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Lakhimpur Kheri News: ईएनटी विभाग में पहली बार दी गई इंजेक्शन थेरेपी
Tue, 26 May 2026 11:23 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Tue, 26 May 2026 11:23 PM IST
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मेडिकल कॉलेज में आधुनिक पद्यति से इलाज करते चिकित्सक। स्रोत : मेडिकल कॉलेज
ओयल। मेडिकल कॉलेज के अधीन जिला अस्पताल के ईएनटी विभाग में पहली बार कान के मरीज को इंट्राटिम्पेनिक स्टेरॉयड इंजेक्शन थेरेपी दी गई। आधुनिक तकनीक से किए गए इस उपचार को विभाग की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
40 वर्षीय मरीज तेज धमाके के बाद अचानक सुनाई कम होने और कान में लगातार सनसनाहट (टिनिटस) की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचा था। डॉक्टरों के अनुसार, यह स्थिति मेडिकल इमरजेंसी मानी जाती है और समय पर इलाज न मिलने पर सुनने की क्षमता स्थायी रूप से प्रभावित हो सकती है।
ईएनटी विशेषज्ञों ने मरीज की जांच के बाद तुरंत उपचार शुरू किया। अंतरराष्ट्रीय गाइडलाइंस और उपलब्ध मेडिकल लिटरेचर के आधार पर मरीज को कान के पर्दे के अंदर इंट्राटिम्पेनिक स्टेरॉयड इंजेक्शन दिया गया। डॉ. मनोज शर्मा ने इंजेक्शन थेरेपी दी, जबकि डॉ. श्वेता ने प्रक्रिया से पहले मरीज के कान को सुन्न किया।
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डॉक्टरों का कहना है कि इस तकनीक से अचानक सुनाई कम होने वाले मरीजों को काफी लाभ मिल सकता है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन अब भविष्य में प्लेटलेट रिच प्लाज्मा (पीआरपी) जैसी अत्याधुनिक तकनीक को भी शुरू करने की तैयारी में है। इसके लिए अन्य विभागों के साथ समन्वय कर संभावनाओं पर चर्चा की जा रही है।
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40 वर्षीय मरीज तेज धमाके के बाद अचानक सुनाई कम होने और कान में लगातार सनसनाहट (टिनिटस) की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचा था। डॉक्टरों के अनुसार, यह स्थिति मेडिकल इमरजेंसी मानी जाती है और समय पर इलाज न मिलने पर सुनने की क्षमता स्थायी रूप से प्रभावित हो सकती है।
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ईएनटी विशेषज्ञों ने मरीज की जांच के बाद तुरंत उपचार शुरू किया। अंतरराष्ट्रीय गाइडलाइंस और उपलब्ध मेडिकल लिटरेचर के आधार पर मरीज को कान के पर्दे के अंदर इंट्राटिम्पेनिक स्टेरॉयड इंजेक्शन दिया गया। डॉ. मनोज शर्मा ने इंजेक्शन थेरेपी दी, जबकि डॉ. श्वेता ने प्रक्रिया से पहले मरीज के कान को सुन्न किया।
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डॉक्टरों का कहना है कि इस तकनीक से अचानक सुनाई कम होने वाले मरीजों को काफी लाभ मिल सकता है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन अब भविष्य में प्लेटलेट रिच प्लाज्मा (पीआरपी) जैसी अत्याधुनिक तकनीक को भी शुरू करने की तैयारी में है। इसके लिए अन्य विभागों के साथ समन्वय कर संभावनाओं पर चर्चा की जा रही है।