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Lakhimpur Kheri News: बढ़ रहा मानव-वन्यजीव संघर्ष, नहीं हो रहा समाधान
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बांकेगंज। तराई में मानव-वन्यजीव संघर्ष बड़ी चुनौती बन गया है। वन विभाग इसका समाधान नहीं खोज पा रहा है। जंगल के आसपास रहने वाले लोगों की भी दिक्कतें बढ़ी हैं। जंगल में बाघों की और बाहरी किनारों पर तेंदुओं की बढ़ती आबादी से जंगल से सटे इलाकों में दहशत बढ़ी रही है। जंगल के चारों तरफ गन्ने की खेती और जंगल में इंसानी घुसपैठ भी मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ा रही है।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन की भीरा, मझगई और दक्षिण खीरी वन प्रभाग की गोला रेंज सीमा पर स्थिति रामनगर कलां पंचायत के मजरा रामपुर में गन्ने की सिंचाई कर रहे तीन ग्रामीणों पर हमला कर तेंदुए ने गंभीर घायल कर दिया। पिछले एक साल के अंदर बाघ और तेंदुए के हमले में पांच से अधिक लोग अपनी जान गवां चुके हैं। जबकि 13 से अधिक लोग घायल हुए हैं।
गर्मियों के मौसम में बाघ और तेंदुए पानी की तलाश में जंगल से निकलकर आबादी के पास तक पहुंच जाते हैं। इस दौरान यह हिंसक वन्यजीव खेतों में काम कर रहे लोगों पर हमला कर उन्हें घायल कर देते हैं। गंभीर रूप से घायल इंसानों को अपनी जान भी गंवानी पड़ती है।
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एक कारण यह भी है कि जंगल में बाघों की आबादी बढ़ने से तेंदुओं का ठिकाना छिन गया है। इससे तेंदुए अब बस्ती के बाहरी किनारों, नदी-नालों और झाड़ियों में अपना ठिकाना बना रहे हैं। आबादी के निकट मौजूद बाघ और तेंदुए आए दिन इंसानों पर हमला कर रहे हैं। इससे ग्रामीणों के सब्र का बांध टूट रहा है।
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तराई में मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ रही घटनाएं वन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती हैं। इस संघर्ष को रोकने के लिए लगातार चिंतन मनन किया जा रहा है। इसके कारणों का अध्ययन किया जा रहा है। वन विभाग इस समस्या के प्रति बेहद गंभीर है। इसे रोकने की हर संभव कोशिश की जा रही है।
- ललित कुमार वर्मा, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
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दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन की भीरा, मझगई और दक्षिण खीरी वन प्रभाग की गोला रेंज सीमा पर स्थिति रामनगर कलां पंचायत के मजरा रामपुर में गन्ने की सिंचाई कर रहे तीन ग्रामीणों पर हमला कर तेंदुए ने गंभीर घायल कर दिया। पिछले एक साल के अंदर बाघ और तेंदुए के हमले में पांच से अधिक लोग अपनी जान गवां चुके हैं। जबकि 13 से अधिक लोग घायल हुए हैं।
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गर्मियों के मौसम में बाघ और तेंदुए पानी की तलाश में जंगल से निकलकर आबादी के पास तक पहुंच जाते हैं। इस दौरान यह हिंसक वन्यजीव खेतों में काम कर रहे लोगों पर हमला कर उन्हें घायल कर देते हैं। गंभीर रूप से घायल इंसानों को अपनी जान भी गंवानी पड़ती है।
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एक कारण यह भी है कि जंगल में बाघों की आबादी बढ़ने से तेंदुओं का ठिकाना छिन गया है। इससे तेंदुए अब बस्ती के बाहरी किनारों, नदी-नालों और झाड़ियों में अपना ठिकाना बना रहे हैं। आबादी के निकट मौजूद बाघ और तेंदुए आए दिन इंसानों पर हमला कर रहे हैं। इससे ग्रामीणों के सब्र का बांध टूट रहा है।
तराई में मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ रही घटनाएं वन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती हैं। इस संघर्ष को रोकने के लिए लगातार चिंतन मनन किया जा रहा है। इसके कारणों का अध्ययन किया जा रहा है। वन विभाग इस समस्या के प्रति बेहद गंभीर है। इसे रोकने की हर संभव कोशिश की जा रही है।
- ललित कुमार वर्मा, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व