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Lakhimpur Kheri News: पेट के कीड़े बच्चों की पढ़ाई में बन रहे बड़ी बाधा
Tue, 10 Feb 2026 12:31 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Tue, 10 Feb 2026 12:31 AM IST
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लखीमपुर खीरी। बच्चों में पेट के कीड़े एक गंभीर, लेकिन अक्सर नजरअंदाज की जाने वाली स्वास्थ्य समस्या बनते जा रहे हैं। यह समस्या विशेष रूप से गंदगी, स्वच्छ पेयजल की कमी और साफ-सफाई के अभाव में अधिक देखने को मिलती है।
पेट के कीड़े बच्चों के शरीर में पहुंचकर पोषक तत्वों को नष्ट कर देते हैं, जिससे उनका शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित होता है। जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरपी वर्मा ने बताया कि पेट के कीड़ों से पीड़ित बच्चों में कमजोरी, खून की कमी, पेट दर्द, उल्टी, दस्त और थकान जैसी समस्याएं आम हैं। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहने पर बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। इसका असर केवल सेहत तक सीमित नहीं रहता, बल्कि बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ता है।
कमजोरी और थकान के कारण बच्चे कक्षा में ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते, जिससे उनकी स्कूल उपस्थिति और शैक्षणिक प्रदर्शन प्रभावित होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, समय-समय पर कृमिनाशक दवा देना, नियमित रूप से हाथ धोने की आदत, स्वच्छ पेयजल का उपयोग और साफ-सुथरा भोजन इस समस्या से बचाव के प्रमुख उपाय हैं।
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अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों की सेहत को लेकर सतर्क रहें, जमीन पर गिरी या गंदी वस्तुएं खाने से रोकें और किसी भी प्रकार के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। नियमित जागरूकता और सावधानी से ही बच्चों को इस गंभीर समस्या से सुरक्षित रखा जा सकता है।
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पेट के कीड़े बच्चों के शरीर में पहुंचकर पोषक तत्वों को नष्ट कर देते हैं, जिससे उनका शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित होता है। जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरपी वर्मा ने बताया कि पेट के कीड़ों से पीड़ित बच्चों में कमजोरी, खून की कमी, पेट दर्द, उल्टी, दस्त और थकान जैसी समस्याएं आम हैं। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहने पर बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। इसका असर केवल सेहत तक सीमित नहीं रहता, बल्कि बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ता है।
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कमजोरी और थकान के कारण बच्चे कक्षा में ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते, जिससे उनकी स्कूल उपस्थिति और शैक्षणिक प्रदर्शन प्रभावित होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, समय-समय पर कृमिनाशक दवा देना, नियमित रूप से हाथ धोने की आदत, स्वच्छ पेयजल का उपयोग और साफ-सुथरा भोजन इस समस्या से बचाव के प्रमुख उपाय हैं।
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अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों की सेहत को लेकर सतर्क रहें, जमीन पर गिरी या गंदी वस्तुएं खाने से रोकें और किसी भी प्रकार के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। नियमित जागरूकता और सावधानी से ही बच्चों को इस गंभीर समस्या से सुरक्षित रखा जा सकता है।