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बाघों की गणना अंतिम चरण में, 1220 कैमरे लगाए गए
सार
दुधवा पार्क : पहले लगे कैमरों का डाटा कलेक्शन पूरा, लगाए गए कैमरों की हो रही निगरानी
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दुधवा में कैमरे लगाते वनकर्मी।
विस्तार
बाघों की गणना अंतिम चरण में, 1220 कैमरे लगाए गए
यूपी के 18 वन प्रभागों में हर चार साल बाद किया जाता है टाइगर इस्टीमेशन
लखीमपुर खीरी। बाघों की गणना (टाइगर इस्टीमेशन) के तहत साइन सर्वे का काम पूरा होने के बाद दुधवा टाइगर रिजर्व कोर जोन और बफरजोन में 1220 कैमरे लगाए गए हैं। इन कैमरों में तस्वीरों की ट्रैपिंग शुरू हो गई है। यह कैमरे डब्ल्यूडब्लयूएफ के सहयोग से लगाए गए है। कैमरा ट्रैपिंग टाइगर इस्टीमेशन का तीसरा चरण है।
टाइगर इस्टीमेशन के लिए दुधवा टाइगर रिजर्व के मझगईं, उत्तर निघासन, दक्षिण निघासन, धौरहरा और पलिया रेजों में कैमरे स्थापित किए गए हैं। इसके साथ ही कर्तनियाघाट वन्यजीव विहार में भी कैमरे लगाए गए हैं। इससे पहले दुधवा टाइगर रिजर्व के किशनपुर सेंक्चुरी, बफरजोन भीरा, मैलानी, संपूर्णानगर रेंजों में कैमरा ट्रैपिंग का काम पूरा हो चुका है। इन जगहों से हटाए गए कैमरे अब दुधवा टाइगर रिजर्व के अन्य हिस्सों में लगाए गए हैं।
टाइगर इस्टीमेशन के उत्तर प्रदेश नोडल अधिकारी, दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक ने बताया कि पूरे दुधवा टाइगर रिजर्व में साइन सर्वे का काम पूरा हो चुका है। इन कैमरों से डाटा इकट्ठा करने के बाद अब बाकी बची जगहों पर कैमरे लगाए जा रहे हैं। किशनुपर सेंक्चुरी और बफरजोन के भीरा मैलानी और संपूर्णानगर में पहले ही कैमरे लगाकर हटाए जा चुके हैं। अब उन्हीं कैमरों को बाकी बचे हिस्से में लगाया जा रहा है।
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उन्होंने बताया कि डाटा कलेक्शन के दौरान पता चला कि कुछ कैमरों में तकनीकी खराबी के कारण फोटो ट्रैप नहीं हो सकी थीं। उनके स्थान पर दूसरे कैमरे लगाए गए हैं। उन्होंने बताया कैमरों की लगातार निगरानी की जा रही है ताकि कैमरे चोरी न होने पाएं और उनकी बैटरी आदि दुरुस्त रहे। उन्होंने दावा किया कि अप्रैल के अंत तक कैमरा ट्रैपिंग का काम पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद पूरा डाटा एकत्र कर भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून भेजा जाएगा। जहां तस्वीरों का विश्लेषण कर बाघ और तेंदुओं की संख्या का अनुमान लगाया जाएगा।
दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक ने बताया कि टाइगर इस्टीमेशन का काम पूरे देश में एक साथ चरणबद्घ तरीके से किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के 18 वन प्रभागों में टाइगर इस्टीमेशन का काम जारी है। टाइगर इस्टीमेशन हर चार साल बाद किया जाता है।
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यूपी के 18 वन प्रभागों में हर चार साल बाद किया जाता है टाइगर इस्टीमेशन
लखीमपुर खीरी। बाघों की गणना (टाइगर इस्टीमेशन) के तहत साइन सर्वे का काम पूरा होने के बाद दुधवा टाइगर रिजर्व कोर जोन और बफरजोन में 1220 कैमरे लगाए गए हैं। इन कैमरों में तस्वीरों की ट्रैपिंग शुरू हो गई है। यह कैमरे डब्ल्यूडब्लयूएफ के सहयोग से लगाए गए है। कैमरा ट्रैपिंग टाइगर इस्टीमेशन का तीसरा चरण है।
टाइगर इस्टीमेशन के लिए दुधवा टाइगर रिजर्व के मझगईं, उत्तर निघासन, दक्षिण निघासन, धौरहरा और पलिया रेजों में कैमरे स्थापित किए गए हैं। इसके साथ ही कर्तनियाघाट वन्यजीव विहार में भी कैमरे लगाए गए हैं। इससे पहले दुधवा टाइगर रिजर्व के किशनपुर सेंक्चुरी, बफरजोन भीरा, मैलानी, संपूर्णानगर रेंजों में कैमरा ट्रैपिंग का काम पूरा हो चुका है। इन जगहों से हटाए गए कैमरे अब दुधवा टाइगर रिजर्व के अन्य हिस्सों में लगाए गए हैं।
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टाइगर इस्टीमेशन के उत्तर प्रदेश नोडल अधिकारी, दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक ने बताया कि पूरे दुधवा टाइगर रिजर्व में साइन सर्वे का काम पूरा हो चुका है। इन कैमरों से डाटा इकट्ठा करने के बाद अब बाकी बची जगहों पर कैमरे लगाए जा रहे हैं। किशनुपर सेंक्चुरी और बफरजोन के भीरा मैलानी और संपूर्णानगर में पहले ही कैमरे लगाकर हटाए जा चुके हैं। अब उन्हीं कैमरों को बाकी बचे हिस्से में लगाया जा रहा है।
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उन्होंने बताया कि डाटा कलेक्शन के दौरान पता चला कि कुछ कैमरों में तकनीकी खराबी के कारण फोटो ट्रैप नहीं हो सकी थीं। उनके स्थान पर दूसरे कैमरे लगाए गए हैं। उन्होंने बताया कैमरों की लगातार निगरानी की जा रही है ताकि कैमरे चोरी न होने पाएं और उनकी बैटरी आदि दुरुस्त रहे। उन्होंने दावा किया कि अप्रैल के अंत तक कैमरा ट्रैपिंग का काम पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद पूरा डाटा एकत्र कर भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून भेजा जाएगा। जहां तस्वीरों का विश्लेषण कर बाघ और तेंदुओं की संख्या का अनुमान लगाया जाएगा।
दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक ने बताया कि टाइगर इस्टीमेशन का काम पूरे देश में एक साथ चरणबद्घ तरीके से किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के 18 वन प्रभागों में टाइगर इस्टीमेशन का काम जारी है। टाइगर इस्टीमेशन हर चार साल बाद किया जाता है।