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Lakhimpur Kheri News: पिता ने बसाया, बेटी ने की उजाड़ने की कोशिश... खत्म हो गया पूरा परिवार

Fri, 06 Dec 2024 11:33 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 06 Dec 2024 11:33 PM IST
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Father settled it, daughter tried to destroy it... the whole family was destroyed.
बाबूपुर गांव में इसी मकान को लेकर था विवाद संवाद।
बांकेगंज। दूसरे गांव के रहने वाले रामनरेश को आरोपी सिपाही आरती निगम के पिता और उसके साले सुंदरलाल ने ही बाबूपुर गांव में बसाया था। एक हजार वर्ग फुट के इस मकान में पिता और दो अविवाहित पुत्र रहते थे। पहले सब ठीक था, लेकिन तीन महीने से इसके मालिकाना हक को लेकर विवाद होना लगा। बात इस हद तक पहुंच गई कि तीनों को अपनी जान गंवानी पड़ गई।
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राम नरेश मूलत: इसी ग्राम पंचायत के तिलकपुर गांव के रहने वाले थे। आरोपी महिला सिपाही आरती के पिता स्व. सुंदर लाल ने अपनी बहन लौंगश्री की शादी राम नरेश के साथ की थी। बाद में कई वर्ष पहले जब राम नरेश की पत्नी की मौत हो गई, तब उनके साले सुंदर लाल ने वर्ष 2006 में राम नरेश को बाबूपुर गांव में आकर बसने को कहा था। उस पर राम नरेश तैयार हो गए। राम नरेश ने सुंदर लाल के घर के बगल में जगह खरीदकर झोंपड़ी डाल ली थी।
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इस बीच राम नरेश ने अपनी बेटी शिल्पी की शादी शाहजहांपुर जिले में कर दी थी। अब घर में केवल तीन लोग राम नरेश और उसके दो पुत्र मुकेश व सुधीर रह गए। उधर सुंदर लाल की पुत्री आरती को पुलिस विभाग में सिपाही की नौकरी मिल गई। बताते हैं कि इसके बाद से ही आरती ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया। उसने राम नरेश के घर पर अपना अधिकार जमाते हुए कहा कि ये जमीन उसके पिता सुंदर लाल ने दी थी।
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आरती, उसकी मां रामदेवी, बहन शशिबाला और भाई शिवम ने राम नरेश पर घर खाली करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। इससे राम नरेश का पूरा परिवार काफी आहत और परेशान था। परेशानी की इंतहा होने पर पहले राम नरेश, फिर उसके दोनों पुत्रों मुकेश और सुधीर ने आत्महत्या कर ली।

पुलिस राम नरेश की सुन लेती तो आत्महत्या की नौबत न आती
पिछले तीन महीने से चल रहा यह विवाद कई बार बांकेगंज पुलिस के सामने आया। राम नरेश ने हर बार पुलिस को पूरी घटना बताते हुए कहा कि उसने अपने घर की जमीन दूसरे से खरीदी थी, लेकिन पुलिस ने उसकी एक न सुनी और राम नरेश को राजस्व न्यायालय में जाने की बात कहकर टरकाती रही। आरती के पुलिस में होने के कारण पुलिस उसी का पक्ष लेती रही। तीन माह में कम से कम चार बार यह मामला पुलिस के सामने पहुंचा, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। हर तरफ से आहत होने के बाद राम नरेश और उसके पुत्रों ने आत्महत्या का रास्ता अपनाया। बुधवार को दोनों पक्षों में समझौते की कोशिश भी पुलिस चौकी पर हुई थी, पर बात नहीं बनी।

घर में दिया जलाने वाला तक नहीं बचा
इस विवाद के न सुलझने का नतीजा यह हुआ कि राम नरेश और उसके दोनों पुत्रों के आत्महत्या कर लेने के बाद घर में कोई दिया जलाने वाला तक नहीं बचा है। राम नरेश की पत्नी का पहले ही निधन हो चुका है। इकलौती बेटी की शादी शाहजहांपुर में हो गई थी। घर में केवल राम नरेश और उसके दो अविवाहित बेटे रह गए थे। घटना के बाद से राम नरेश की विवाहिता बेटी का रो-रो कर बुरा हाल है। पिता और भाइयों के शव के पास वह दहाड़े मारकर चिल्ला रही थी कि अब उसे मायके बुलाने वाला कोई नहीं बचा। आरती और उसकी मां ने उसका पूरा परिवार उजाड़ दिया।
एक हजार वर्ग फुट मकान के लिए चली गईं तीन जानें
बाबूपुर गांव में झगड़ा सिर्फ एक हजार वर्ग फिट भूमि को लेकर था। इस घर में दो पक्के कमरे, एक झोंपड़ी, आंगन और सहन है। इस झोंपड़ी में डाकघर चलता है। इस छोटी से भूमि के टुकड़े के लिए 24 घंटे अंदर तीन जानें चली गईं।
महिला सिपाही समेत तीनों आरोपियों को पुलिस ने किया गिरफ्तार
बाबूपुर गांव में शुक्रवार सुबह राम नरेश के दोनों पुत्रों के आत्महत्या करने बाद ग्रामीणों में काफी आक्रोश था। घटना की सूचना के बाद गांव पहुंचे एसडीएम गोला विनोद गुप्ता, सीओ गवेंद्र पाल, एसओ मैलानी राजेश सिंह ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद घर में मौजूद महिला सिपाही आरती निगम, उसकी मां रामदेवी, बहन शशिबाला और भाई शिवम को गिरफ्तार कर लिया।

महिला सिपाही के खिलाफ होगी विभागीय कार्रवाई : एसपी
सूचना मिलने के बाद एसपी गणेश प्रसाद साहा बाबूपुर गांव पहुंचे। उन्होंने घटना स्थल का बारीकी से निरीक्षण कर आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का आश्वासन दिया। बातचीत में उन्होंने बताया कि मामले में पुलिस की लापरवाही की बात सामने आई है, इसकी जांच कराई जा रही है। जांच के बाद संबंधित पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई तय है।


विधायक ने अंतिम संस्कार के लिए दी आर्थिक मदद
घटना की सूचना मिलने पर पलिया विधायक रोमी साहनी बाबूपुर गांव पहुंचे। उन्होंने मृतक राम नरेश की पुत्री से मुलाकात कर ढांढस बंधाया। ग्रामीणों ने विधायक से कहा कि मुकेश और सुधीर के अंतिम संस्कार के लिए रुपये का इंतजाम नहीं है। इस पर विधायक ने दोनों के अंतिम संस्कार के लिए 25 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी।

बाबूपुर गांव में इसी मकान को लेकर था विवाद संवाद।

बाबूपुर गांव में इसी मकान को लेकर था विवाद संवाद।

बाबूपुर गांव में इसी मकान को लेकर था विवाद संवाद।

बाबूपुर गांव में इसी मकान को लेकर था विवाद संवाद।

बाबूपुर गांव में इसी मकान को लेकर था विवाद संवाद।

बाबूपुर गांव में इसी मकान को लेकर था विवाद संवाद।

बाबूपुर गांव में इसी मकान को लेकर था विवाद संवाद।

बाबूपुर गांव में इसी मकान को लेकर था विवाद संवाद।

बाबूपुर गांव में इसी मकान को लेकर था विवाद संवाद।

बाबूपुर गांव में इसी मकान को लेकर था विवाद संवाद।

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