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Lakhimpur Kheri News: वनराज को देखना है तो किशनपुर के बेलडंडा और 23 व 17 नंबर मार्ग पर चले जाएं

Wed, 29 Oct 2025 11:58 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Updated Wed, 29 Oct 2025 11:58 PM IST
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If you want to see Vanraj, then go to Beldanda and Road No. 23 and 17 of Kishanpur
किशनपुर अभयारण्य के झादीताल में बैठा बारासिंगा हिरनों का झुंड। स्रोत : वन विभाग
बांकेगंज। जंगल में स्वच्छंद विचरण करते वनराज (बाघ) समेत अन्य दुर्लभ वन्यजीवों को देखने की हसरत रखने वाले प्रकृति प्रेमियों का इंतजार अब खत्म होने वाला है। दो दिन बाद पहली नवंबर से विश्व प्रसिद्ध दुधवा टाइगर रिजर्व के द्वार सैलानियों के भ्रमण के लिए खोल दिए जाएंगे।
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जंगल भ्रमण के दौरान खासकर बाघ के दीदार की अगर उत्सुकता है तो किशनपुर सेंक्चुरी के बेलडंडा और 23 व 17 नंबर मार्ग को काफी मुफीद माना जाता है। इन रास्तों पर पिछले कुछ पर्यटन सत्रों में सैलानियों को बाघ के खूब दीदार हुए हैं। बाघ देखने की हसरत में सैलानी किशनपुर अभयारण्य भ्रमण के लिए जरूर पहुंचते हैं।
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सैलानी किशनपुर सेंक्चुरी के कटैया गेट से अंदर प्रवेश करके हरे-भरे और घने साल के जंगल के प्राकृतिक नजारे का आनंद लेते हैं। बाघ साइटिंग के लिए यहां बेलडंडा मार्ग पर दुधवा की रानी के नाम से मशहूर बेलडंडा की बाघिन के अलावा 23 और 17 नंबर सड़क प्रसिद्ध है। जानकार सैलानी इसी सड़क के भ्रमण के लिए गाइडों को ले जाते हैं। पिछले पर्यटन सत्र में यहां बेलडंडा की बाघिन कई बार सैलानियों को दिखी थी।
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बंगाल फ्लोरिकन का भी है आकर्षण

दुधवा का घना जंगल हो या किशनपुर अभयारण्य, यहां बसने और आने वाले रंग-बिरंगे पक्षियों की सैकड़ों प्रजातियाें ने दुधवा को अपनी ओर आकर्षित किया है। दुधवा पार्क और किशनपुर अभयारण्य स्वछंद विचरण करते दुर्लभ वन्यजीवों के साथ ही अपनी अनूठी जैव विविधता और पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों के लिए सैलानियों के आकर्षण का केंद्र है। यहां 450 प्रजातियों के पक्षी पाए जाते हैं। बंगाल फ्लोरिकन भी यहां की शान है। यहां के जलाशयों में कलरव करते रंग-बिरंगे प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट सैलानियों को मधुर संगीत सुनाकर उन्हें मंत्रमुग्ध करती हैं।

शारदा नदी से सटे जंगल के बीच खूबसूरत झादीताल के टापू पर धूप सेंकते सैकड़ों की संख्या में बारासिंगा हिरन सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। कुलांचे भरते हिरनों और बाघों की दहाड़ के बीच रंग-बिरंगे प्रवासी परिंदों का कलरव मंदिर की घंटियों की धुन सा वातावरण पेश करता है।


गाइड सुनाएंगे दुधवा की कहानियां
पर्यटन-सत्र शुरू होने से पहले 90 गाइडों को इस बार सैलानियों को दुधवा टाइगर रिजर्व से संबंधित कहानियों को सुनाने का तीन दिवसीय प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इसमें दुधवा में पाए जाने वाले सरीसृपों और अन्य वन्यजीवों के बारे में सैलानियों को यहां की जानकारी के अलावा कहानी का सार लेते हुए यहां के बारे में बताने का कार्य किया जाएगा। पर्यटन सत्र में सिंगल यूज प्लास्टिक और पॉलीथिन का प्रयोग वर्जित रहेगा।
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डीटीआर में 2025-26 पर्यटन सत्र की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। पर्यटन सत्र के दौरान सिंगल यूज प्लास्टिक और पॉलीथिन का प्रयोग वर्जित रहेगा।
- डॉ. एच राजामोहन, एफडी, दुधवा टाइगर रिजर्व




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किशनपुर अभयारण्य के झादीताल में बैठा बारासिंगा हिरनों का झुंड। स्रोत : वन विभाग

किशनपुर अभयारण्य के झादीताल में बैठा बारासिंगा हिरनों का झुंड। स्रोत : वन विभाग

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