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बिना पर्याप्त वेंटिलेटर और कर्मचारी, आखिर कैसे निपटेंगे ओमिक्रॉन से
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जिला अस्पताल का आक्सीजन प्लांट।
मोतीपुर स्थित 200 बेड का अस्पताल भी अब तक नहीं हो सका है तैयार
बिना टेक्नीशियन जिला एवं महिला अस्पताल सहित सीएचसी के चल रहे ऑक्सीजन प्लांट
लखीमपुर खीरी/ ओयल। देश भर में जहां ओमिक्रॉन का खतरा दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है, वहीं स्वास्थ्य विभाग कोरोना के नए वैरिएंट के संक्रमण से निपटने का दावा तो कर रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि स्वास्थ्य विभाग की तैयारियां अभी आधी अधूरी हैं। न तो 200 बेड का अस्पताल बनकर तैयार हुआ है और न ही पर्याप्त संख्या में वेंटिलेटर हैं और न ही स्वास्थ्य कर्मी। यही नहीं विदेशों से कौन जनपद में लौटा है, विभाग को इसकी भी जानकारी नहीं है।
पहली की अपेक्षा कोरोना की दूसरी लहर ने जिले में खूब तबाही मचाई। ऑक्सीजन सिलिंडर से लेकर इनके रेग्युलेटर, बेड और दवाओं को लेकर जमकर मारामारी मची। दूसरी लहर के प्रकोप ने स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों को आइना दिखा दिया। हालांकि उसी दौरान विशेषज्ञ तीसरी लहर के आने का अंदेशा जताने लगे थे। ऐसे में ऑक्सीजन फिर से मुसीबत न बन जाए। इसलिए मोतीपुर स्थित 200 बेड के मातृ एवं शिशु कल्याण अस्पताल, जिला एवं महिला अस्पताल सहित छह सीएचसी पर ऑक्सीजन प्लांट लगने लगे, जो अब तैयार हो चुके हैं। इनकी क्षमता तीन हजार लीटर पर मिनट है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि तीसरी लहर से निपटने के पूरे इंतजाम हैं, लेकिन इसकी सच्चाई कुछ और ही है। न तो अब तक मोतीपुर स्थित 200 बेड का अस्पताल बनकर तैयार हुआ है और न ही पर्याप्त संख्या में वेंटिलेटर हैं और न ही स्वास्थ्य कर्मचारी। उधर, ऑक्सीजन प्लांट चलाने के लिए टेक्नीशियन तक नहीं है। ऐसे में संविदा कर्मचारियों से इन्हें चलाया जा रहा है।
2017-18 में 86 करोड़ से शुरू हुआ था निर्माण
ओयल के मोतीपुर में 2017-18 में 86 करोड़ की लागत से अस्पताल का निर्माण शुरू हुआ, लेकिन बाद में इसका बजट करीब 100 करोड़ हो गया। अस्पताल में सीएमएस डॉ. एसी श्रीवास्तव की तैनाती हो चुकी है, लेकिन कार्यदायी संस्था सीएमओ को अस्पताल कब स्थानांतरित करेगी इस पर अभी संशय है। हालांकि अधिकारियों का दावा कि अगले कुछ दिनों में अस्पताल हैंडओवर हो जाएगा, लेकिन निर्माण कार्य में लगे लोगों का कहना है कि कम से कम अभी एक माह का समय लगेगा, क्योंकि सबसे प्रमुख रोड और स्टाफ है। मगर, अभी तक न रोड बनी है और न ही कर्मचारियों की तैनाती हुई है।
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मेन रास्ते को लेकर जिम्मेदार नहीं दे रहे ध्यान
200 बेड का अस्पताल मोतीपुर गांव में बन रहा है, जो रोड से करीब तीन चार किलोमीटर है। इसका रास्ता बेहद घुमावदार है। अस्पताल के लिए जमीन देखे जाने के दौरान जिला प्रशासन ने हाईवे से अस्पताल तक सीधा रास्ता निकलवाने का दावा किया था। मगर, अभी तक इसके लिए जमीन अधिग्रहण की कवायद शुरू नहीं हो सकी है। ऐसे में घुुमावदार रास्ता होने के कारण अस्पताल तक पहुंचने में तमाम दिक्कतें होगीं।
ऑक्सीजन प्लांट की क्षमता
स्थान- क्षमता
जिला अस्पताल-833 एलपीएम
महिला अस्पताल- 1000 एलपीएम
200 बेड मातृ एवं शिशु अस्पताल- 1000 एलपीएम
सीएचसी गोला- 333 एलपीएम
सीएचसी मितौली-167 एलपीएम
सीएचसी नकहा- 167 एलपीएम
सीएचसी मोहम्मदी-167 एलपीएम
सीएचसी फरधान- 167 एलपीएम
अब तक मिले कोविड पॉजिटिव- 24414
होम आइसोलट हुए लोग- 23809
निगरानी समितियां- 3609
समिति की ओर से वितरित कोविड किट- 54173
सीएचसी पर बने बच्चों के लिए बने आईसीयू
सीएचसी गोला, रमियाबेहड़, नकहा एवं मोहम्मदी
कुल वेंटिलेटर- 25
ओमिक्रॉन संक्रमण से निपटने के लिए महकमा पूरी तरह से तैयार है। नौ ऑक्सीजन प्लांट बनने के साथ करीब 25 वेंटिलेटर हैं। सीएचसी गोला, रमियाबेहड़, नकहा एवं मोहम्मदी में आईसीयू बनकर तैयार हैं। जगसड़ में एल-टू अस्पताल है और 200 बेड का अस्पताल हैंडओवर होते ही स्वास्थ्य सेवाएं और बेहतर हो जाएंगी। बाहर से आने वालों की जांच के लिए रेलवे एवं बस स्टेशन सहित दुधवा एवं बार्डर जांच कराई जा रही है।
- डॉ. शैलेंद्र भटनागर, सीएमओ
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बिना टेक्नीशियन जिला एवं महिला अस्पताल सहित सीएचसी के चल रहे ऑक्सीजन प्लांट
लखीमपुर खीरी/ ओयल। देश भर में जहां ओमिक्रॉन का खतरा दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है, वहीं स्वास्थ्य विभाग कोरोना के नए वैरिएंट के संक्रमण से निपटने का दावा तो कर रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि स्वास्थ्य विभाग की तैयारियां अभी आधी अधूरी हैं। न तो 200 बेड का अस्पताल बनकर तैयार हुआ है और न ही पर्याप्त संख्या में वेंटिलेटर हैं और न ही स्वास्थ्य कर्मी। यही नहीं विदेशों से कौन जनपद में लौटा है, विभाग को इसकी भी जानकारी नहीं है।
पहली की अपेक्षा कोरोना की दूसरी लहर ने जिले में खूब तबाही मचाई। ऑक्सीजन सिलिंडर से लेकर इनके रेग्युलेटर, बेड और दवाओं को लेकर जमकर मारामारी मची। दूसरी लहर के प्रकोप ने स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों को आइना दिखा दिया। हालांकि उसी दौरान विशेषज्ञ तीसरी लहर के आने का अंदेशा जताने लगे थे। ऐसे में ऑक्सीजन फिर से मुसीबत न बन जाए। इसलिए मोतीपुर स्थित 200 बेड के मातृ एवं शिशु कल्याण अस्पताल, जिला एवं महिला अस्पताल सहित छह सीएचसी पर ऑक्सीजन प्लांट लगने लगे, जो अब तैयार हो चुके हैं। इनकी क्षमता तीन हजार लीटर पर मिनट है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि तीसरी लहर से निपटने के पूरे इंतजाम हैं, लेकिन इसकी सच्चाई कुछ और ही है। न तो अब तक मोतीपुर स्थित 200 बेड का अस्पताल बनकर तैयार हुआ है और न ही पर्याप्त संख्या में वेंटिलेटर हैं और न ही स्वास्थ्य कर्मचारी। उधर, ऑक्सीजन प्लांट चलाने के लिए टेक्नीशियन तक नहीं है। ऐसे में संविदा कर्मचारियों से इन्हें चलाया जा रहा है।
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2017-18 में 86 करोड़ से शुरू हुआ था निर्माण
ओयल के मोतीपुर में 2017-18 में 86 करोड़ की लागत से अस्पताल का निर्माण शुरू हुआ, लेकिन बाद में इसका बजट करीब 100 करोड़ हो गया। अस्पताल में सीएमएस डॉ. एसी श्रीवास्तव की तैनाती हो चुकी है, लेकिन कार्यदायी संस्था सीएमओ को अस्पताल कब स्थानांतरित करेगी इस पर अभी संशय है। हालांकि अधिकारियों का दावा कि अगले कुछ दिनों में अस्पताल हैंडओवर हो जाएगा, लेकिन निर्माण कार्य में लगे लोगों का कहना है कि कम से कम अभी एक माह का समय लगेगा, क्योंकि सबसे प्रमुख रोड और स्टाफ है। मगर, अभी तक न रोड बनी है और न ही कर्मचारियों की तैनाती हुई है।
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मेन रास्ते को लेकर जिम्मेदार नहीं दे रहे ध्यान
200 बेड का अस्पताल मोतीपुर गांव में बन रहा है, जो रोड से करीब तीन चार किलोमीटर है। इसका रास्ता बेहद घुमावदार है। अस्पताल के लिए जमीन देखे जाने के दौरान जिला प्रशासन ने हाईवे से अस्पताल तक सीधा रास्ता निकलवाने का दावा किया था। मगर, अभी तक इसके लिए जमीन अधिग्रहण की कवायद शुरू नहीं हो सकी है। ऐसे में घुुमावदार रास्ता होने के कारण अस्पताल तक पहुंचने में तमाम दिक्कतें होगीं।
ऑक्सीजन प्लांट की क्षमता
स्थान- क्षमता
जिला अस्पताल-833 एलपीएम
महिला अस्पताल- 1000 एलपीएम
200 बेड मातृ एवं शिशु अस्पताल- 1000 एलपीएम
सीएचसी गोला- 333 एलपीएम
सीएचसी मितौली-167 एलपीएम
सीएचसी नकहा- 167 एलपीएम
सीएचसी मोहम्मदी-167 एलपीएम
सीएचसी फरधान- 167 एलपीएम
अब तक मिले कोविड पॉजिटिव- 24414
होम आइसोलट हुए लोग- 23809
निगरानी समितियां- 3609
समिति की ओर से वितरित कोविड किट- 54173
सीएचसी पर बने बच्चों के लिए बने आईसीयू
सीएचसी गोला, रमियाबेहड़, नकहा एवं मोहम्मदी
कुल वेंटिलेटर- 25
ओमिक्रॉन संक्रमण से निपटने के लिए महकमा पूरी तरह से तैयार है। नौ ऑक्सीजन प्लांट बनने के साथ करीब 25 वेंटिलेटर हैं। सीएचसी गोला, रमियाबेहड़, नकहा एवं मोहम्मदी में आईसीयू बनकर तैयार हैं। जगसड़ में एल-टू अस्पताल है और 200 बेड का अस्पताल हैंडओवर होते ही स्वास्थ्य सेवाएं और बेहतर हो जाएंगी। बाहर से आने वालों की जांच के लिए रेलवे एवं बस स्टेशन सहित दुधवा एवं बार्डर जांच कराई जा रही है।
- डॉ. शैलेंद्र भटनागर, सीएमओ