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शिरडी से खीरी पहुंचे 1391 प्रवासी मजदूर
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अपना सामान सिर पर लादे आते मजदूर
- फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। शिरडी (महाराष्ट्र) से स्पेशल ट्रेन से करीब 1391 मजदूर शनिवार को अपराह्न करीब दो बजे सीतापुर पहुंचे, जहां से उन्हें 43 रोडवेज बसों से लखीमपुर लाया गया। मजदूरों का आवश्यक परीक्षण करने के बाद उन्हें अलग-अलग बनाए गए स्क्रीनिंग कैंपों में क्वारंटीन किया गया है। यहां पर मेडिकल जांच पूरी होने के बाद सही पाए गए मजदूरों को अनाज किट देकर बसों से उनके गांव भेजा जाएगा।
जिला प्रशासन ने इनके ठहरने के लिए छह स्क्रीनिंग कैंप बनाए हैं, जिनमें तहसीलवार मजदूरों को रखा गया है। सदर तहसील के 450 मजदूरों को रायल प्रूडेंस कॉलेज में क्वारंटीन किया गया है। शेष मजदूरों को सीतापुर रोड पर स्थित अजय शांति डिग्री कॉलेज, रामेश्वर दयाल डिग्री कॉलेज, विवेकानंद इंटर कॉलेज बाबागंज, युवराज दत्त इंटर कॉलेज ओयल और सृजन हास्पिटल पैरा मेडिकल कॉलेज में क्वारंटीन किया गया है। मजदूरों को लेकर आने वाली ट्रेन को सुबह 9.30 बजे सीतापुर पहुंचना था, जो करीब चार घंटे देरी से सीतापुर पहुंची। इससे ट्रेन में मजदूर और उनके बच्चे भूख-प्यास से बिलबिला गए, उन्हें सीतापुर में खाना खिलाया गया। ज्यादातर मजदूर अपने परिवारों सहित ईंट-भट्टों पर पथाई का काम करते थे। डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि 43 बसों के जरिए इन मजदूरों को सीतापुर से लाकर विभिन्न स्क्रीनिंग कैंपों में रखा गया है, जहां मेडिकल जांच के बाद सही पाए गए मजदूरों को उनके गांवों में भेजा जाएगा, जहां पर निगरानी समितियों की देखरेख में यह लोग 21 दिनों तक होम क्वारंटीन रहेंगे। उन्होंने कहा कि यदि किसी ने होम क्वारंटीन प्रोटोकाल का उल्लंघन किया, तो उसे तत्काल संस्थागत क्वारंटीन सेंटर में भेज दिया जाएगा।
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जिला प्रशासन ने इनके ठहरने के लिए छह स्क्रीनिंग कैंप बनाए हैं, जिनमें तहसीलवार मजदूरों को रखा गया है। सदर तहसील के 450 मजदूरों को रायल प्रूडेंस कॉलेज में क्वारंटीन किया गया है। शेष मजदूरों को सीतापुर रोड पर स्थित अजय शांति डिग्री कॉलेज, रामेश्वर दयाल डिग्री कॉलेज, विवेकानंद इंटर कॉलेज बाबागंज, युवराज दत्त इंटर कॉलेज ओयल और सृजन हास्पिटल पैरा मेडिकल कॉलेज में क्वारंटीन किया गया है। मजदूरों को लेकर आने वाली ट्रेन को सुबह 9.30 बजे सीतापुर पहुंचना था, जो करीब चार घंटे देरी से सीतापुर पहुंची। इससे ट्रेन में मजदूर और उनके बच्चे भूख-प्यास से बिलबिला गए, उन्हें सीतापुर में खाना खिलाया गया। ज्यादातर मजदूर अपने परिवारों सहित ईंट-भट्टों पर पथाई का काम करते थे। डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि 43 बसों के जरिए इन मजदूरों को सीतापुर से लाकर विभिन्न स्क्रीनिंग कैंपों में रखा गया है, जहां मेडिकल जांच के बाद सही पाए गए मजदूरों को उनके गांवों में भेजा जाएगा, जहां पर निगरानी समितियों की देखरेख में यह लोग 21 दिनों तक होम क्वारंटीन रहेंगे। उन्होंने कहा कि यदि किसी ने होम क्वारंटीन प्रोटोकाल का उल्लंघन किया, तो उसे तत्काल संस्थागत क्वारंटीन सेंटर में भेज दिया जाएगा।
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