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Lakhimpur Kheri News: पिता-पुत्र सहित चार हमलावरों को सात साल कैद की सजा
Tue, 28 Apr 2026 12:21 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Tue, 28 Apr 2026 12:21 AM IST
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लखीमपुर खीरी। पुरानी रंजिश के चलते ग्रामीण और उसके परिजनों पर जानलेवा हमला करने के 14 साल पुराने मामले में एडीजे अशोक दुबे ने पिता-पुत्र सहित चार हमलावरों को सात-सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
अभियोजन पक्ष ने बताया कि ईसानगर थाना क्षेत्र के ग्राम दुर्गापुर पड़री निवासी हरद्वारी लाल और गांव के ही मुन्ना सिंह के परिवार में पुरानी रंजिश चली आ रही थी। इसके चलते 30 जून, 2012 की दोपहर बारह बजे मुन्ना सिंह और उसके पुत्र गुड्डू सिंह तथा त्रिमोहन सिंह, उसके पुत्र प्रमोद सिंह ने अपने कई साथियों के साथ धावा बोल दिया।
इन लोगों ने हाथों में लाठी-डंडे और नाजायज अद्धी बंदूकों सहित हमला कर दिया। इसी दौरान बचाव के बावजूद हमलावरों ने नाजायज अद्धी बंदूक से फायर करते हुए हरद्वारी लाल के साथ ही उसके परिवार के बसंत, राजकुमारी, निर्जला और भानू को घायल कर दिया था।
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शोर-शराबे और फायरिंग की आवाज सुनकर कई गांव वाले एकत्रित हो गए। उनके ललकारने पर हमलावर धमकियां देते हुए भाग गए। तफ्तीश के दौरान ही इंस्पेक्टर आलोक राव ने 16 सितंबर, 2012 को हमलावरों को घटना में प्रयुक्त बंदूक और तमंचे के साथ गिरफ्तार किया था।
सभी हमलावरों की गिरफ्तारी करते हुए जानलेवा हमले की धारा में चार्जशीट दाखिल की गई थी। अदालती सुनवाई के दौरान अभियोजन ने हरद्वारी लाल, भानू, डाॅक्टर वीके वर्मा, राजकुमारी, निर्जला, पियूष यादव, एसआई एनसी दुबे, हीराप्रसाद यादव, इंस्पेक्टर आलोक राव, कमलेश सिंह, शाहजहां खां, एसआई उमाशंकर शर्मा और एसआई शाहजहां खां के बयान दर्ज कराए।
बचाव पक्ष की ओर से खुद को निर्दोष बताते हुए अशोक कुमार और गोपीचंद्र को पेश किया गया। एडीजे अशोक दुबे ने सोमवार को फैसला सुनाते हुए चारों हमलावर पिता-पुत्रों को सात-सात साल के कठोर कारावास और सात-सात हजार रुपये का जुर्माना भरने की सजा सुनाई है।
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अभियोजन पक्ष ने बताया कि ईसानगर थाना क्षेत्र के ग्राम दुर्गापुर पड़री निवासी हरद्वारी लाल और गांव के ही मुन्ना सिंह के परिवार में पुरानी रंजिश चली आ रही थी। इसके चलते 30 जून, 2012 की दोपहर बारह बजे मुन्ना सिंह और उसके पुत्र गुड्डू सिंह तथा त्रिमोहन सिंह, उसके पुत्र प्रमोद सिंह ने अपने कई साथियों के साथ धावा बोल दिया।
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इन लोगों ने हाथों में लाठी-डंडे और नाजायज अद्धी बंदूकों सहित हमला कर दिया। इसी दौरान बचाव के बावजूद हमलावरों ने नाजायज अद्धी बंदूक से फायर करते हुए हरद्वारी लाल के साथ ही उसके परिवार के बसंत, राजकुमारी, निर्जला और भानू को घायल कर दिया था।
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शोर-शराबे और फायरिंग की आवाज सुनकर कई गांव वाले एकत्रित हो गए। उनके ललकारने पर हमलावर धमकियां देते हुए भाग गए। तफ्तीश के दौरान ही इंस्पेक्टर आलोक राव ने 16 सितंबर, 2012 को हमलावरों को घटना में प्रयुक्त बंदूक और तमंचे के साथ गिरफ्तार किया था।
सभी हमलावरों की गिरफ्तारी करते हुए जानलेवा हमले की धारा में चार्जशीट दाखिल की गई थी। अदालती सुनवाई के दौरान अभियोजन ने हरद्वारी लाल, भानू, डाॅक्टर वीके वर्मा, राजकुमारी, निर्जला, पियूष यादव, एसआई एनसी दुबे, हीराप्रसाद यादव, इंस्पेक्टर आलोक राव, कमलेश सिंह, शाहजहां खां, एसआई उमाशंकर शर्मा और एसआई शाहजहां खां के बयान दर्ज कराए।
बचाव पक्ष की ओर से खुद को निर्दोष बताते हुए अशोक कुमार और गोपीचंद्र को पेश किया गया। एडीजे अशोक दुबे ने सोमवार को फैसला सुनाते हुए चारों हमलावर पिता-पुत्रों को सात-सात साल के कठोर कारावास और सात-सात हजार रुपये का जुर्माना भरने की सजा सुनाई है।