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दम तोड़ रही उल्ल नदी के पुनर्जीवन के लिए एक भगीरथ की तलाश

Fri, 06 May 2022 11:51 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 06 May 2022 11:51 PM IST
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In search of a Bhagiratha to revive the dying Ulla river
कूड़े-कचरे से भरी उल्ल नदी।
गंदगी, जलकुंभी, हानिकारक रसायनों ने खत्म कर दी उल्ल नदी की स्वच्छता
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लखीमपुर खीरी। शहर से सटकर उत्तर दिशा में बहने वाली उल्ल नदी का अस्तित्व भारी जल प्रदूषण के चलते खतरे में है। एक तरफ नदी के दोनों किनारों पर कूड़ा कचरा डाला जा रहा है तो दूसरी तरफ पूरे शहर का गंदा पानी इस नदी में उड़ेला जा रहा है। इससे नदी का जल न पवित्र रह गया है न ही निर्मल। उल्ल नदी के पुनर्जीवन के लिए एक भगीरथ की तलाश है।
उल्ल नदी में मिलने वाले सैकड़ों नाले इसे इतना गंदा कर चुके हैं कि यह नदी खुद किसी नाले से कम नहीं लगती। पूरा पानी काला हो चुका है। नदी में उगी जलकुंभी और तैरती पॉलीथिन इस नदी की नियति बन चुकी है। शासन-प्रशासन की ओर से भी इस नदी को अब तक प्रदूषण मुक्त कराने के कोई प्रयास नहीं किए गए। कभी इस नदी को शहर की लाइफ लाइन कहा जाता था। कारण यह है कि इसी नदी से शहर का जल स्तर स्थिर है। यदि यह नदी ही सूख गई तो शहर का जलस्तर भी काफी नीचे चला जाएगा। इसलिए भी इस नदी का बने रहना जरूरी है।
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बारिश के दिनों में यह नदी जब पूरे उफान पर होती है तब इससे पास-पड़ोस के खेतों को भी पानी मिल जाता है। शहर से होकर गुजरने वाली इस नदी की लंबाई करीब 95 किलोमीटर है। पीलीभीत जिले से निकलने वाली यह नदी दुधवा टाइगर रिजर्व से होकर लखीमपुर शहर की सीमा से होती हुई बहती है और सीतापुर जिले की सीमा के पास घाघरा नदी में विलीन हो जाती है। मौजूदा डीएम ने उल्ल नदी के पुनरुद्घार के लिए एक कार्ययोजना तैयार की है, लेकिन इस कार्ययोजना पर कब काम शुरू हो पाता है यह अभी तय नहीं है।
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सीडीओ अनिल कुमार सिंह का कहना है कि उल्ल नदी के पुनरुद्घार का काम जल्द ही शुरू कराया जाएगा। बरसात का मौसम शुरू होने से पहले ही जलकुंभी और सिल्ट सफाई का काम मनरेगा के तहत पूरा कराने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही नदी के दोनों किनारों पर फलदार, छायादार और औषधीय पौधे लगाए जाएंगे। यही नहीं उल्ल नदी का सौंदर्यीकरण कर पर्यटन की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी।
उल्ल नदी शहर की लाइफ लाइन कही जाती थी। इसके तट पर सेठ घाट और मुक्तिधाम जैसे पवित्र स्थल हैं। जहां धार्मिक आयोजन होते हैं। उल्ल नदी में पड़ने वाली गंदगी से नदी अपवित्र हो गई है। इसका पानी आचमन लायक भी नहीं बचा है। इसके पुनरुद्घार के लिए सार्थक प्रयास किए जाने की जरूरत है।
- मधुवन, पुजारी राधाकृष्ण मंदिर, सेठघाट
उल्ल नदी के किनारे कभी वातावरण को रमणीयता प्रदान करते थे। इसका निर्मल और शीतल जल शहर के लोगों को सुकून देता था। आज कूड़ा-कचरा पड़ने से नदी मैली हो गई है। इसकी सफाई और सौंदर्यीकरण कर इसके किनारे पिकनिक स्पॉट विकसित किए जा सकते हैं। इसका पुनरुद्घार जरूरी है।
- सीताराम, सेठघाट
उल्ल नदी के पुनरुद्घार के लिए दृढ़ संकल्प शक्ति की जरूरत है। थोड़े से प्रयास से ही इसे फिर से मूल रूप में लाया जा सकता है। इसके लिए सरकारी प्रयास के साथ साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने वाली स्वयंसेवी संस्थाओं को भी आगे आना होगा। आम लोगों को भी इस कार्य में सहयोग करना चाहिए।

- विवेक मिश्र, सेठघाट रोड
उल्ल नदी को शहर में पवित्र नदी का स्थान प्राप्त है। दुर्भाग्यवश नदी की निर्मलता और पवित्रता समाप्त हो चुकी है। सरकारी तंत्र के साथ-साथ हम सभी इसके लिए जिम्मेदार हैं। जिन गलतियों के कारण उल्ल नदी का अस्तित्व खतरे में हैं। उन गलतियों में सुधार कर लें तो भी नदी मूल स्वरूप में आ सकती है।
- राज बाजपेई, पुजारी, बाबूराम सर्राफ घाट
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