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युवराजदत्त महाविद्यालय में लगी थारू जनजाति की हस्तशिल्प प्रदर्शनी
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सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश करतीं थारू महिलाएं।
छात्राओं ने पेश किए सांस्कृतिक कार्यक्रम, पिछले चार साल से निरंतर हो रहा है आयोजन
लखीमपुर खीरी। युवराजदत्त डिग्री कॉलेज में मंगलवार को महाविद्यालय जनजाति उन्नयन प्रकोष्ठ की ओर से उमंग (थारू महोत्सव) कार्यक्रम एवं थारू जनजाति हस्तशिल्प प्रदर्शनी लगी। इसका शुभारंभ मां सरस्वती का पूजन और कुलगीत से हुआ।
मुख्य अतिथि लखनऊ विश्वविद्यालय की अर्थशास्त्र विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रोली मिश्रा ने कहा कि जनजातीय संस्कृति को हेरिटेज के रूप में संरक्षित करने की आवश्यकता है। समुचित प्रशिक्षण बिना एवं टूल किट दिये थारू हस्तशिल्प का प्रचार प्रसार और इसका संरक्षण करना मुश्किल है।
डॉ. रोली मिश्रा ने कहा कि थारू उत्पादों की ब्रांडिंग और उन्हें ई-मार्केट उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया। पूर्व प्राचार्य एवं वाणिज्य विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. डीएन मालपानी ने थारू व गैर थारू विद्यार्थियों के मध्य सामंजस्य के आधार पर थारू संस्कृति को बढ़ावा देने पर बल दिया।
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जंतु विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. अजय आगा ने थारू छात्र-छात्राओं के उन्नयन को लेकर सरकारी योजनाओं पर और अधिक जोर दिए जाना आवश्यक बताया। इस दौरान थारू छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शृंखला पेश की। ताइक्वांडो एवं रंगोली प्रतियोगिता के विजेताओं को प्रमाण पत्र व मेडल देकर सम्मानित किया।
कार्यक्रम संयोजक डॉ. ज्योति पंत ने कहा कि कॉलेज का जनजाति उन्नयन प्रकोष्ठ पिछले चार साल से समाज के वंचित समुदाय थारू जनजाति के सामाजिक सांस्कृतिक विकास के लिए तमाम कार्य कर रहा है। इसके तहत थारू छात्रों के लिए बुक बैंक, ताइक्वांडो व योग प्रशिक्षण एवं फल संरक्षण प्रशिक्षण सहित नृत्य गीत-संगीत प्रशिक्षण आदि कार्यक्रम कराए जाते हैं। संचालन इतिहास विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नूतन सिंह ने किया। प्राचार्य प्रोफेसर डॉ. हेमंत पाल, डॉ. ज्योति पंत सहित छात्र-छात्राएं मौजूद रहीं।
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लखीमपुर खीरी। युवराजदत्त डिग्री कॉलेज में मंगलवार को महाविद्यालय जनजाति उन्नयन प्रकोष्ठ की ओर से उमंग (थारू महोत्सव) कार्यक्रम एवं थारू जनजाति हस्तशिल्प प्रदर्शनी लगी। इसका शुभारंभ मां सरस्वती का पूजन और कुलगीत से हुआ।
मुख्य अतिथि लखनऊ विश्वविद्यालय की अर्थशास्त्र विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रोली मिश्रा ने कहा कि जनजातीय संस्कृति को हेरिटेज के रूप में संरक्षित करने की आवश्यकता है। समुचित प्रशिक्षण बिना एवं टूल किट दिये थारू हस्तशिल्प का प्रचार प्रसार और इसका संरक्षण करना मुश्किल है।
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डॉ. रोली मिश्रा ने कहा कि थारू उत्पादों की ब्रांडिंग और उन्हें ई-मार्केट उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया। पूर्व प्राचार्य एवं वाणिज्य विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. डीएन मालपानी ने थारू व गैर थारू विद्यार्थियों के मध्य सामंजस्य के आधार पर थारू संस्कृति को बढ़ावा देने पर बल दिया।
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जंतु विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. अजय आगा ने थारू छात्र-छात्राओं के उन्नयन को लेकर सरकारी योजनाओं पर और अधिक जोर दिए जाना आवश्यक बताया। इस दौरान थारू छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शृंखला पेश की। ताइक्वांडो एवं रंगोली प्रतियोगिता के विजेताओं को प्रमाण पत्र व मेडल देकर सम्मानित किया।
कार्यक्रम संयोजक डॉ. ज्योति पंत ने कहा कि कॉलेज का जनजाति उन्नयन प्रकोष्ठ पिछले चार साल से समाज के वंचित समुदाय थारू जनजाति के सामाजिक सांस्कृतिक विकास के लिए तमाम कार्य कर रहा है। इसके तहत थारू छात्रों के लिए बुक बैंक, ताइक्वांडो व योग प्रशिक्षण एवं फल संरक्षण प्रशिक्षण सहित नृत्य गीत-संगीत प्रशिक्षण आदि कार्यक्रम कराए जाते हैं। संचालन इतिहास विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नूतन सिंह ने किया। प्राचार्य प्रोफेसर डॉ. हेमंत पाल, डॉ. ज्योति पंत सहित छात्र-छात्राएं मौजूद रहीं।