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किसानों के लिए पैसा बड़ी जरूरत
ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Wed, 13 Apr 2016 10:18 PM IST
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sugar cane
- फोटो : amar ujala
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दिसंबर 2015 तक बेचे गन्ना का भुगतान नहीं मिला
गोला, पलिया और खंभारखेड़ा पर 6.04 अरब बकाया
मिलों के अध्यासियों पर रिपोर्ट से भी नहीं निकला हल
किसानों को गन्ना मूल्य भुगतान न करने वाले बजाज ग्रुप की तीन मिलों गोला, पलिया और खंभारखेड़ा मिल के अध्यासियों पर रिपोर्ट दर्ज कराकर भले ही प्रशासन अपनी पीठ ठोक रहा है, लेकिन इससे किसानों को कुछ भला नहीं हुआ है। भुगतान न मिलने से किसानों की मुश्किलें कम नहीं हो रहीं हैं, क्योंकि किसानों के लिए पैसा एक बड़ी जरूरत है। इन तीन मिलों पर किसानों का छह अरब चार करोड़ एक लाख 85 हजार रुपये गन्ना मूल्य बकाया है। खास बात यह हैै कि दिसंबर 2015 तक खरीदे गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं किया गया है। पलिया और खंभारखेड़ा मिल ने करीब 35 करोड़ रुपये चीनी बेचकर डायवर्ट कर दिया है।
पेराई सत्र 2015-16 में जिले की आठ मिलों में पेराई कई दिन पहले ही बंद हो चुकी है। सिर्फ सहकारी क्षेत्र की बेलरायां मिल ही संचालित है। राज्य समर्थित गन्ना मूल्य (एसएपी) की दर से नौ चीनी मिलों पर किसानों का नौ अरब 32 करोड़ 31 लाख 65 हजार रुपये बकाया है। जबकि इनमें बजाज ग्रुप की तीन मिलों पर ही सबसे अधिक छह अरब चार करोड़ एक लाख 85 हजार रुपये बकाया होने से किसानों की हालत खस्ता हो गई है। गोला ने 17 दिसंबर 2015, पलिया ने 27 दिसंबर 2015 और खंभारखेड़ा मिल ने 24 दिसंबर 2015 के बाद से गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं किया है। इससे किसानों में त्राहि-त्राहि मची है।
एफआईआर हुई पर नतीजा सिफर
डीएम के निर्देश पर जिला गन्ना अधिकारी जगदीश चंद्र यादव ने तीन मिलों गोला, पलिया और खंभारखेड़ा मिलों के अध्यासियों के खिलाफ रविवार की रात को संबंधित थानों में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद से कोई कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी है। बताते चलें कि इससे पूर्व गोला मिल की चीनी को तहसील प्रशासन ने अपनी कस्टडी में लिया था, लेकिन उससे भी कोई हल नहीं निकला। जबकि पलिया और खंभारखेड़ा मिलों में कस्टडी से पहले ही काफी मात्रा में चीनी को डायवर्ट कर दिया गया था।
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रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने दबिशें दी है, लेकिन अध्यासी फरार हो चुके हैं। संबंधित थानों से कार्रवाई के लिए लगातार संपर्क किया जा रहा है।
-जगदीश चंद्र यादव, जिला गन्ना अधिकारी
गोला, पलिया और खंभारखेड़ा पर 6.04 अरब बकाया
मिलों के अध्यासियों पर रिपोर्ट से भी नहीं निकला हल
किसानों को गन्ना मूल्य भुगतान न करने वाले बजाज ग्रुप की तीन मिलों गोला, पलिया और खंभारखेड़ा मिल के अध्यासियों पर रिपोर्ट दर्ज कराकर भले ही प्रशासन अपनी पीठ ठोक रहा है, लेकिन इससे किसानों को कुछ भला नहीं हुआ है। भुगतान न मिलने से किसानों की मुश्किलें कम नहीं हो रहीं हैं, क्योंकि किसानों के लिए पैसा एक बड़ी जरूरत है। इन तीन मिलों पर किसानों का छह अरब चार करोड़ एक लाख 85 हजार रुपये गन्ना मूल्य बकाया है। खास बात यह हैै कि दिसंबर 2015 तक खरीदे गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं किया गया है। पलिया और खंभारखेड़ा मिल ने करीब 35 करोड़ रुपये चीनी बेचकर डायवर्ट कर दिया है।
पेराई सत्र 2015-16 में जिले की आठ मिलों में पेराई कई दिन पहले ही बंद हो चुकी है। सिर्फ सहकारी क्षेत्र की बेलरायां मिल ही संचालित है। राज्य समर्थित गन्ना मूल्य (एसएपी) की दर से नौ चीनी मिलों पर किसानों का नौ अरब 32 करोड़ 31 लाख 65 हजार रुपये बकाया है। जबकि इनमें बजाज ग्रुप की तीन मिलों पर ही सबसे अधिक छह अरब चार करोड़ एक लाख 85 हजार रुपये बकाया होने से किसानों की हालत खस्ता हो गई है। गोला ने 17 दिसंबर 2015, पलिया ने 27 दिसंबर 2015 और खंभारखेड़ा मिल ने 24 दिसंबर 2015 के बाद से गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं किया है। इससे किसानों में त्राहि-त्राहि मची है।
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एफआईआर हुई पर नतीजा सिफर
डीएम के निर्देश पर जिला गन्ना अधिकारी जगदीश चंद्र यादव ने तीन मिलों गोला, पलिया और खंभारखेड़ा मिलों के अध्यासियों के खिलाफ रविवार की रात को संबंधित थानों में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद से कोई कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी है। बताते चलें कि इससे पूर्व गोला मिल की चीनी को तहसील प्रशासन ने अपनी कस्टडी में लिया था, लेकिन उससे भी कोई हल नहीं निकला। जबकि पलिया और खंभारखेड़ा मिलों में कस्टडी से पहले ही काफी मात्रा में चीनी को डायवर्ट कर दिया गया था।
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रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने दबिशें दी है, लेकिन अध्यासी फरार हो चुके हैं। संबंधित थानों से कार्रवाई के लिए लगातार संपर्क किया जा रहा है।
-जगदीश चंद्र यादव, जिला गन्ना अधिकारी