वहीं डॉक्टरों का कहना है कि एक मरीज को देखने और उसका चेकअप करने में 15 से 20 मिनट का समय लगता है पर अधिक  मरीज होने के कारण जो मरीज देखे जाते हैं उनको जल्दी निपटाना पड़ता है। महिला डॉक्टरों के अनुसार ज्यादा से ज्यादा 30 से 40 मरीज ही वह देख पाती हैं।
विज्ञापन


मरीजों की भीड़ से परेशान रहती हैं डॉक्टर
भीषण गर्मी और ऊपर से मरीजों की अधिक संख्या के कारण डॉक्टर तक पसीने से तरबतर हो जाती हैं। एक ओर जहां इंतजार के कारण महिलाएं बेहाल होती हैं, वहीं डॉक्टर भी परेशान रहती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


सीएमएस स्वयं करती हैं आपरेेशन
जिला महिला अस्पताल में हर महीने 70 से अधिक आपरेशन होते हैं। अस्पताल में एक ही परामर्शदाता विशेषज्ञ के पद पर सर्जन डॉ. सुषमा सिंह की तैनाती है। संख्या अधिक होने पर डॉ.सुषमा सिंह के साथ सीएमएस सर्जन मीरा वर्मा को भी आपरेशन करते पड़ते हैं।

इन डॉक्टरों की गई है व्यवस्था
सीएचसी बिजुआ की डॉ. यामिनी बादल, सीएचसी बेहजम और रमियाबेहड़ की संविदा डॉक्टर नम्रता मिश्रा एवं डॉ.अंजलि वर्मा, सीएचसी बेहजम की फार्मासिस्ट कृपाली सक्सेना, सीएचसी रमियाबेहड़ की एलएचवी मंजू देवी, सीएचसी बांकेगंज एवं ईसानगर की बीएचडब्ल्यू मीरा श्रीवास्तव और पालो देवी सहित सीएचसी रमियाबेहड़ की संविदा स्टाफ नर्स विजयलक्ष्मी और वार्ड आया रामलली और कृष्णा देवी को जिला महिला अस्पताल में अटैच किया गया है।


अगस्त में सीएमएस ने किए 40 आपरेशन
मुख्य सचिव ने भले की कुछ दिन पूर्व ही सेहत महकमे के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ साथ सीएमएस को भी मरीज देखने के आदेश दिए हों लेकिन जिला महिला अस्पताल की सीएमएस सप्ताह में चार दिन स्वयं आपरेशन कर रहीं हैं। अगस्त माह में सीएमएस ने करीब 40 आपरेशन किए। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed