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दिवाली से पहले उजड़े आशियाने: मोहाना नदी में समाए चार घर... कई जद में आए, कटान से ग्रामीणों में दहशत

Thu, 24 Oct 2024 01:47 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Published by: मुकेश कुमार Updated Thu, 24 Oct 2024 01:47 PM IST
सार

बीते सप्ताह गिरिजापुरी बैराज के सभी गेट खोल दिए जाने से मोहाना नदी में अचानक उफान आ गया, जिससे तिकुनिया क्षेत्र के गांव जसनगर में नदी कटान करने लगी। कटान होने से चार घर नदी में समा गए हैं। 

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Four houses submerged in Mohana river due to erosion in Lakhimpur kheri
नदी का कटान देखकर खुद घर तोड़ने लगे ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लखीमपुर खीरी के तिकुनिया क्षेत्र के गांव जसनगर में मोहाना नदी की धार तो धीमी हुई, लेकिन कटान अभी थमा नहीं है। तीन दिन में चार घर नदी में समाने के बाद ग्रामीणों ने अपना आशियाना खुद ही तोड़ना शुरू कर दिया। ताकि घरों की ईंट व अन्य सामान तो बचा सकें। मोहाना नदी कटान करते हुए बृहस्पतिवार को गांव निवासी रामवृक्ष के घर के समीप पहुंच गई। कटान की दहशत से उन्होंने अपना मकान तोड़ना शुरू कर दिया। प्रशासन द्वारा कोई मदद न मिलने पर यहां के ग्रामीण दुखी हैं।

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बुधवार को सिंचाई विभाग की टीम ने श्यामलाल, श्रीराम, जगदीश, नत्थू के घर नदी में समाने के बाद गांव में पहुंचकर यहां स्थित मंदिर को बचाने के लिए ग्रामीणों के सहयोग से प्रयास शुरू किया। जेसीबी से बोरियों में मिट्टी भरकर मंदिर के किनारे लगाई गईं। इस काम में गांव वाले भी जुड़ गए हैं। हालांकि इससे कितना लाभ मिल पाएगा यह तो वक्त बताएगा। वहीं दिवाली से पहले जिनके घर उजड़ गए हैं, उनके आंसू नहीं थम रहे हैं। 
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संबंधित वीडियो 

Four houses submerged in Mohana river due to erosion in Lakhimpur kheri
मंदिर को बचाने के लिए किए जा रहे प्रयास - फोटो : अमर उजाला

'हमारी पीड़ा कोई सुनने वाला नहीं'
गांववालों का कहना है कि कोई भी जनप्रतिनिधि झांकने नहीं आया। हम अपनी पीड़ा किसे कहें कोई सुनने वाला नहीं है। सिंचाई विभाग के अधिकारी अगस्त महीने में गांव की जमीन का कटान हो जाने के बाद बीते माह सितंबर में आए थे। बांस का काम शुरू किया था। इसके बाद नदी की धारा कम हो जाने पर 15 दिन पहले ही चले गए। तब नदी में पानी कम हो गया था और बाढ़ भी नहीं थी। 

गिरिजापुरी बैराज के गेट खुलने से अचानक पानी आने से नदी फिर उफना गई है। एक हफ्ते से हो रहे कटान के कारण पूरा गांव नदी की चपेट में आ गया है। वहीं सिंचाई विभाग के अवर अभियंता मुसाफिर ने बताया कि अब कटान नहीं हो रहा है। ग्रामीण दहशत में हैं, जिसके चलते बोरियों में मिट्टी भरकर किनारे पर लगाने का काम शुरू कर दिया है।

 

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