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बांकेगंज-मैलानी के बीच वन विभाग नहीं दे रहा विद्युतीकरण की अनुमति

Mon, 22 Nov 2021 02:09 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 22 Nov 2021 02:09 AM IST
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Forest department is not giving permission for electrification between Bankeganj-Mailani
बांकेगंज-मैलानी जंगल के बीच से गुजरती ब्रॉडगेज रेल लाइन।
वन विभाग पता लगा रहा कि रेल विद्युतीकरण से वन्यजीवों को तो नहीं होगा नुकसान
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12 किलोमीटर लंबी रेल लाइन दुधवा की मैलानी रेंज के जंगल से होकर है गुजरती
बांकेगंज। बांकेगंज से मैलानी के बीच 12 किलोमीटर लंबी रेल लाइन दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के मैलानी रेंज के जंगल से होकर गुजरती है। इसके लिए वन विभाग की एनओसी जरूरी है, जो विभाग रेलवे को नहीं दे रहा है। इस संबंध में वन विभाग का कहना है कि वह विद्युतीकरण से वन्यजीवों को होने वाले नुकसान का आकलन कर रहे हैं, इसके बाद ही अपना फैसला देंगे।
आमान-परिवर्तन की कार्यदायी संस्था आरवीएनएल ने बांकेगंज-मैलानी के बीच जंगल से गुजरी रेल लाइन के विद्युतीकरण के लिए 11 माह पहले आवेदन किया था। दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन ने इसके लिए अपनी रिपोर्ट लगाकर मंजूरी के लिए वन विभाग के पीसीसीएफ के माध्यम से केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेज दी थी। वन मंत्रालय अनापत्ति देने से पहले सभी पहलुओं पर मंथन कर रहा है। इसके लिए एक कमेटी बनाई गई है, जो यह पता लगा रही है कि इस रेल विद्युतीकरण से वन्यजीवों और पक्षियों को कोई नुकसान तो नहीं होगा। कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद ही अनापत्ति प्रमाण-पत्र जारी हो सकेगा।
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पता चला है कि मुख्यमंत्री और प्रधान मुख्य वन संरक्षक लखनऊ ने इसके लिए अपनी मंजूरी दे दी है। अब एनओसी के लिए एनटीसीए (राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण) की गठित कमेटी की अनुमति के बाद राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड मंथन करेगा। जहां से अनापत्ति प्रमाण-पत्र जारी होने के बाद ही बांकेगंज- मैलानी रेल खंड पर रेल विद्युतीकरण का कार्य शुरू हो सकेगा। जब तक बांकेगंज से मैलानी तक रेल विद्युतीकरण का कार्य पूरा नहीं होता तब तक यात्रियों को बांकेगंज, मैलानी, लखीमपुर, लखनऊ, गोरखपुर, अंबाला, जम्मू आदि स्टेशनों तक ब्रॉडगेज की इलेक्ट्रिक ट्रेनों में सफर करने का सपना पूरा नहीं हो सकेगा।
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प्रधान मुख्य वन संरक्षक के माध्यम से दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन ने बांकेगंज मैलानी जंगल से गुजरी रेल लाइन पर विद्युतीकरण अनापत्ति प्रमाण-पत्र के लिए अपनी रिपोर्ट केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेज दी है। जहां वह विचाराधीन है। वहां से मंजूरी मिलते ही अनापत्ति प्रमाण-पत्र जारी कर दिया जाएगा। - संजय पाठक, मुख्य वन संरक्षक / फील्ड निदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व
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