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नाबालिग बेटी से दुष्कर्म में पिता को उम्रकैद की सजा

Sun, 07 Mar 2021 12:26 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 07 Mar 2021 12:26 AM IST
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Father sentenced to life imprisonment for misbehaving with daughter
13 साल की नाबालिग के साथ मध्यप्रदेश में बलात्कार - फोटो : सोशल मीडिया

2018 में पिता ने नाबालिग बेटी के साथ किया था दुष्कर्म
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पाक्सो अदालत ने बीस हजार रुपये का जुर्माना में लगाया

लखीमपुर खीरी। नाबालिग बेटी को हवस का शिकार बनाने के मामले में पिता को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। सजा पाक्सो अदालत के अपर जिला जज राजेश कुमार मिश्र ने सुनाई है। जज ने बीस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
अभियोजन का पक्ष रखते हुए विशेष लोक अभियोजक संजय सिंह ने बताया कि मैलानी थाना क्षेत्र के एक गांव में रहने वाली किशोरी के साथ 22 सितंबर 2018 की रात को उसके पिता महेश कुमार ने दुष्कर्म करने के साथ ही जान से मार डालने की धमकी दी थी। पिता की हरकत से परेशान होकर किशोरी ने अपनी ननिहाल पहुंचकर मामी और मामा राजेश कुमार को पूरी बात बताई, साथ ही मिल रही धमकी की जानकारी दी। तब मामा ने थाना मैलानी पहुंचकर घटना की सूचना पुलिस को दी। पुलिस तफ्तीश में आरोपों की पुष्टि हुई, तब रिपोर्ट दर्ज कर आरोपी महेश कुमार को जेल भेज दिया गया। वहीं चिकित्सीय जांच व अन्य सबूत भी दुष्कर्मी पिता के खिलाफ गवाही देते रहे।
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विशेष अभियोजक संजय सिंह ने बताया आरोपी महेश की पत्नी का देहांत होने के बाद उसने अपनी ही पुत्री को हवस का शिकार बनाया था। इस मामले में राजेश, सुमन देवी, डॉ. अर्चना कुमार कांस्टेबल अरविंद कुमार और एसएचओ बृजेश कुमार त्रिपाठी ने भी अपनी गवाही दर्ज कराई और बचाव पक्ष की कोई दलील नहीं लगने दी। अदालत ने सुनवाई के बाद दुष्कर्मी को उम्रकैद की सजा सुनाई है, साथ ही उसे बीस हजार रुपये का जुर्माना भरने का आदेश दिया।
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पीड़िता को मिलेगी जुर्माने की रकम

अदालत ने अपने फैसले में नाबालिग किशोरी के प्रति संवेदना जताते हुए अपने फैसले में व्यवस्था दी है कि वसूली गई जुर्माना की रकम में से पीड़िता को बीस हजार रुपये की धनराशि बतौर मुआवजा अदा की जाएगी।

सजा सुनकर स्तब्ध रह गया आरोपी

नाबालिग बेटी से दुष्कर्म के मामले में सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए शनिवार को जेल से जब आरोपी तलब किया गया तो आरोपी बोला कि वह सीधा-सादा है और उसका कोई पुराना आपराधिक इतिहास भी नहीं है। ऐसे में उसे कम से कम सजा दी जाए। न्यायाधीश राजेश मिश्र ने इस मामले में अपना फैसला सुनाते हुए जब आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई तो वह कुछ देर के लिए स्तब्ध रह गया। 

बोले रिश्तेदार, मिलनी चाहिए थी फांसी 

नाबालिग बेटी के ननिहाल में जब यह खबर आई, तो इस मामले में कानूनी कार्यवाही के लिए रिपोर्ट दर्ज कराने वाले और पैरवी करने वाले बालिका के रिश्तेदारों में खुशी का माहौल हो गया। महिलाओं ने कहा कि ऐसे दरिंदे को फांसी होनी ही चाहिए थी, फिर भी खुशी है कि रिश्तों को कलंकित करने वाले को सजा मिली।


समाज के लिए कलंक है ऐसे अपराधी: संजय सिंह 

लखीमपुर खीरी। लोक अभियोजक संजय सिंह ने अमर उजाला से विशेष संवाद करते हुए बताया कि आश्रयदाता ही जब ऐसे अपराध करेगा तो सामाजिक व्यवस्था ही खतरे में आ जाएगी। उन्होंने अपने जीवन में तमाम मामले देखे हैं,  लेकिन यह मामले खुद में बर्बरता की मिसाल है। खुशी है कि अपराधी को उसके सही मुकाम तक पहुंचाया गया। 

 

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