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अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करों के निशाने पर हैं, खेतों में रहने वाले बाघ

Sat, 22 Aug 2020 01:16 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 22 Aug 2020 01:16 AM IST
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International wildlife smugglers are targeted, farm tigers
बांकेगंज क्षेत्र में शिकार का सुराग तलाशने को गन्ने खेत की कांबिंग करते वनकर्मी। - फोटो : LAKHIMPUR
बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के मैलानी रेंज जंगल से सटे इलाके में बाघिन का शिकार किए जाने से यह बात साफ हो गई है कि जंगल के बाहर खेतों में रहने वाले बाघ अंतरराष्ट्रीय शिकारियों और वन्यजीव अंग तस्करों के निशाने पर हैं। यह कोई पहली घटना नहीं है, जब इस इलाके में बाघ का शिकार किया गया हो। इससे पहले भी खटीमा में पकड़े गए तीन शिकारियों ने पूछताछ में बरौंछा नाला के पास ही बाघ का शिकार किए जाने की बात स्वीकार की थी।
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करीब 10 दिन पहले डीटीआर बफरजोन की मैलानी रेंज जंगल से सटे खेत में एक बाघिन का शव मिला था। इस बाघिन के गले में नायलान की रस्सी का फंदा कसा हुआ था। इससे यह बात साबित होती है कि कि बाघिन का शिकार फंदा लगाकर किया गया था। सबसे बड़ी बात यह है कि अब तक शिकार के कोई सुराग वन विभाग के हाथ नहीं लगे हैं। 10 दिन की गहन छानबीन के बाद भी कोई सुराग न मिलने से यह बात स्पष्ट है कि बाघिन का शिकार करने वाले शिकारी काफी शातिर और पेशेवर रहे होंगे, जिसके चलते उन्होंने कोई सुबूत मौके पर नहीं छोड़ा। लगातार हो रही बरसात भी छानबीन में रोड़ा बनी है।
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तीन साल पहले बरोंछा नाला में हुआ था बाघ का शिकार
31 दिसंबर 2017 को पुलिस और एसटीएफ ने खटीमा में भारत-नेपाल सीमा से सटे जंगल में दो तस्करों को पकड़ा था। इनके पास से बाघ की खाल और हड्डियां बरामद हुईं थी। इन दोनों तस्करों में एक गोला क्षेत्र के कमलापुर गांव का और दूसरा मैलानी थाना क्षेत्र के बांकेगंज कस्बा से सटे ढ़ाका गांव का निवासी था। पूछताछ में इस बात का भी खुलासा हुआ कि इन तस्करों के तार अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करों और बावरिया गैंग से जुड़े हुए थे। उन्होंने मैलानी रेंज जंगल के बाहर ढाका गांव के पास अर्जुन के जंगल में बाघ का शिकार किए जाने की बात स्वीकार की थी।
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नेपाल सीमा पर और भी पकड़े गए हैं तस्कर
24 जनवरी 2018 को पलिया-दुधवा रोड पर धीरज भसीन निवासी नीलगिरी अलकनंदा नई दिल्ली को पकड़ा गया था। इसके पास से तेंदुए की दो खालें बरामद हुईं थी। पूछताछ में उसने बताया था कि वह दिल्ली में रहकर गिरोह का संचालन करता है। इसकी सुरागरसी पर जब दिल्ली पुलिस ने इसके फार्म हाउस पर छापा मारा तो वहां भोपाल सिंह नेगी निवासी पचैल थाना धनिया जिला अल्मोड़ा उत्तराखंड भी पकड़ा गया था।
29 जनवरी 2018 को नेपाल के धनगढ़ी में नेपाल पुलिस ने छापा मारकर दो तस्करों को भालू के पित्त और जड़ी-बूटियों के साथ गिरफ्तार किया था। इससे एक सप्ताह पहले कैलाली जिले के शीशापानी में गुलदार की तीन खालें और हड्डियां एक घर से बरामद की गईं थी। 07 मई 2018 को नेशनल हाइवे नंबर 1 नई दिल्ली से नेपाल के वन्यजीव तस्कर मंगल लामा को पकड़ा गया था। इसके पास बाघ की हड्डियां और दूसरे अंग मिले थे। मामले की जांच सीबीआई ने की थी। जिसमें पता चला था कि यह स्थानीय तस्करों और शिकारियों से संपर्क के लिए पलिया आकर कई दिन एक होटल में ठहरा था।
गले में फंदा डालकर शिकार की पहली घटना
बाघिन के गले में फंदा डालकर शिकार की शायद यह पहली घटना है। वन विभाग और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूूरो ( डब्लूसीसीबी) भी हैरान है। काफी कुछ संभव है कि किसी पेशेवर शिकारी ने स्थानीय शिकारियों को बाघ के शिकार का टॉस्क दिया हो। शिकार में कामयाब रहने के बावजूद यह बात अलग है कि बाघिन का शरीर शिकारियों के हत्थे नहीं चढ़ पाया।

डीटीआर जंगल से सटे इलाके में बाघों के खेतों में प्रवास करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। इन बाघों की सुरक्षा वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती है,लेकिन वन विभाग ऐसे बाघों पर पूरी नजर रखते हुए इनकी सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है।
- डॉ अनिल कुमार पटेल, डीडी, डीटीआर, बफरजोन
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