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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   Inspector PK Mishra stranded on not writing the report

रिपोर्ट न लिखने पर फंसे इंस्पेक्टर पीके मिश्र

Thu, 18 May 2017 11:33 PM IST
लख्ाीमपुरख्ाीरी
लख्ाीमपुरख्ाीरी Updated Thu, 18 May 2017 11:33 PM IST
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गैंगरेप में कोर्ट ने खारिज की एफआर, 
इंस्पेक्टर, दरोगा सहित चार तलब


रिपोर्ट लिखने में आनाकानी करने का मामला नया नहीं है। पुलिस हमेशा  रिपोर्ट लिखने मेें अड़ंगा बनती है। हालांकि लंबी कवायद के बाद कानून में बदलाव करते हुए रिपोर्ट न दर्ज करने को भी एक अपराध के रूप में परिभाषित किया गया है। एडीजे लालता प्रसाद ने गैंगरेप के एक इसी तरह के मामले में तत्कालीन शहर कोतवाल पीके मिश्र को आड़े हाथों लिया है। गैंगरेप के मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने तत्कालीन इंस्पेक्टर पीके मिश्र के खिलाफ भी आईपीसी 166 ए के साथ ही एससी, एसटी के तहत संज्ञान लिया है। अदालत ने सख्ती दिखाते हुए डीएम और एसपी को भी पत्र भेजा है। 
बताते चलें कि नीमगांव थाना क्षेत्र में रहने वाली एक दलित महिला ने दरोगा भगवानचंद, सिपाही गंगा सिंह और गांव के ही रंजीत सिंह के खिलाफ गैंगरेप की रिपोर्ट दर्ज कराते हुए बताया था कि 29 दिसंबर 2011 को तीनों लोग बहाने अपने कमरे पर बुलाकर ले गए और वहां तीनों ने उससे दुराचार किया। पीड़िता जब मामले की शिकायत लेकर थाने गई तो रिपोर्ट दर्ज करना तो दूर पुलिस ने उसकी डाक्टरी तक नहीं कराई थी। काफी बाद में आईजी के आदेश पर बमुश्किल रिपोर्ट दर्ज हुई तो पुलिस ने मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी, कई बार जांच कराई गई लेकिन हर बार खाकी के गठजोड़ ने पीड़िता के दर्द को भुला दिया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने बमुश्किल महिला का बयान 164 सीआरपीसी में दर्ज कराया लेकिन कार्यवाही फिर भी सिफर रही।
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कोर्ट ने लिया संज्ञान
पुलिस की अंतिम आख्या के बाद पीड़िता ने जब कोर्ट के समक्ष पेश होते हुए खुद पर हुए अत्याचार की दासतां एक बार कोर्ट मे सुनाया, साथ ही खाकी के गठजोड़ की बात कही। मेडिकल रिपोर्ट और महिला के कलमबंद बयान पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने दरोगा भगवानचंद, सिपाही गंगा सिंह और रंजीत सिंह को गैंगरेप के आरोपी के रूप में तलब किया है। 
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चर्चित इंस्पेक्टर भी नपे 
चाहें मोहम्मदी में दो वकीलों की हत्या का मामला हो या शहर में तत्कालीन सीजेएम पर कथित रूप से हुए जानलेवा हमले का मामला हो, हर चर्चित घटनाओं में अपनी प्रभावशाली भूमिका को लेकर इंस्पेक्टर पीके मिश्र ने जिले में खासा रुतबा बनाया था। एससी, एसटी एक्ट के साथ ही आईपीसी 166 ए का संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने तत्कालीन इंस्पेक्टर पीके मिश्र को भी बतौर अभियुक्त तलब किया है, साथ ही डीएम और एसपी को पत्र लिखा है। मामले में अगली सुनवाई नौ जून को मुकर्रर किया है। 
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