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घाघरा की कटान में बिजली के पांच टावर बहे
अमर उजाला ब्यूरो धौरहरा।
Updated Sat, 02 Sep 2017 10:47 PM IST
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विनाशलीला
- फोटो : अमर उजाला
धौरहरा से नानपारा के बीच बिछाई जा रही थी लाइन
क्षेत्र में नदियों के कटान से विनाशलीला जारी है। इसकी चपेट में आने से बिजली ट्रांसमिशन के लिए धौरहरा से नानपारा के बीच बिछाई जा रही हाईटेंशन लाइन के पांच टॉवर नदी में समा गए हैं। विद्युत पारेषण खंड के अधिकारियों ने मौका मुआयना कर रिपोर्ट शासन को भेजी है।
बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए धौरहरा और नानपारा के बीच हाईटेंशन लाइन (132 केवीए) बिछाने का काम 2011 से चल रहा था। टावर बनाकर लाइनें बिछ गई थीं, लेकिन अभी बिजली आपूर्ति शुरू नहीं हुई थी। घाघरा नदी पर बने जालिमनगर पुल से करीब एक किमी दूर नदी के तेज कटान में आकर पांच टावर बह गए। सीतापुर के अधिशाषी अभियंता (विद्युत पारेषण) संजय कुमार सिंह ने बताया है कि आपात स्थिति में बिजली की आपूर्ति नानपारा से सुनिश्चित कराने के लिए यह लाइन बिछाई गई थी। पांच टावर बहने से करीब 50 लाख का नुकसान हुआ है। जबकि दोबारा निर्माण कार्य कराने पर दो करोड़ रुपये व्यय आने का अनुमान है।
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क्षेत्र में नदियों के कटान से विनाशलीला जारी है। इसकी चपेट में आने से बिजली ट्रांसमिशन के लिए धौरहरा से नानपारा के बीच बिछाई जा रही हाईटेंशन लाइन के पांच टॉवर नदी में समा गए हैं। विद्युत पारेषण खंड के अधिकारियों ने मौका मुआयना कर रिपोर्ट शासन को भेजी है।
बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए धौरहरा और नानपारा के बीच हाईटेंशन लाइन (132 केवीए) बिछाने का काम 2011 से चल रहा था। टावर बनाकर लाइनें बिछ गई थीं, लेकिन अभी बिजली आपूर्ति शुरू नहीं हुई थी। घाघरा नदी पर बने जालिमनगर पुल से करीब एक किमी दूर नदी के तेज कटान में आकर पांच टावर बह गए। सीतापुर के अधिशाषी अभियंता (विद्युत पारेषण) संजय कुमार सिंह ने बताया है कि आपात स्थिति में बिजली की आपूर्ति नानपारा से सुनिश्चित कराने के लिए यह लाइन बिछाई गई थी। पांच टावर बहने से करीब 50 लाख का नुकसान हुआ है। जबकि दोबारा निर्माण कार्य कराने पर दो करोड़ रुपये व्यय आने का अनुमान है।
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