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भद्रा के बाद 17 की देर रात होगा होलिका दहन

Wed, 16 Mar 2022 10:25 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 16 Mar 2022 10:25 PM IST
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Holika Dahan will happen late on 17th night after Bhadra
गोला गोकर्णनाथ। फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होलिका दहन का त्योहार मनाया जाएगा। इस बार होलिका दहन 17 मार्च को पड़ रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रतिवर्ष होलिका दहन भद्रारहित किया जाता है मगर इस बार भद्रा का साया है। इस कारण होलिका दहन मध्य रात्रि को किया जाएगा। नगर निवासी ज्योतिषाचार्य पंडित रामदेव मिश्र शास्त्री ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार, भद्रा को अशुभ माना जाता है।
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क्योंकि भद्रा के स्वामी यमराज होते हैं। इसलिए इस योग में कोई भी शुभ काम करने की मनाही होती है। हालांकि भद्रा की पुंछ काल में होलिका दहन किया जा सकता है। इस समय भद्रा का प्रभाव काफी कम होता है और व्यक्ति को दोष भी नहीं लगता है।
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फाल्गुन पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ 17 मार्च, 13 बजकर 04 मिनट से फाल्गुन पूर्णिमा तिथि की समाप्ति 18 मार्च, दोपहर 12 बजकर 56 मिनट तक है। इसलिए 18 तारीख को सूर्यास्त के समय पूर्णिमा न होने के कारण 17 तारीख को होलिका दहन होगा। 17 मार्च को दोपहर 01 बजकर 01 मिनट से शुरू होकर भद्रा 17 मार्च को देर रात 12 बजकर 57 मिनट तक चलेगी। होलिका दहन का शुभ समय: 17 मार्च को रात 12 बजकर 57 मिनट के बाद है।
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भगवान सूर्य की पुत्री हैं भद्रा - ज्योतिषाचार्य ने बताया कि पौराणिक कथाओं के अनुसार, भद्रा भगवान सूर्य की पुत्री और शनिदेव की बहन है। ऐसे में उनका स्वभाव बिल्कुल शनिदेव की तरह ही है। इन्हें कोध्री स्वभाव का माना जाता है।
इसी कारण इस स्वभाव को नियंत्रित करने के लिए भगवान ब्रह्मा ने काल गणना में एक प्रमुख अंग में विष्टिकरण को जगह दी है। कहा जाता है कि भद्रा हर समय तीनों लोक का भ्रमण करती रहती हैं। इसलिए जब पृथ्वी पर भद्रा होती हैं तो उस समय किसी भी तरह का शुभ कार्य नहीं किया जाता।

मीन व वृष राशि के जातक के न तापें होली - पं. रामदेव शास्त्री ने बताया कि मीन और वृष राशि, इन दोनों राशियों पर षडाष्टक है। अत: इन दोनों राशियों के जातकों के लिए होली तापना उचित नहीं है।
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