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पचपेड़ी घाट पुल निर्माण के लिए मिट्टी की जांच शुरू
निघासन (लखीमपुर खीरी)
Updated Sat, 13 Dec 2014 07:12 PM IST
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पचपेड़ी घाट पुल बनाने के लिए मिट्टी की जांच का काम शुरू हो गया है। लखनऊ
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से आई टीम ने पुल के पास मशीनाें के जरिए मिट्टी की जांच की। टीम रिपोर्ट
शासन को भेजेगी।
क्षेत्र के लोग कई दशकों से पचपेड़ी घाट रोड पर पुल की मांग करते आ रहे हैं। निघासन सेे लखीमपुर जाने के लिए तीन रास्ते हैं। इनमें से सबसे छोटा रास्ता पचपेड़ी घाट होकर है जो महज 37 किलोमीटर लंबा है। इसी वजह से यहां के लोग लगातार यह मांग करते चले आ रहे हैं कि पचपेड़ी में शारदा नदी पर पुल बना दिया जाए तो इस इलाके की एक बड़ी दिक्कत दूर हो जाएगी। पूर्व की सपा सरकार में मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने इस पुल का सर्वे कराया। इस सर्वे के बाद करीब दस साल पहले यहां पुल को चिह्नित करने वाले पिलर भी लगा दिए गए, लेकिन यह पुल नहीं बन सका। पता चला कि डालर और रुपये की कीमतों में अंतर की वजह से विश्व बैंक ने यह परियोजना बंद कर दी। नवंबर 2013 में विश्व बैंक की परियोजना देखने वाले लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के अलावा कानपुर आईआईटी की टीम ने अपनी रिपोर्ट सरकार को दी थी। चार दिन पहले पुल बनाने के लिए मिट्टी की जांच के लिए ईजीआईएस इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड कंपनी लखनऊ के मैनेजर सतवेंद्र सिंह और उनकी टीम ने जगह-जगह मशीनों से बोर करके वहां की मिट्टी की जांच की। कंपनी के मैनेजर सतवेंद्र सिंह ने बताया कि रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। इसके आधार पर ही यह फैसला लिया जाएगा कि कितनी गहराई का पुल बनाया जाएगा।
क्षेत्र के लोग कई दशकों से पचपेड़ी घाट रोड पर पुल की मांग करते आ रहे हैं। निघासन सेे लखीमपुर जाने के लिए तीन रास्ते हैं। इनमें से सबसे छोटा रास्ता पचपेड़ी घाट होकर है जो महज 37 किलोमीटर लंबा है। इसी वजह से यहां के लोग लगातार यह मांग करते चले आ रहे हैं कि पचपेड़ी में शारदा नदी पर पुल बना दिया जाए तो इस इलाके की एक बड़ी दिक्कत दूर हो जाएगी। पूर्व की सपा सरकार में मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने इस पुल का सर्वे कराया। इस सर्वे के बाद करीब दस साल पहले यहां पुल को चिह्नित करने वाले पिलर भी लगा दिए गए, लेकिन यह पुल नहीं बन सका। पता चला कि डालर और रुपये की कीमतों में अंतर की वजह से विश्व बैंक ने यह परियोजना बंद कर दी। नवंबर 2013 में विश्व बैंक की परियोजना देखने वाले लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के अलावा कानपुर आईआईटी की टीम ने अपनी रिपोर्ट सरकार को दी थी। चार दिन पहले पुल बनाने के लिए मिट्टी की जांच के लिए ईजीआईएस इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड कंपनी लखनऊ के मैनेजर सतवेंद्र सिंह और उनकी टीम ने जगह-जगह मशीनों से बोर करके वहां की मिट्टी की जांच की। कंपनी के मैनेजर सतवेंद्र सिंह ने बताया कि रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। इसके आधार पर ही यह फैसला लिया जाएगा कि कितनी गहराई का पुल बनाया जाएगा।