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Lakhimpur Kheri News: मानकों पर धान बेचना मुश्किल, राइस मिलर्स उठा रहे फायदा

Tue, 05 Nov 2024 01:19 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 05 Nov 2024 01:19 AM IST
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It is difficult to sell paddy as per standards, rice millers are taking advantage
लखीमपुर खीरी। धान खरीद को लेकर सरकारी क्रय केंद्रों पर मानक तय हैं। तय मानकों पर धान बेचना किसानों के लिए मुश्किल हो रहा है। इस बात का फायदा मंडी के प्राइवेट आढ़तियों समेत जिले के राइस मिलर्स उठा रहे हैं। खरीद शुरू होते ही राइस मिलर्स का सिंडीकेट हावी हो जाता है। इस समय राइस मिलर्स किसानों से सरकारी मूल्य से पांच सौ रुपये कम में धान खरीद रहे हैं। जानकारी होने के बाद भी अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे।
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सीजन शुरू होते ही किसानों से मनमाने दामों पर धान खरीदने का खेल शुरू हो जाता है। सरकारी केंद्रों पर धान में नमी और तमाम कमियां बताकर किसानों को टरका दिया जाता है। मजबूर किसान आढ़तों के अलावा राइस मिलर्स के पास 1700 से 1800 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर धान खरीद रहे हैं। सरकारी क्रय केंद्रों पर किसानों को सामान्य धान 2300 रुपये व ग्रेड ए वाला धान 2320 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जा रहा है। राइस मिल मालिकों के सिंडीकेट के आगे किसान झुकने को मजबूर हैं, जबकि अधिकारी इस पर कोई कदम नहीं उठा रहे।
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खुले बाजार में धान की कीमत सरकारी समर्थन मूल्य से करीब 500 रुपये कम है। इससे किसानों को हजारों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। राइस मिलर्स ने अपने कर्मचारियों को अलर्ट मोड पर रखा है, जो किसान से सीधे संपर्क करते हुए खेत से ही धान खरीद ले रहे हैं, जिसके कारण मंडी शुल्क की चोरी भी हो रही है, लेकिन मंडी के अधिकारी भी इस पर चुप हैं।
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आखिर कैसे पूरा होगा सरकारी धान का लक्ष्य
मंडी से लेकर राइस मिलों के बाहर धान से भरे ट्रैक्टर खड़े दिखाई दे रहे हैं वहीं सरकारी क्रय केंद्रों पर सन्नाटा पसरा है। सौ ऐसे केंद्र हैं, जहां पर अब तक बोहनी तक नहीं हुई है। ऐसे में सवाल उठता है कि शासन से मिले लक्ष्य को कैसे पूरा किया जाएगा। सूत्र बताते हैं कि अब तक जो भी खरीद हुई है उसमें मंडी की भी भूमिका शामिल है। इस बार जिले को 195000 मीट्रिक टन लक्ष्य मिला है। खरीद धीमी होने से अधिकारियों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं।




किसानों का धान हैं, जहां चाहे वहां बेचें
सरकारी केंद्रों पर सन्नाटा है, लेकिन आढ़तों और मिलों पर किसानों की भीड़ है। इसको लेकर डिप्टी आरएमओ संतोष पटेल ने बताया कि किसान की फसल है, वह जहां चाहे वहां बेच सकता है। विभाग लगातार किसानों को जागरूक करते हुए उन्हें सरकारी केंद्रों पर ही धान बेचने की बात कह रहा है। फसल काटने से पहले किसान पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवा लें, इसके बाद ही फसल सुखाकर केंद्र पर लाएं। आढ़तों और राइस मिलों पर औने पौने दामों न फसल न बेचें।
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