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Lakhimpur Kheri News: मासूम बनी जंगली पशु का शिकार, खेत में मिला अधखाया शव

Sun, 03 Sep 2023 12:17 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 03 Sep 2023 12:17 AM IST
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Innocent child becomes victim of wild animal, half-eaten body found in the field
ग्रामीणों संग  कांबिंग करते वन कर्मी
महेवागंज/ सुंदरवल। दक्षिण खीरी वन रेंज के शारदा नगर के मंझरा गौढ़ी गांव में रक्षाबंधन पर परिवार के साथ ननिहाल आई सात वर्षीय बच्ची हिंसक पशु का निवाला बन गई। चौबीस घंटे बाद गन्ने के खेत में मिले अधखाए शव को पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। डीएफओ संजय विस्वाल ने परिजन को दस हजार रुपये की तात्कालिक सहायता दी है। ग्रामीण इसे तेंदुए का हमला बता रहे हैं।
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शारदानगर थाना क्षेत्र के मुकुंदा गांव निवासी राजेश कुमार पत्नी रेनू देवी और बच्चों के साथ बृहस्पतिवार को रक्षाबंधन पर्व पर मंझरा गौढ़ी गांव निवासी राम कुमार के घर ससुराल गए थे। बच्चों को ननिहाल में छोड़कर राजेश घर वापस चला गया था। परिजनों के मुताबिक, शुक्रवार देर शाम राजेश की सात साल की पुत्री रिमझिम घर के बाहर कुछ बच्चों के साथ खेल रही थी।
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इस बीच उसे प्यास लगी तो वह अकेले नल पर पानी पीने चली गई। इस दौरान जंगली जानवर ने उस पर हमला कर दिया। बच्ची की चीख सुन परिजन उसकी तरफ भागे। तब तक जानवर उसे उठाकर गन्ने के खेत में भाग गया। शाम से देर रात तक बच्ची को तलाश किया गया। पुलिस और वनकर्मियों ने ग्रामीणों के साथ कांबिंग भी की, लेकिन कुछ पता नहीं चला।
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विधायक योगेश वर्मा भी मौके पर पहुंचे और कांबिंग में भी साथ रहे। शनिवार सुबह फिर तलाश शुरु हुई। गांव से दो सौ मीटर दूर गन्ने के खेत में मासूम का अधखाया शव बरामद हुआ है।
शनिवार सुबह डीएफओ संजय विश्वाल, एसडीओ और रेंजर अभय कुमार मल्ल समेत कई वनाधिकारी मौके पर पहुंचे। प्रभारी निरीक्षक विमल गौतम ने बताया कि बच्ची का अधखाया शव खेत में मिला है। ग्रामीण तेंदुए के हमले की आशंका जता रहे हैं। हालांकि न जंगली जानवर नजर आया और न ही उसके पग मार्क।

किसी पशु के पगमार्क नही मिले हैं। भेड़िया या लकड़बग्घा हो सकता है। निगरानी की जा रही है। ग्रामीणों से सचेत रहने को कहा गया है। परिजनों को दस हजार रुपये की तात्कालिक सहायता दी गई है।


- श्याम किशोर शुक्ला, फॉरेस्टर शारदा नगर


पिता बोले- जरा भी एहसास होता, तो बेटी को अकेला न छोड़ता

पिता राजेश कुमार ने बताया कि वह मेहनत-मजदूरी कर घर का खर्च चलता है। बेटी रिमझिम बहुत खुश थी। दो दिन पहले से ही ननिहाल जाने के लिए बहुत उत्सुक थी। ननिहाल में बच्चों को छोड़ वह घर आ गया था। रोते हुए कहा कि हल्का सा भी एहसास होता तो उसी दिन परिवार को साथ ले आता। शुक्रवार शाम को पत्नी का फोन आया कि बेटी को बाघ उठा ले गया है। जिसके बाद उनके होश उड़ गए। रिमझिम तीन बच्चों में मंझली थी।

ग्रामीणों संग  कांबिंग करते वन कर्मी

ग्रामीणों संग  कांबिंग करते वन कर्मी

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