{"_id":"65317651007e53d6d4006c24","slug":"from-fever-medicine-to-blood-pressure-controlling-injections-there-is-no-availability-in-womens-hospital-lakhimpur-news-c-120-1-sbly1017-7926-2023-10-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lakhimpur Kheri News: महिला अस्पताल में बुखार की दवा से लेकर रक्तचाप नियंत्रित करने वाले इंजेक्शन तक नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lakhimpur Kheri News: महिला अस्पताल में बुखार की दवा से लेकर रक्तचाप नियंत्रित करने वाले इंजेक्शन तक नहीं
विज्ञापन
महिला अस्पताल में ओपीडी के सामने बैठे मरीज
लखीमपुर खीरी। महिला अस्पताल में दवाओं का संकट खड़ा हो गया है। नवजात से लेकर गर्भवतियों तक को दी जाने वाली कई दवाओं की कमी है। मांग के बावजूद कॉर्पोरेशन से आपूर्ति न मिलने की बात कहकर जिम्मेदार अपना पल्ला झाड़ रहे हैं, वहीं तीमारदार बाजार से दवाएं खरीदने के लिए मजबूर हैं।
पिछले सात दिन से महिला अस्पताल में न तो गर्भवतियों को चढ़ाने के लिए एनएस (सामान्य सैलाइन) की बोतलें हैं और न ही गर्भवतियों का शुगर लेबल जांचने के लिए ग्लूकोज-750 के पैकेट हैं। वहीं बेहोशी के इंजेक्शन से लेकर रक्तचाप नियंत्रित करने के लिए लगाया जाने वाले इंजेक्शन का भी अकाल है।
बुखार पीड़ित मासूम बच्चों के लिए पैरासिटामॉल का सिरप तक नहीं है। सिरप सात सितंबर को ही खत्म हो गए थे। नवजात शिशुओं को पैरासिटमॉल की गोली घोलकर दी जा रही है। उधर, अस्पताल प्रशासन का कहना है कि दवाओं की आपूर्ति कॉर्पोरेशन से होती है, इसके लिये डिमांड भेजी गई है। समय पर सप्लाई न मिलने से दवाओं का संकट खड़ा हो गया है।
विज्ञापन
इसलिए है दवाओं का संकटपहले दवाएं सीधे कॉर्पोरेशन से मिलती थीं, लेकिन मेडिकल कॉलेज बनने की वजह से जिला और महिला अस्पताल को चिकित्सा शिक्षा विभाग से संबद्ध किया गया है। अब मेडिकल कॉलेज के नियुक्त प्रशासक को डिमांड भेजनी पड़ती है। प्रक्रिया बदलने की वजह से दवाओं का टोटा है। हालांकि, निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज के नियुक्त प्राचार्य शैलैंद्र गोयल ने इससे इन्कार किया। कहा कि कि महिला अस्पताल को जो दवाएं कॉर्पोरेशन से नहीं मिलती हैं, वह दवाएं लोकल पर्चेज के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती है। महिला अस्पताल की गई कोई डिमांड पेंडिंग नहीं है। जबकि महिला अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मांग पत्र भेजा गया है।
दवाओं के लिए समय-समय पर मांगपत्र भिजवाया जाता है। कुछ दवाएं कॉर्पोरेशन से आती हैं और कुछ की खरीदारी स्थानीय स्तर पर की जाती है। स्थानीय स्तर से खरीदी जाने वाली दवाओं के लिए उच्च अधिकारियों को मांगपत्र भेजा चुका है।
डॉ. ज्योति मेहरोत्रा, सीएमएस महिला अस्पताल
विज्ञापन
पिछले सात दिन से महिला अस्पताल में न तो गर्भवतियों को चढ़ाने के लिए एनएस (सामान्य सैलाइन) की बोतलें हैं और न ही गर्भवतियों का शुगर लेबल जांचने के लिए ग्लूकोज-750 के पैकेट हैं। वहीं बेहोशी के इंजेक्शन से लेकर रक्तचाप नियंत्रित करने के लिए लगाया जाने वाले इंजेक्शन का भी अकाल है।
विज्ञापन
बुखार पीड़ित मासूम बच्चों के लिए पैरासिटामॉल का सिरप तक नहीं है। सिरप सात सितंबर को ही खत्म हो गए थे। नवजात शिशुओं को पैरासिटमॉल की गोली घोलकर दी जा रही है। उधर, अस्पताल प्रशासन का कहना है कि दवाओं की आपूर्ति कॉर्पोरेशन से होती है, इसके लिये डिमांड भेजी गई है। समय पर सप्लाई न मिलने से दवाओं का संकट खड़ा हो गया है।
विज्ञापन
इसलिए है दवाओं का संकटपहले दवाएं सीधे कॉर्पोरेशन से मिलती थीं, लेकिन मेडिकल कॉलेज बनने की वजह से जिला और महिला अस्पताल को चिकित्सा शिक्षा विभाग से संबद्ध किया गया है। अब मेडिकल कॉलेज के नियुक्त प्रशासक को डिमांड भेजनी पड़ती है। प्रक्रिया बदलने की वजह से दवाओं का टोटा है। हालांकि, निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज के नियुक्त प्राचार्य शैलैंद्र गोयल ने इससे इन्कार किया। कहा कि कि महिला अस्पताल को जो दवाएं कॉर्पोरेशन से नहीं मिलती हैं, वह दवाएं लोकल पर्चेज के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती है। महिला अस्पताल की गई कोई डिमांड पेंडिंग नहीं है। जबकि महिला अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मांग पत्र भेजा गया है।
दवाओं के लिए समय-समय पर मांगपत्र भिजवाया जाता है। कुछ दवाएं कॉर्पोरेशन से आती हैं और कुछ की खरीदारी स्थानीय स्तर पर की जाती है। स्थानीय स्तर से खरीदी जाने वाली दवाओं के लिए उच्च अधिकारियों को मांगपत्र भेजा चुका है।
डॉ. ज्योति मेहरोत्रा, सीएमएस महिला अस्पताल

महिला अस्पताल में ओपीडी के सामने बैठे मरीज