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आकर्षण का केंद्र बनी भगवान शिव की निर्माणाधीन प्रतिमा
अमर उजाला ब्यूरो गोला गोकर्णनाथ।
Updated Mon, 06 Jun 2016 10:07 PM IST
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lord shiva
- फोटो : अमर उजाला
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गोकर्ण तीर्थ में बन रही है 35 फुट ऊंची मूर्ति
छोटी काशी के प्राचीन गोकर्ण तीर्थ में भोले बाबा की निर्माणाधीन विशाल प्रतिमा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
शिवजी की विशाल मूर्ति के निर्माण का सपना कई वर्ष पूर्व यहां एसडीएम/अधिशासी अधिकारी रहे आईएएस शंभुकुमार का था किंतु स्थानांतरण होने पर वह मूर्ति का निर्माण नहीं करवा सके थे। उनके स्थानांतरण के बाद कुछ लोगों ने शिव सेवार्थ समिति का गठन कर निर्माण शुरू करा दिया। शिव जी की 35 फुट की विशाल प्रतिमा का निर्माण पूर्ण हो चुका है, अब फिनिशिंग की जा रही है।
समिति अध्यक्ष केशव अग्रवाल, मंत्री पवन साहनी, कोषाध्यक्ष सत्य प्रकाश अग्रवाल ने बताया कि प्रतिमा का निर्माण नगरवासियों और तीर्थ यात्रियों के दान से कराया जा रहा है। शिव प्रतिमा की जटा से गंगाजी की धार प्रवाहित होगी। प्रतिमा तक जाने के लिए लोहे के रस्सों से झूला बनाया जाएगा। सरोवर में स्थित कुएं पर शिवलिंग, नंदी और श्री गणेश जी की प्रतिमा का निर्माण कर रंगीन लाइटें लगाकर और सुंदर गमले रखकर आकर्षक स्थल बनाने की योजना है ताकि श्रद्धा के साथ छोटी काशी पर्यटन का केंद्र बन सके। पूरे प्रोजेक्ट पर 50 लाख रुपया खर्च करने की योजना है। बताया कि सावन माह में निर्माण कार्य पूर्ण कर यह आस्था स्थल श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा।
बचपन से मूर्ति बनाते हैं वीरेंद्र
गोला गोकर्णनाथ। गोकर्ण तीर्थ में शिवजी की प्रतिमा का निर्माण करने वाले मूर्तिकार वीरेंद्र शेखावत बचपन से मूर्ति बना रहे हैं। वह श्रद्धा के वशीभूत हो देवी देवताओं और देश के शहीदों की प्रतिमाएं बनाते हैं।
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राजस्थान प्रांत के झुंझनू जिले के ग्राम खुडानियां निवासी वीरेंद्र ने बताया कि वह बचपन में कापी पर स्केच बनाते थे। फिर धीरे-धीरे मिट्टी की मूर्ति बनाने लगे। इन मूर्तियों को घर के लोग तोड़कर नष्ट कर देते थे। किंतु उनका उत्साह कम नहीं हुआ। बाद में वह मिट्टी के स्थान पर सीमेंट का प्रयोग कर मूर्ति बनाने लगे। हाईस्कूल पास वीरेंद्र ने शाहजहांपुर में खन्नौत नदी के पास श्री हनुमानजी की 104 फुट और नदी के किनारे स्थित मुक्तिधाम में 21 फुट की शिव प्रतिमा बनाई है। वह हरियाणा, राजस्थान, जम्मू कश्मीर, मध्यप्रदेश और दिल्ली में भी देवी देवताओं और शहीदों की सैकड़ों प्रतिमाएं बना चुके हैं। शेखावत ने बताया कि वह प्रतिमाओं के निर्माण से मानसिक और आत्मिक सुख की अनुभूति करते हैं।
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छोटी काशी के प्राचीन गोकर्ण तीर्थ में भोले बाबा की निर्माणाधीन विशाल प्रतिमा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
शिवजी की विशाल मूर्ति के निर्माण का सपना कई वर्ष पूर्व यहां एसडीएम/अधिशासी अधिकारी रहे आईएएस शंभुकुमार का था किंतु स्थानांतरण होने पर वह मूर्ति का निर्माण नहीं करवा सके थे। उनके स्थानांतरण के बाद कुछ लोगों ने शिव सेवार्थ समिति का गठन कर निर्माण शुरू करा दिया। शिव जी की 35 फुट की विशाल प्रतिमा का निर्माण पूर्ण हो चुका है, अब फिनिशिंग की जा रही है।
समिति अध्यक्ष केशव अग्रवाल, मंत्री पवन साहनी, कोषाध्यक्ष सत्य प्रकाश अग्रवाल ने बताया कि प्रतिमा का निर्माण नगरवासियों और तीर्थ यात्रियों के दान से कराया जा रहा है। शिव प्रतिमा की जटा से गंगाजी की धार प्रवाहित होगी। प्रतिमा तक जाने के लिए लोहे के रस्सों से झूला बनाया जाएगा। सरोवर में स्थित कुएं पर शिवलिंग, नंदी और श्री गणेश जी की प्रतिमा का निर्माण कर रंगीन लाइटें लगाकर और सुंदर गमले रखकर आकर्षक स्थल बनाने की योजना है ताकि श्रद्धा के साथ छोटी काशी पर्यटन का केंद्र बन सके। पूरे प्रोजेक्ट पर 50 लाख रुपया खर्च करने की योजना है। बताया कि सावन माह में निर्माण कार्य पूर्ण कर यह आस्था स्थल श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा।
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बचपन से मूर्ति बनाते हैं वीरेंद्र
गोला गोकर्णनाथ। गोकर्ण तीर्थ में शिवजी की प्रतिमा का निर्माण करने वाले मूर्तिकार वीरेंद्र शेखावत बचपन से मूर्ति बना रहे हैं। वह श्रद्धा के वशीभूत हो देवी देवताओं और देश के शहीदों की प्रतिमाएं बनाते हैं।
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राजस्थान प्रांत के झुंझनू जिले के ग्राम खुडानियां निवासी वीरेंद्र ने बताया कि वह बचपन में कापी पर स्केच बनाते थे। फिर धीरे-धीरे मिट्टी की मूर्ति बनाने लगे। इन मूर्तियों को घर के लोग तोड़कर नष्ट कर देते थे। किंतु उनका उत्साह कम नहीं हुआ। बाद में वह मिट्टी के स्थान पर सीमेंट का प्रयोग कर मूर्ति बनाने लगे। हाईस्कूल पास वीरेंद्र ने शाहजहांपुर में खन्नौत नदी के पास श्री हनुमानजी की 104 फुट और नदी के किनारे स्थित मुक्तिधाम में 21 फुट की शिव प्रतिमा बनाई है। वह हरियाणा, राजस्थान, जम्मू कश्मीर, मध्यप्रदेश और दिल्ली में भी देवी देवताओं और शहीदों की सैकड़ों प्रतिमाएं बना चुके हैं। शेखावत ने बताया कि वह प्रतिमाओं के निर्माण से मानसिक और आत्मिक सुख की अनुभूति करते हैं।