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हाथियों के उत्पात से पीड़ित किसानों ने वन कर्मियों को बंधक बनाया
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पहाड़नगर में लगी किसानों की भीड़, बीच में बैठे बंधक वन कर्मी।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। किशनपुर सेंक्चुरी के मड़हा वन ब्लॉक में पिछले पांच दिन से डेरा डाले नेपाली हाथियों ने सोमवार रात जंगल से निकलकर पहाड़नगर गांव के खेतों में पहुंचे, जहां इन हाथियों ने कई किसानों के खेतों में तैयार खड़ी धान और गन्ना फसल को रौंद कर तबाह कर दिया। इससे गुस्साए सैकड़ों किसानों ने मंगलवार सवेरे फसल सर्वे करने पहुंची वन कर्मियों की टीम को बंधक बना लिया। इसकी सूचना मिलते ही वन विभाग में अफरातफरी मच गई। आनन-फानन में मौके पर वनाधिकारी पहुंच गए। किसानों और वनाधिकारियों के बीच करीब दो घंटे तक चली वार्ता मान-मनौव्वल और आश्वासन मिलने पर किसान मानें।
दुधवा टाइगर रिजर्व में पिछले करीब ढाई महीने से भ्रमण कर रहा नेपाली हाथियों का झुंड पूरे दिन जंगल में आराम करने के बाद शाम ढलते ही मैलानी रेंज की जटपुरा, खरेहटा, महुरेना के अलावा दक्षिण खीरी वन प्रभाग के सहजनियां जंगल से गांवों के खेतों में किसानों की खड़ी धान औैर गन्ना की फसलों को रौंद कर तबाह कर रहा है। मड़हा जंगल में पिछले चार दिन से डेरा डाले हाथियों ने सोमवार रात जंगल से निकलकर मैलानी रेंज की जटपुरा बीट से सटे पहाड़नगर गांव के खेतों में धावा बोला, जहां इन हाथियों ने किसान लखविंदर सिंह, जोगेंद्र सिंह, नितिन कुमार आदि की कई एकड़ धान और गन्ने की फसल को रौंद कर तबाह कर दिया। हाथियों के चिंघाड़ने की आवाज सुनकर खेतों की ओर गए किसानों ने गोले, पटाखे दागकर, ट्रैक्टर दौड़ाकर, रोशनी करके किसी तरह हाथियों को वहां से खदेड़ा। खदेड़ने से गुस्साए हाथियों ने किसानों के ट्यूबवेल पर लगी बिजली केबल को तहस-नहस कर दिया। गनीमत यह रही कि उस समय बिजली नहीं थी, नहीं तो कोई बड़ी दुर्घटना हो जाती। किसानों ने इसकी सूचना वन कर्मियों को दी। मंगलवार सवेरे फसल नुकसान का सर्वे करने पहुंची टीम को गुस्साए सैकड़ों किसानों ने बंधक बना लिया और मौके पर वनाधिकारियों के आने की मांग करने लगे। बंधक बने वन कर्मियों ने इसकी सूचना वनाधिकारियों को दी। इससे वन विभाग में अफरा-तफरी मच गई। आनन-फानन में दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के एसडीओ दिलीप श्रीवास्तव, रेंजर मैलानी केपी सिंह मौके पर पहुंचे और किसानों से वार्ता करने की कोशिश की, लेकिन गुस्साए किसानों ने हाथियों को खदेड़ने के लिए पश्चिम बंगाल से ट्रैकर्स बुलाने के साथ ही दो साल पहले हाथियों द्वारा फसल नुकसान मुआवजा दिलाने की मांग की। किसानों का कहना था कि दो साल पहले भी हाथियों ने उनकी फसलों को रौंद कर तबाह कर दिया था। जिसका फसल सर्वे भी हुआ, लेकिन मुआवजे के नाम पर उन्हें अभी तक एक धेला भी नहीं मिला।
एसडीओ ने किसानों द्वारा की जा रही मांग की जानकारी उच्चाधिकारियों को दी। इसके बाद उन्होंने किसानों को बताया कि दो साल पहले बकाया फसल मुआवजा की कार्रवाई पूरी हो चुकी है। बकाया फसल मुआवजा जल्द ही किसानों के बैंक खाते में भेजा जाएगा। तब जाकर किसान मानें और अधिकारियों के साथ ही वन कर्मियों को भेज दिया।
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दुधवा टाइगर रिजर्व में पिछले करीब ढाई महीने से भ्रमण कर रहा नेपाली हाथियों का झुंड पूरे दिन जंगल में आराम करने के बाद शाम ढलते ही मैलानी रेंज की जटपुरा, खरेहटा, महुरेना के अलावा दक्षिण खीरी वन प्रभाग के सहजनियां जंगल से गांवों के खेतों में किसानों की खड़ी धान औैर गन्ना की फसलों को रौंद कर तबाह कर रहा है। मड़हा जंगल में पिछले चार दिन से डेरा डाले हाथियों ने सोमवार रात जंगल से निकलकर मैलानी रेंज की जटपुरा बीट से सटे पहाड़नगर गांव के खेतों में धावा बोला, जहां इन हाथियों ने किसान लखविंदर सिंह, जोगेंद्र सिंह, नितिन कुमार आदि की कई एकड़ धान और गन्ने की फसल को रौंद कर तबाह कर दिया। हाथियों के चिंघाड़ने की आवाज सुनकर खेतों की ओर गए किसानों ने गोले, पटाखे दागकर, ट्रैक्टर दौड़ाकर, रोशनी करके किसी तरह हाथियों को वहां से खदेड़ा। खदेड़ने से गुस्साए हाथियों ने किसानों के ट्यूबवेल पर लगी बिजली केबल को तहस-नहस कर दिया। गनीमत यह रही कि उस समय बिजली नहीं थी, नहीं तो कोई बड़ी दुर्घटना हो जाती। किसानों ने इसकी सूचना वन कर्मियों को दी। मंगलवार सवेरे फसल नुकसान का सर्वे करने पहुंची टीम को गुस्साए सैकड़ों किसानों ने बंधक बना लिया और मौके पर वनाधिकारियों के आने की मांग करने लगे। बंधक बने वन कर्मियों ने इसकी सूचना वनाधिकारियों को दी। इससे वन विभाग में अफरा-तफरी मच गई। आनन-फानन में दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के एसडीओ दिलीप श्रीवास्तव, रेंजर मैलानी केपी सिंह मौके पर पहुंचे और किसानों से वार्ता करने की कोशिश की, लेकिन गुस्साए किसानों ने हाथियों को खदेड़ने के लिए पश्चिम बंगाल से ट्रैकर्स बुलाने के साथ ही दो साल पहले हाथियों द्वारा फसल नुकसान मुआवजा दिलाने की मांग की। किसानों का कहना था कि दो साल पहले भी हाथियों ने उनकी फसलों को रौंद कर तबाह कर दिया था। जिसका फसल सर्वे भी हुआ, लेकिन मुआवजे के नाम पर उन्हें अभी तक एक धेला भी नहीं मिला।
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एसडीओ ने किसानों द्वारा की जा रही मांग की जानकारी उच्चाधिकारियों को दी। इसके बाद उन्होंने किसानों को बताया कि दो साल पहले बकाया फसल मुआवजा की कार्रवाई पूरी हो चुकी है। बकाया फसल मुआवजा जल्द ही किसानों के बैंक खाते में भेजा जाएगा। तब जाकर किसान मानें और अधिकारियों के साथ ही वन कर्मियों को भेज दिया।
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नेपाली हाथियों को खदेड़ने के लिए पश्चिम बंगाल से ट्रैक्टर्स बुलाने के लिए पत्राचार किया जा रहा है। इसमें थोड़ा समय लग सकता है। दो साल पहले हाथियों ने जिन किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाया था, संबधित किसानों के बैंक खातों में फसल मुआवजा धनराशि जल्द ही भेज दी जाएगी। - डॉ. अनिल कुमार पटेल, उपनिदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व, बफरजोन