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बंट गए भगवान : भेदभाव के कारण नहीं हुआ सौंदर्यीकरण
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पालिका प्रशासन की भेदभाव का शिकार शिवालय।
वर्षों पहले नगर पालिका में हुई थी शिवालय की स्थापना
नगर पालिका के लेखाकार बोले- अपने-अपने मंदिर का कराएं रंग-रोगन
लखीमपुर खीरी। मंगलवार को नगर पालिका में शिवालय भी बंटे नजर आए। पालिकाध्यक्ष ने अपने द्वारा बनवाए गए मंदिर का सौंदर्यीकरण कराकर पड़ोस में बने शिवालय को यू ही छोड़ दिया। न ही उस पर फूलों की माला ही डालना जरूरी समझा। भंडारे के दौरान, जिसको भी यह नजारा दिखा। वही इसकी आलोचना करता दिखा।
नगर पालिका में कई साल पहले का शिवालय है। वहां पर राजगढ़ के पूर्व सभासद अंशुमान माथुर पूजा करते आ रहे हैं। पालिकाध्यक्ष बनने के बाद उनके पति डॉ. सतीश कौशल बाजपेई ने मंदिर का निर्माण कराना शुरू किया, जो कुछ दिन पहले ही पूरा हुआ है। मंगलवार को इस उपलक्ष्य में भंडारा होना था, जिसको लेकर सोमवार से ही नवनिर्मित मंदिर और पुराने शिवालय के ऊपर बने बरामदे का सौंदर्यीकरण कराया जाने लगा। मगर, पुराने मंदिर में पूर्व सभासद के द्वारा पूजा अर्चना किए जाने को लेकर न तो इसका सौंदर्यीकरण कराया गया और न ही मंगलवार को इसकी सजावट कराई गई। भंडारे में शामिल होने के लिए जो भी मंगलवार को पालिका पहुंचा वहीं नवनिर्मित मंदिर व बरामदे को सजा संवरा और दूसरे की स्थिति बदहाल देेखकर दंग रह गया।
इस बाबत लेखाकर प्रहलाद सिंह का कहना था कि अपने-अपने मंदिर की रंगाई-पुताई कराएं। हालांकि बाद में शब्दावली बदलते हुए कहा कि यदि डॉक्टर साहब ने रंगाई पुताई नहीं कराई है तो पालिका कर्मी चंदा मिलाकर करा देंगे।
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मंदिर के पास नया बरामदा बना था, जिसकी रंगाई-पुताई कराने के लिए कहा था। कर्मचारियों की चूक के कारण शिवालय छूट गया होगा। इसका भी रंग रोगन करा दिया जाएगा।
- डॉ. सतीश कौशल बाजपेई, पालिकाध्यक्ष पति
100 साल पहले का शिवालय बना है। इनकी कृपा से ही नए मंदिर का निर्माण हुआ और वही अपेक्षित हो गए। पालिका में तो भगवान का भी बंटवारा हो गया। वहां तो व्यक्ति विशेष के भगवान हो गए।
- अंशुमान माथुर, पूर्व सभासद राजगढ़
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नगर पालिका के लेखाकार बोले- अपने-अपने मंदिर का कराएं रंग-रोगन
लखीमपुर खीरी। मंगलवार को नगर पालिका में शिवालय भी बंटे नजर आए। पालिकाध्यक्ष ने अपने द्वारा बनवाए गए मंदिर का सौंदर्यीकरण कराकर पड़ोस में बने शिवालय को यू ही छोड़ दिया। न ही उस पर फूलों की माला ही डालना जरूरी समझा। भंडारे के दौरान, जिसको भी यह नजारा दिखा। वही इसकी आलोचना करता दिखा।
नगर पालिका में कई साल पहले का शिवालय है। वहां पर राजगढ़ के पूर्व सभासद अंशुमान माथुर पूजा करते आ रहे हैं। पालिकाध्यक्ष बनने के बाद उनके पति डॉ. सतीश कौशल बाजपेई ने मंदिर का निर्माण कराना शुरू किया, जो कुछ दिन पहले ही पूरा हुआ है। मंगलवार को इस उपलक्ष्य में भंडारा होना था, जिसको लेकर सोमवार से ही नवनिर्मित मंदिर और पुराने शिवालय के ऊपर बने बरामदे का सौंदर्यीकरण कराया जाने लगा। मगर, पुराने मंदिर में पूर्व सभासद के द्वारा पूजा अर्चना किए जाने को लेकर न तो इसका सौंदर्यीकरण कराया गया और न ही मंगलवार को इसकी सजावट कराई गई। भंडारे में शामिल होने के लिए जो भी मंगलवार को पालिका पहुंचा वहीं नवनिर्मित मंदिर व बरामदे को सजा संवरा और दूसरे की स्थिति बदहाल देेखकर दंग रह गया।
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इस बाबत लेखाकर प्रहलाद सिंह का कहना था कि अपने-अपने मंदिर की रंगाई-पुताई कराएं। हालांकि बाद में शब्दावली बदलते हुए कहा कि यदि डॉक्टर साहब ने रंगाई पुताई नहीं कराई है तो पालिका कर्मी चंदा मिलाकर करा देंगे।
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मंदिर के पास नया बरामदा बना था, जिसकी रंगाई-पुताई कराने के लिए कहा था। कर्मचारियों की चूक के कारण शिवालय छूट गया होगा। इसका भी रंग रोगन करा दिया जाएगा।
- डॉ. सतीश कौशल बाजपेई, पालिकाध्यक्ष पति
100 साल पहले का शिवालय बना है। इनकी कृपा से ही नए मंदिर का निर्माण हुआ और वही अपेक्षित हो गए। पालिका में तो भगवान का भी बंटवारा हो गया। वहां तो व्यक्ति विशेष के भगवान हो गए।
- अंशुमान माथुर, पूर्व सभासद राजगढ़