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किसानों को अपने बल बूते हक के लिए लड़ना होगा
अमर उजाला ब्यूरो/गोला गोकर्णनाथ।
Updated Wed, 31 Aug 2016 12:05 AM IST
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- फोटो : amar ujala
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राकिमसं के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीएम सिंह ने कहा
राकिमसं के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीएम सिंह ने कहा है कि किसानों को एकजुट होकर अपने बल बूते हक के लिए लड़ना होगा। किसानों को किसी ऐसी पार्टी को चुनाव में ताकत नहीं देनी है जो बाद में उन्हीं का शोषण करे।
राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीएम सिंह के लखनऊ से वापसी करते समय नगर के विकास चौराहे पर किसानों और राकिमसं के पदाधिकारियों ने रोककर उनका फूलमालाओं से स्वागत किया। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पत्रकारों को बताया कि किसानों का वर्ष 2007-08 का 50 रुपया प्रति कुंटल के हिसाब से लगभग 1300 करोड़ रुपया बकाया था। जो अब मय ब्याज दो हजार करोड़ के लगभग हो गया है। किसानों को किसी दूसरे के बजाए अपने बल बूते संगठित होकर अपने हक की लड़ाई खुद लड़ने की जरूरत है।
कहा कि चुनाव आते ही किसान जातिवाद, नेताओं के झांसे में आकर फंसकर किसी ऐसे व्यक्ति को ताकत दे बैठते हैं जो बाद में उन्हीं का शोषण करने लगता है। गन्ना मिल मालिकों पर आज हजारों करोड़ रुपये बकाया है, किसानों को कर्ज लेकर खेती के लिए बीज, खाद, सिंचाई, बच्चों की पढ़ाई, शादी ब्याह, दवाई करानी पड़ रही है। ऐसे में किसान दिन प्रतिदिन कर्ज में डूबता जा रहा है। यदि चीनी मिलों पर बकाया करोड़ों रुपया भुगतान हो जाए तो हर एक एकड़ के जोतकार को लगभग 10 हजार रुपये अतिरिक्त आय होगी।
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राकिमसं के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीएम सिंह ने कहा है कि किसानों को एकजुट होकर अपने बल बूते हक के लिए लड़ना होगा। किसानों को किसी ऐसी पार्टी को चुनाव में ताकत नहीं देनी है जो बाद में उन्हीं का शोषण करे।
राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीएम सिंह के लखनऊ से वापसी करते समय नगर के विकास चौराहे पर किसानों और राकिमसं के पदाधिकारियों ने रोककर उनका फूलमालाओं से स्वागत किया। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पत्रकारों को बताया कि किसानों का वर्ष 2007-08 का 50 रुपया प्रति कुंटल के हिसाब से लगभग 1300 करोड़ रुपया बकाया था। जो अब मय ब्याज दो हजार करोड़ के लगभग हो गया है। किसानों को किसी दूसरे के बजाए अपने बल बूते संगठित होकर अपने हक की लड़ाई खुद लड़ने की जरूरत है।
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कहा कि चुनाव आते ही किसान जातिवाद, नेताओं के झांसे में आकर फंसकर किसी ऐसे व्यक्ति को ताकत दे बैठते हैं जो बाद में उन्हीं का शोषण करने लगता है। गन्ना मिल मालिकों पर आज हजारों करोड़ रुपये बकाया है, किसानों को कर्ज लेकर खेती के लिए बीज, खाद, सिंचाई, बच्चों की पढ़ाई, शादी ब्याह, दवाई करानी पड़ रही है। ऐसे में किसान दिन प्रतिदिन कर्ज में डूबता जा रहा है। यदि चीनी मिलों पर बकाया करोड़ों रुपया भुगतान हो जाए तो हर एक एकड़ के जोतकार को लगभग 10 हजार रुपये अतिरिक्त आय होगी।
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