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Lakhimpur Kheri News: सीडीओ को नहीं दी गई पास-फेल सैंपलों की जानकारी
Sat, 27 Jun 2026 11:19 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 27 Jun 2026 11:19 PM IST
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लखीमपुर खीरी। विकास भवन स्थित ग्रामीण अभियंत्रण विभाग (आरईएस) की प्रयोगशाला की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने के बाद मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) अभिषेक कुमार ने विस्तृत रिपोर्ट तलब की।
विभाग ने अब तक जांचे गए सैंपलों की संख्या की जानकारी तो उपलब्ध कराई, लेकिन पास और फेल हुए सैंपलों का अलग-अलग विवरण उपलब्ध नहीं कराया। इसके बाद सीडीओ ने मामले की जांच कराने की बात कही है।
ग्राम पंचायतों में बनने वाली सड़क, खड़ंजा, इंटरलॉकिंग समेत अन्य निर्माण कार्यों में प्रयुक्त सामग्री की जांच आरईएस की प्रयोगशाला में कराई जाती है। नियमों के अनुसार, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जांच के बाद ही उसके उपयोग की अनुमति दी जाती है। संवाद न्यूज एजेंसी ने पूर्व में ''''निर्माण सामग्री की जांच पर सवाल, रिपोर्ट न मिलने से बढ़ा संशय'''' शीर्षक से खबर प्रकाशित कर प्रयोगशाला की रिपोर्ट सार्वजनिक न होने का मुद्दा उठाया था।
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खबर का संज्ञान लेते हुए सीडीओ ने विभाग से विस्तृत रिपोर्ट मांगी। विभाग की ओर से जांचे गए सैंपलों की जानकारी दी गई, लेकिन पास और फेल हुए सैंपलों का अलग-अलग आंकड़ा उपलब्ध नहीं कराया गया।
विभाग के एक कर्मचारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर आरोप लगाया कि प्रयोगशाला में सैंपल पास कराने के लिए प्रति सैंपल पांच हजार रुपये अतिरिक्त वसूले जाते हैं। उसका यह भी दावा है कि जांच के लिए बेहतर गुणवत्ता वाले सैंपल ही लिए जाते हैं, इसलिए सैंपल फेल नहीं होते। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
मुख्य विकास अधिकारी अभिषेक कुमार ने बताया कि विभाग ने प्रयोगशाला की जांच संबंधी रिपोर्ट दिखाई है, लेकिन पास और फेल सैंपलों का विवरण उपलब्ध नहीं कराया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जांच कराई जाएगी।
इस संबंध में आरईएस के अधिशासी अभियंता का पक्ष जानने के लिए उनसे फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ। उन्हें व्हाट्सएप पर संदेश भी भेजा गया, जिसका समाचार लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं मिला।
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विभाग ने अब तक जांचे गए सैंपलों की संख्या की जानकारी तो उपलब्ध कराई, लेकिन पास और फेल हुए सैंपलों का अलग-अलग विवरण उपलब्ध नहीं कराया। इसके बाद सीडीओ ने मामले की जांच कराने की बात कही है।
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ग्राम पंचायतों में बनने वाली सड़क, खड़ंजा, इंटरलॉकिंग समेत अन्य निर्माण कार्यों में प्रयुक्त सामग्री की जांच आरईएस की प्रयोगशाला में कराई जाती है। नियमों के अनुसार, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जांच के बाद ही उसके उपयोग की अनुमति दी जाती है। संवाद न्यूज एजेंसी ने पूर्व में ''''निर्माण सामग्री की जांच पर सवाल, रिपोर्ट न मिलने से बढ़ा संशय'''' शीर्षक से खबर प्रकाशित कर प्रयोगशाला की रिपोर्ट सार्वजनिक न होने का मुद्दा उठाया था।
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खबर का संज्ञान लेते हुए सीडीओ ने विभाग से विस्तृत रिपोर्ट मांगी। विभाग की ओर से जांचे गए सैंपलों की जानकारी दी गई, लेकिन पास और फेल हुए सैंपलों का अलग-अलग आंकड़ा उपलब्ध नहीं कराया गया।
विभाग के एक कर्मचारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर आरोप लगाया कि प्रयोगशाला में सैंपल पास कराने के लिए प्रति सैंपल पांच हजार रुपये अतिरिक्त वसूले जाते हैं। उसका यह भी दावा है कि जांच के लिए बेहतर गुणवत्ता वाले सैंपल ही लिए जाते हैं, इसलिए सैंपल फेल नहीं होते। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
मुख्य विकास अधिकारी अभिषेक कुमार ने बताया कि विभाग ने प्रयोगशाला की जांच संबंधी रिपोर्ट दिखाई है, लेकिन पास और फेल सैंपलों का विवरण उपलब्ध नहीं कराया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जांच कराई जाएगी।
इस संबंध में आरईएस के अधिशासी अभियंता का पक्ष जानने के लिए उनसे फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ। उन्हें व्हाट्सएप पर संदेश भी भेजा गया, जिसका समाचार लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं मिला।