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Lakhimpur Kheri News: होली पर आस्था के फूलों से सजे रोजगार के रंग
Fri, 27 Feb 2026 11:13 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Fri, 27 Feb 2026 11:13 PM IST
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ऊंचगांव में मंदिरों के फूलों से गुलाल बनाती समूह की महिलाएं। संवाद
धौरहरा। होली के त्योहार पर स्वयं सहायता समूह की महिलाएं आस्था, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता का अनोखा संगम पेश कर रही हैं। मंदिरों में देवी-देवताओं पर चढ़ाए गए फूलों को एकत्र कर महिलाएं रसायन मुक्त हर्बल गुलाल तैयार कर रही हैं, जिसकी धौरहरा कस्बे सहित आसपास क्षेत्रों में अच्छी मांग है। एक ही दिन में 23 हजार रुपये से अधिक की बिक्री होने से समूह की महिलाओं में उत्साह है।
धौरहरा ब्लॉक के गांव ऊंचगांव स्थित श्रीराम प्रेरणा महिला स्वयं सहायता समूह की अध्यक्षा शालू और सचिव रामरानी ने बताया कि गुलाल पूरी तरह इको फ्रेंडली है। इसे बनाने में पालक, चुकंदर, अरारोट पाउडर, गुलाब और गेंदा के फूलों का प्रयोग किया जाता है। बेस के रूप में अरारोट पाउडर और रंग के लिए सब्जियों व फूलों के अर्क का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे त्वचा को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता।
महिलाओं ने बताया कि गुलाब और गेंदा के फूल स्थानीय मंदिरों से एकत्र किए जाते हैं और जरूरत पड़ने पर मंडी से भी खरीदे जाते हैं। मंदिरों के फूलों का पुनः उपयोग कर महिलाएं पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रही हैं। एडीओ आईएसबी आलोक शुक्ला ने बताया कि महिलाएं पिछले एक माह से होली की तैयारी में जुटी हैं, ताकि मांग के अनुसार हर्बल गुलाल की आपूर्ति की जा सके। ग्राम पंचायत सरसवा के हाट बाजार सहित धौरहरा कस्बे में इसकी बिक्री जोर-शोर से की जा रही है।
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दुर्गा शक्ति नागपाल, अभिषेक कुमार और जितेंद्र कुमार मिश्रा ने समूह की पहल को आत्मनिर्भरता की दिशा में सराहनीय कदम बताते हुए हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। संवाद
वर्जन
समूह की यह पहल सराहनीय है। इससे लोगों को होली पर प्राकृतिक रंगों से बना सुरक्षित गुलाल मिलेगा और महिलाओं की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। प्रशासन ऐसे प्रयासों को प्रोत्साहित करेगा। -संदीप कुमार तिवारी, बीडीओ, धौरहरा
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धौरहरा ब्लॉक के गांव ऊंचगांव स्थित श्रीराम प्रेरणा महिला स्वयं सहायता समूह की अध्यक्षा शालू और सचिव रामरानी ने बताया कि गुलाल पूरी तरह इको फ्रेंडली है। इसे बनाने में पालक, चुकंदर, अरारोट पाउडर, गुलाब और गेंदा के फूलों का प्रयोग किया जाता है। बेस के रूप में अरारोट पाउडर और रंग के लिए सब्जियों व फूलों के अर्क का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे त्वचा को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता।
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महिलाओं ने बताया कि गुलाब और गेंदा के फूल स्थानीय मंदिरों से एकत्र किए जाते हैं और जरूरत पड़ने पर मंडी से भी खरीदे जाते हैं। मंदिरों के फूलों का पुनः उपयोग कर महिलाएं पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रही हैं। एडीओ आईएसबी आलोक शुक्ला ने बताया कि महिलाएं पिछले एक माह से होली की तैयारी में जुटी हैं, ताकि मांग के अनुसार हर्बल गुलाल की आपूर्ति की जा सके। ग्राम पंचायत सरसवा के हाट बाजार सहित धौरहरा कस्बे में इसकी बिक्री जोर-शोर से की जा रही है।
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दुर्गा शक्ति नागपाल, अभिषेक कुमार और जितेंद्र कुमार मिश्रा ने समूह की पहल को आत्मनिर्भरता की दिशा में सराहनीय कदम बताते हुए हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। संवाद
वर्जन
समूह की यह पहल सराहनीय है। इससे लोगों को होली पर प्राकृतिक रंगों से बना सुरक्षित गुलाल मिलेगा और महिलाओं की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। प्रशासन ऐसे प्रयासों को प्रोत्साहित करेगा। -संदीप कुमार तिवारी, बीडीओ, धौरहरा