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दो मामलों में नौ लोगों को उम्रकैद
लखीमपुर खीरी
Updated Tue, 24 Mar 2015 11:20 PM IST
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हत्या के दो अलग-अलग मामलों में नौ लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। भूमि विवाद के चलते दो ग्रामीणों की पीट-पीटकर हत्या करने के मामले में विशेष एडीजे एके पांडेय ने एक ही परिवार के पांच लोगों को दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है तो खेत में चोरी से गन्ना काटने से मना करने पर ग्रामीण को पीट-पीटकर मार डालने के मामले में एडीजे एमजे मदार ने चार लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई है।
पहले मामले में अभियोजन पक्ष रखते हुए एडीजीसी निर्मल चौधरी ने अदालत को बताया कि थाना हैदराबाद के ग्राम ममरी में दो पक्षों के बीच कृषि भूमि के मालिकाना हक के लिए विवाद चल रहा था, इस पर एसडीएम गोला ने विवादित खेत परागदत्त की सुपुर्दगी में दे दिया। आरोप है कि 29 अप्रैल 1997 की शाम साढे़ सात बजे परागदत्त गेहूं की फसल की मड़ाई कर रहा था। नागेंद्र, उसके चाचा सुरेंद्र और भतीजे कमलेश भी मड़ाई में मदद कर रहे थे। तभी दूसरी ओर से रामसिंह वेदप्रकाश, नंदराम, गिरधारी, रूपनलाल और प्रेमराज आ गए और विरोध जताते हुए मड़ाई कर रहे लोगों पर हमला कर दिया। आरोप है कि सुरेंद्र और कमलेश की हमलावरों ने पीट-पीटकर हत्या कर दी।
अदालत में सुनवाई के दौरान चंद्रप्रकाश और शिवप्रकाश की भूमिका भी सामने आई। इस पर उन्हें भी अदालत ने बतौर मुल्जिम तलब कर लिया। बाद में दोनों की तलबी को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। जिस पर हाईकोर्ट ने दोनों के खिलाफ सुनवाई पर रोक लगा दी, लिहाजा अदालत में पूर्व नामजद छह हमलावरों के खिलाफ ही मुकदमा चला। अदालती सुनवाई के बीच में ही प्रेमराज का निधन हो गया। मंगलवार को एडीजे अरविंद पांडेय ने अपना फैसला सुनाते हुए रामसिंह, वेदप्रकाश, नंदराम, गिरधारी और रूपनलाल को दोषी पाते हुए सभी को उम्रकैद की सजा सुनाई, साथ ही सभी पर 14-14 हजार रुपये का जुर्माना भी डाला।
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उधर, खेत में चोरी से गन्ना काटने से मना करने पर ग्रामीण को पीट-पीटकर मार डालने के मामले में एडीजे एमजे मदार ने चार हत्याभियुक्तों को उम्रकैद की सजा सुनाई। सभी पर 12-12 हजार रुपये का जुर्माना भी डाला गया है।
अभियोजन पक्ष रखते हुए एडीजीसी कफील अहमद अंसारी ने बताया कि पसगवां थाना क्षेत्र के गांव चकपिहानी निवासी राकेश के गन्ने के खेत से पांच जनवरी 2003 को गांव के ही फरीद, नजीम, चुनकारी, और इंसान चोरी से गन्ना काट रहे थे, जब राकेश, बृजकिशोर के साथ अपने खेत देखने गए तो उन्होंने चोरी से गन्ना काटने का विरोध किया तो सभी लोगों ने उन्हें घेरकर पिटाई शुरू कर दी। बुरी तरह से घायल हुए बृजकिशोर को जब घर वाले डनलप से लेकर अस्पताल जा रहे थे तभी रास्ते में उसने दम तोड़ दिया। इस मामले को साबित करने के लिए सरकारी वकील ने राकेश, छोटेलाल और पीके गंगवार की गवाही अदालत में दर्ज कराई गई। अदालत ने चारों हत्यारोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है साथ ही सभी पर 12-12 हजार रुपये का जुर्माना डाला है।
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पहले मामले में अभियोजन पक्ष रखते हुए एडीजीसी निर्मल चौधरी ने अदालत को बताया कि थाना हैदराबाद के ग्राम ममरी में दो पक्षों के बीच कृषि भूमि के मालिकाना हक के लिए विवाद चल रहा था, इस पर एसडीएम गोला ने विवादित खेत परागदत्त की सुपुर्दगी में दे दिया। आरोप है कि 29 अप्रैल 1997 की शाम साढे़ सात बजे परागदत्त गेहूं की फसल की मड़ाई कर रहा था। नागेंद्र, उसके चाचा सुरेंद्र और भतीजे कमलेश भी मड़ाई में मदद कर रहे थे। तभी दूसरी ओर से रामसिंह वेदप्रकाश, नंदराम, गिरधारी, रूपनलाल और प्रेमराज आ गए और विरोध जताते हुए मड़ाई कर रहे लोगों पर हमला कर दिया। आरोप है कि सुरेंद्र और कमलेश की हमलावरों ने पीट-पीटकर हत्या कर दी।
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अदालत में सुनवाई के दौरान चंद्रप्रकाश और शिवप्रकाश की भूमिका भी सामने आई। इस पर उन्हें भी अदालत ने बतौर मुल्जिम तलब कर लिया। बाद में दोनों की तलबी को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। जिस पर हाईकोर्ट ने दोनों के खिलाफ सुनवाई पर रोक लगा दी, लिहाजा अदालत में पूर्व नामजद छह हमलावरों के खिलाफ ही मुकदमा चला। अदालती सुनवाई के बीच में ही प्रेमराज का निधन हो गया। मंगलवार को एडीजे अरविंद पांडेय ने अपना फैसला सुनाते हुए रामसिंह, वेदप्रकाश, नंदराम, गिरधारी और रूपनलाल को दोषी पाते हुए सभी को उम्रकैद की सजा सुनाई, साथ ही सभी पर 14-14 हजार रुपये का जुर्माना भी डाला।
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उधर, खेत में चोरी से गन्ना काटने से मना करने पर ग्रामीण को पीट-पीटकर मार डालने के मामले में एडीजे एमजे मदार ने चार हत्याभियुक्तों को उम्रकैद की सजा सुनाई। सभी पर 12-12 हजार रुपये का जुर्माना भी डाला गया है।
अभियोजन पक्ष रखते हुए एडीजीसी कफील अहमद अंसारी ने बताया कि पसगवां थाना क्षेत्र के गांव चकपिहानी निवासी राकेश के गन्ने के खेत से पांच जनवरी 2003 को गांव के ही फरीद, नजीम, चुनकारी, और इंसान चोरी से गन्ना काट रहे थे, जब राकेश, बृजकिशोर के साथ अपने खेत देखने गए तो उन्होंने चोरी से गन्ना काटने का विरोध किया तो सभी लोगों ने उन्हें घेरकर पिटाई शुरू कर दी। बुरी तरह से घायल हुए बृजकिशोर को जब घर वाले डनलप से लेकर अस्पताल जा रहे थे तभी रास्ते में उसने दम तोड़ दिया। इस मामले को साबित करने के लिए सरकारी वकील ने राकेश, छोटेलाल और पीके गंगवार की गवाही अदालत में दर्ज कराई गई। अदालत ने चारों हत्यारोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है साथ ही सभी पर 12-12 हजार रुपये का जुर्माना डाला है।