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बाढ़ के पानी से जकनकपुर में ढहा कच्चा घर
अमर उजाला ब्यूरो तिकुनियां खीरी।
Updated Sun, 06 Aug 2017 11:38 PM IST
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बाढ़
- फोटो : अमर उजाला
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कई गांवों में कम होने का लगा बाढ़ का पानी
टांडा मार्ग पर रविवार को भी बह रहा दो फुट पानी
भारत-नेपाल सीमावर्ती गांवों में बाढ़ का पानी कम होने लगा है। बाढ़ का पानी कौडियाला गुरुद्वारा, जनकपुर गांव में घट गया, लेकिन टांडा गांव को जाने वाले रास्ते पर रविवार को भी करीब दो फुट बह रहा है। जनकपुर निवासी कुसमी का घर भी गिर गया, जिससे उसमें रखा घरेलू सामान नष्ट हो गया।
भारत-नेपाल के बीच बह रही मोहाना नदी गुरुवार की सुबह उफना गई थी। इससे कई गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया था। गांवों का संपर्क भी एक दूसरे गांवों से टूट गया। रविवार को बाढ़ का पानी जनकपुर, कौडियाला, टांडा गांव से कम हो गया है, इससे बाढ़ पीड़ितों ने राहत महसूस की है, लेकिन टांडा गांव को जाने वाली रेलवे क्रासिंग पर रविवार को भी बाढ़ का पानी बह रहा है। सड़क पर ज्यादा पानी ना होने से ग्रामीण पैदल ही पानी से निकलकर काम-धाम पर गए। पानी भले ही कम होने लगा है, लेकिन बाढ़ पीड़ितों की समस्या कम नहीं हुई है। ज्यादातर बाढ़ पीड़ितों के राशन बह जाने, घरों में कीचड़-गंदगी भर जाने से लोग परेशान हैं। जनकपुर गांव निवासी कुसमी का शनिवार की रात घर गिर गया। गांव जनकपुर निवासी ओमप्रकाश, धर्मप्रसाद, बिंदुलाल ने बताया कि मिट्टी, गंदगी घुस जाने की वजह से दिन रात एक कर घर की सफाई करनी पड़ रही है। ज्यादातर घरों का राशन भीगकर खराब हो गया है। जानवरों का चारा मिट्टी भरे घास में तब्दील हो गया, जिससे मवेशियों के लिए चारे का संकट भी गहरा गया है।
बाढ़ पीड़ितों के लिए रक्षाबंधन का त्यौहार हुआ फीका
जनकपुर गांव निवासी कुसुमी की बेटी नीलम के दो बड़े भाई बाहर कमाते हैं। उन्हीं पैसों से घर का खर्चा चलता है। नीलम ने सोचा था कि अबकी बार रक्षाबंधन का त्यौहार बड़ी धूमधाम से मनाएंगे, लेकिन बाढ़ के कहर के बाद छप्पर से बना घर गिर गया। उसके अंदर रखा राशन-पानी भी बर्बाद हो गया। कुदरत की मार के आगे परिवार सड़कों पर आ गया है। इसी तरह बाढ़ प्रभावित गांव के लोग रक्षाबंधन की तैयारी करने के बजाए परिवार समेत घर की सफाई करने में जुटे हैं। सड़कों पर रहकर जीवन यापन कर रहे हैं।
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एसडीएम के आदेश पर भी टांडा गांव में नहीं बंटी सामग्री
बाढ़ से टापू बने टांडा गांव में शनिवार को एसडीएम अखिलेश यादव ने दौरा किया था और बाढ़ पीड़ितों को नाव से लंच पैकेट, पीने को साफ पानी पहुंचाने के निर्देश क्षेत्रीय लेखपाल दयाशंकर दीक्षित को दिए थे। टांडा गांव निवासी सुरेश, सुनील, रामलखन, सोनू, मोती, निर्मल, सारजन, जगदीश, राजकुमार वर्मा के मुताबिक एसडीएम के आदेश पर लेखपाल ने नाव से गांव का दौरा कर खाना पूर्ति की। राहत सामग्री के नाम पर बाढ़ पीड़ितों को कुछ नहीं दिया गया। गांव के बलराम ने बताया कि यहां के ज्यादातर लोगों के घरों में पानी भर जाने की वजह से चूल्हा नही जल पाया है, जिससे करीब बीस घरों के लोग भूखे रहे, लेकिन तहसील प्रशासन से कोई लंच पैकेट या अन्य राहत सामग्री नहीं वितरित की गई है।
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टांडा मार्ग पर रविवार को भी बह रहा दो फुट पानी
भारत-नेपाल सीमावर्ती गांवों में बाढ़ का पानी कम होने लगा है। बाढ़ का पानी कौडियाला गुरुद्वारा, जनकपुर गांव में घट गया, लेकिन टांडा गांव को जाने वाले रास्ते पर रविवार को भी करीब दो फुट बह रहा है। जनकपुर निवासी कुसमी का घर भी गिर गया, जिससे उसमें रखा घरेलू सामान नष्ट हो गया।
भारत-नेपाल के बीच बह रही मोहाना नदी गुरुवार की सुबह उफना गई थी। इससे कई गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया था। गांवों का संपर्क भी एक दूसरे गांवों से टूट गया। रविवार को बाढ़ का पानी जनकपुर, कौडियाला, टांडा गांव से कम हो गया है, इससे बाढ़ पीड़ितों ने राहत महसूस की है, लेकिन टांडा गांव को जाने वाली रेलवे क्रासिंग पर रविवार को भी बाढ़ का पानी बह रहा है। सड़क पर ज्यादा पानी ना होने से ग्रामीण पैदल ही पानी से निकलकर काम-धाम पर गए। पानी भले ही कम होने लगा है, लेकिन बाढ़ पीड़ितों की समस्या कम नहीं हुई है। ज्यादातर बाढ़ पीड़ितों के राशन बह जाने, घरों में कीचड़-गंदगी भर जाने से लोग परेशान हैं। जनकपुर गांव निवासी कुसमी का शनिवार की रात घर गिर गया। गांव जनकपुर निवासी ओमप्रकाश, धर्मप्रसाद, बिंदुलाल ने बताया कि मिट्टी, गंदगी घुस जाने की वजह से दिन रात एक कर घर की सफाई करनी पड़ रही है। ज्यादातर घरों का राशन भीगकर खराब हो गया है। जानवरों का चारा मिट्टी भरे घास में तब्दील हो गया, जिससे मवेशियों के लिए चारे का संकट भी गहरा गया है।
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बाढ़ पीड़ितों के लिए रक्षाबंधन का त्यौहार हुआ फीका
जनकपुर गांव निवासी कुसुमी की बेटी नीलम के दो बड़े भाई बाहर कमाते हैं। उन्हीं पैसों से घर का खर्चा चलता है। नीलम ने सोचा था कि अबकी बार रक्षाबंधन का त्यौहार बड़ी धूमधाम से मनाएंगे, लेकिन बाढ़ के कहर के बाद छप्पर से बना घर गिर गया। उसके अंदर रखा राशन-पानी भी बर्बाद हो गया। कुदरत की मार के आगे परिवार सड़कों पर आ गया है। इसी तरह बाढ़ प्रभावित गांव के लोग रक्षाबंधन की तैयारी करने के बजाए परिवार समेत घर की सफाई करने में जुटे हैं। सड़कों पर रहकर जीवन यापन कर रहे हैं।
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एसडीएम के आदेश पर भी टांडा गांव में नहीं बंटी सामग्री
बाढ़ से टापू बने टांडा गांव में शनिवार को एसडीएम अखिलेश यादव ने दौरा किया था और बाढ़ पीड़ितों को नाव से लंच पैकेट, पीने को साफ पानी पहुंचाने के निर्देश क्षेत्रीय लेखपाल दयाशंकर दीक्षित को दिए थे। टांडा गांव निवासी सुरेश, सुनील, रामलखन, सोनू, मोती, निर्मल, सारजन, जगदीश, राजकुमार वर्मा के मुताबिक एसडीएम के आदेश पर लेखपाल ने नाव से गांव का दौरा कर खाना पूर्ति की। राहत सामग्री के नाम पर बाढ़ पीड़ितों को कुछ नहीं दिया गया। गांव के बलराम ने बताया कि यहां के ज्यादातर लोगों के घरों में पानी भर जाने की वजह से चूल्हा नही जल पाया है, जिससे करीब बीस घरों के लोग भूखे रहे, लेकिन तहसील प्रशासन से कोई लंच पैकेट या अन्य राहत सामग्री नहीं वितरित की गई है।