Holi 2023: सौहार्द की मिसाल है मोहम्मदी की होली, यहां हिंदू-मुस्लिम मिलकर बिखेरते हैं भाईचारे के रंग
होली के पर्व पर मोहम्मदी में भाईचारे और सौहार्द के रंग बिखरते हैं। यहां हिंदू मुस्लिम मिलकर होली मनाते हैं। एक-दूसरे के गले मिलकर सद्भावना का संदेश देते हैं।
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लखीमपुर खीरी के मोहम्मदी के मोहल्ला पूर्वी लखपेड़ा में होली के मौके पर आपसी सौहार्द और गंगा जमुनी संस्कृति के दर्शन होते हैं। यहां मुस्लिम बहुल मोहल्ले में होली जलाई जाती है। यह होली हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल है। पूर्वी लखपेड़ा में आपसी सहयोग से होली मनाने की यह परंपरा दशकों से चली आ रही है।
मोहल्ले में सिर्फ पांच छह घर हिंदुओं के हैं। मुस्लिम समुदाय के लोग होलिका दहन में पूरा सहयोग करते हैं। इसे कस्बे की बड़ी होली कहा जाता है। पहले तो यहां हिंदू मुसलमान जलती होली में आलू भून कर खाने की परंपरा निभाते थे। मोहम्मदी के अच्छन मियां के घर के पास होली जलती है। इसमें पूरा मोहल्ला सहयोग करता है और लकड़ी जमा करता है। अब नगरपालिका की ओर से लकड़ी का इंतजाम होता है।
होलिका दहन स्थल पर जुटते हैं दोनों धर्मों के लोग
मोहल्ले के पूर्व सभासद मोहम्मद हनीफ कहते हैं कि इस त्योहार में सभी लोग बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते हैं पहले लकड़ी इकट्ठा करने में सहयोग भी करते हैं। सुबह दोनों धर्मों के लोग होलिका दहन स्थल पर एकत्र होते हैं और एक दूसरे को होली की बधाई और शुभकामनाएं देते हैं। लोग घरों को आग बचाने के लिए अपनी छतों पर पानी स्टोर कर लेते हैं।
यहां होली को लेकर कभी कोई विवाद नहीं हुआ।
पहले दोनों धर्मों के बच्चे और बुजुर्ग होली में आग लगने के बाद होली की आग में आलू भूनकर खाते थे लेकिन अब यह परंपरा खत्म हो गई है। मोहल्ले के शहवाज सिद्दीकी कहते हैं कि यहां पर सभी एक दूसरे का सहयोग करते हैं। पहले बालिकाएं फूल डालने होली पर आती थीं तो सभी आसपास के लोग जिम्मेदारी से उनका ध्यान रखते थे।