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क्रय केंद्रों पर धान खरीद न होने पर किसानों ने किया हंगामा
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केंद्र प्रभारी से जानकारी लेते किसान।
नाराज किसानों ने की जल्द तौल शुरू कराने की मांग
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किसानों का आरोप- नहीं हो रही खरीद, नमी बताकर लौटा दे रहे हैं धान
पलियाकलां। एक अक्तूबर से मंडी समिति में शुरू हुई धान की खरीद अब तक पूरी तरह से बंद है। धान में नमी अधिक बताकर किसानों का धान लौटा दिया जा रहा है। इससे नाराज किसानों ने हंगामा कर जल्द से जल्द तौल शुरू करने की मांग की।
बुधवार को मंडी समिति स्थित सरकारी धान क्रय केंद्रों पर सुबह से ही किसानों की भीड़ लग गई थी। किसान अपनी ट्रॉलियों में धान लेकर आए, लेकिन खरीद नहीं हुई। किसानों का आरोप है कि नमी बताकर किसानों का धान नहीं खरीदा जा रहा है, जबकि बाहर नमी मानक के अनुरूप सही आ रही है।
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आरोप है कि जो टोकन दिया जा रहा है उसमें भी चार बजे तक ही खरीद होने की बात लिखी है, जबकि पांच बजे के बाद धान भी नहीं उतारा जा रहा है। न ही आगे के टोकन के बारे में ही बताया जा रहा है। इससे किसानों को परेशानी हो रही है।
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उधर, केंद्र प्रभारियों का कहना है कि राइस मिल मालिकों की हड़ताल भी धान न खरीद की एक बड़ी वजह है। हालांकि प्रशासन से वार्ता चल रही है। वैसे अभी तक जो धान केंद्रों पर लाया जा रहा है वह मानक के अनुरूप नहीं है। इसका कारण इलाके में देर तक हुई बारिश भी है।
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किसानों का आरोप- नहीं हो रही खरीद, नमी बताकर लौटा दे रहे हैं धान पलियाकलां। एक अक्तूबर से मंडी समिति में शुरू हुई धान की खरीद अब तक पूरी तरह से बंद है। धान में नमी अधिक बताकर किसानों का धान लौटा दिया जा रहा है। इससे नाराज किसानों ने हंगामा कर जल्द से जल्द तौल शुरू करने की मांग की।
बुधवार को मंडी समिति स्थित सरकारी धान क्रय केंद्रों पर सुबह से ही किसानों की भीड़ लग गई थी। किसान अपनी ट्रॉलियों में धान लेकर आए, लेकिन खरीद नहीं हुई। किसानों का आरोप है कि नमी बताकर किसानों का धान नहीं खरीदा जा रहा है, जबकि बाहर नमी मानक के अनुरूप सही आ रही है।
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आरोप है कि जो टोकन दिया जा रहा है उसमें भी चार बजे तक ही खरीद होने की बात लिखी है, जबकि पांच बजे के बाद धान भी नहीं उतारा जा रहा है। न ही आगे के टोकन के बारे में ही बताया जा रहा है। इससे किसानों को परेशानी हो रही है।
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उधर, केंद्र प्रभारियों का कहना है कि राइस मिल मालिकों की हड़ताल भी धान न खरीद की एक बड़ी वजह है। हालांकि प्रशासन से वार्ता चल रही है। वैसे अभी तक जो धान केंद्रों पर लाया जा रहा है वह मानक के अनुरूप नहीं है। इसका कारण इलाके में देर तक हुई बारिश भी है।