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14.39 करोड़ का नुकसान झेल चुके किसानों को बारिश ने तोड़ा
सार
इस वर्ष मानसून सीजन में अब तक किसानों को 14 करोड़ 39 लाख से अधिक का नुकसान हो चुका है।इसके अलावा 535.831 हेक्टेअर कृषि भूमि कटान के कारण नदियों में समा चुकी है।मोहम्मदी के गांव रामपुर, पड़री मझिगवां, बरखेरा के किसानों कहना हैं कि बारिश से धान, तिल्ली, सब्जी की फसल को नुकसान हो रहा है।
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विस्तार
लखीमपुर खीरी। इस वर्ष मानसून सीजन में अब तक किसानों को 14 करोड़ 39 लाख से अधिक का नुकसान हो चुका है। तहसीलों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर जिला प्रशासन ने शासन को रिपोर्ट भेजी है। हालांकि, इसमें पिछले चार दिनों से हो रही बारिश से फसलों के नुकसान का आंकलन नहीं है। इससे अनुमान है कि किसानों को हुए नुकसान का ग्राफ दोगुने से अधिक हो सकता है, क्योंकि धान समेत गन्ना, केला, दलहन व तिलहन की फसलें भी बर्बाद हुई है।
तराई क्षेत्र में बाढ़ के कारण अब तक 143 गांव प्रभावित हो चुके हैं। 31 गांवों में तहसील प्रशासन द्वारा बचाव एवं राहत कार्य किया गया है। बाढ़ के कारण 73368 लोग प्रभावित हुए हैं। बाढ़ व अतिवृष्टि से 10321.52 हेक्टेअर भूमि जलमग्न हुई है, जिसमें से 8843 हेक्टेअर कृषि भूमि है। 5901 हेक्टेअर क्षेत्रफल में फसलों को नुकसान हुआ है, जिससे फसलों को 14.39 करोड़ की क्षति पहुंची है। इसके अलावा 535.831 हेक्टेअर कृषि भूमि कटान के कारण नदियों में समा चुकी है। इधर चार दिनों से हो रही बारिश से फसलों को हुए नुकसान का अभी आकलन नहीं हुआ है, जिससे फसलों को हुए नुकसान का ग्राफ अभी और बढ़ना तय है। एडीएम ने बताया कि बारिश थमने के बाद फसलों को हुए नुकसान का सर्वे कार्य प्रारंभ होगा, तभी तहसीलों से रिपोर्ट प्राप्त होगी।
‘बारिश के रुकते ही फसलों को हुए नुकसान का सर्वे कराया जाएगा। तहसील प्रशासन को सर्वे कराने के संबंध में निर्देश दिए गए हैं। फसलों को नुकसान के एवज में नियमानुसार किसानों को सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।’
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- संजय कुमार सिंह, एडीएम
धान, गन्ना, केला की फसलें हुई चौपट
धौरहरा/खमरिया। कृषि आंकड़ों के मुताबिक तहसील धौरहरा क्षेत्र में लगभग 2500 हेक्टेअर में धान की बुवाई हुई थी, लेकिन धान कटाई का समय नजदीक आते ही बेमौसम बारिश से हजारों हेक्टेअर भूमि में खडी धान की फसल जलमग्न हो गई है।
बजहा निवासी किसान वीरेंद्र तिवारी के दो एकड़ खेत में लगा धान कटने को तैयार था, लेकिन पानी भरने से पूरी फसल खराब हो गई। बबुरी निवासी अजय कुमार वर्मा, देवीपुरवा निवासी सुरेंद्र वर्मा आदि ने बताया कि धान की फसल पानी में गिरकर गल रही है। जानवरो के लिए चारे की समस्या बन गई है।
मोहम्मदी के गांव रामपुर, पड़री मझिगवां, बरखेरा के किसानों कहना हैं कि बारिश से धान, तिल्ली, सब्जी की फसल को नुकसान हो रहा है। धान की फसल पककर तैयार हो गई है, जो पानी खेतों में गिरने से पानी में डूबकर खराब होने लगी है।
पसगवां में धान और गन्ना की फसलों को बहुत नुकसान पहुंचा है। ग्राम कोटा मुगल, खड़सरा, किरियारा, ताजपुर, मछेछा, सिसोरा नासिर, बढैया, छोलाबारी आदि गांवों में धान की फसलें डूब गई हैं। कुछ गांवों में धान की फसल काटी गई थी, लेकिन खेत से उठा नहीं पाए। वहां भी पानी भरने से हानि हुई है।
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तराई क्षेत्र में बाढ़ के कारण अब तक 143 गांव प्रभावित हो चुके हैं। 31 गांवों में तहसील प्रशासन द्वारा बचाव एवं राहत कार्य किया गया है। बाढ़ के कारण 73368 लोग प्रभावित हुए हैं। बाढ़ व अतिवृष्टि से 10321.52 हेक्टेअर भूमि जलमग्न हुई है, जिसमें से 8843 हेक्टेअर कृषि भूमि है। 5901 हेक्टेअर क्षेत्रफल में फसलों को नुकसान हुआ है, जिससे फसलों को 14.39 करोड़ की क्षति पहुंची है। इसके अलावा 535.831 हेक्टेअर कृषि भूमि कटान के कारण नदियों में समा चुकी है। इधर चार दिनों से हो रही बारिश से फसलों को हुए नुकसान का अभी आकलन नहीं हुआ है, जिससे फसलों को हुए नुकसान का ग्राफ अभी और बढ़ना तय है। एडीएम ने बताया कि बारिश थमने के बाद फसलों को हुए नुकसान का सर्वे कार्य प्रारंभ होगा, तभी तहसीलों से रिपोर्ट प्राप्त होगी।
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‘बारिश के रुकते ही फसलों को हुए नुकसान का सर्वे कराया जाएगा। तहसील प्रशासन को सर्वे कराने के संबंध में निर्देश दिए गए हैं। फसलों को नुकसान के एवज में नियमानुसार किसानों को सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।’
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- संजय कुमार सिंह, एडीएम
धान, गन्ना, केला की फसलें हुई चौपट
धौरहरा/खमरिया। कृषि आंकड़ों के मुताबिक तहसील धौरहरा क्षेत्र में लगभग 2500 हेक्टेअर में धान की बुवाई हुई थी, लेकिन धान कटाई का समय नजदीक आते ही बेमौसम बारिश से हजारों हेक्टेअर भूमि में खडी धान की फसल जलमग्न हो गई है।
बजहा निवासी किसान वीरेंद्र तिवारी के दो एकड़ खेत में लगा धान कटने को तैयार था, लेकिन पानी भरने से पूरी फसल खराब हो गई। बबुरी निवासी अजय कुमार वर्मा, देवीपुरवा निवासी सुरेंद्र वर्मा आदि ने बताया कि धान की फसल पानी में गिरकर गल रही है। जानवरो के लिए चारे की समस्या बन गई है।
मोहम्मदी के गांव रामपुर, पड़री मझिगवां, बरखेरा के किसानों कहना हैं कि बारिश से धान, तिल्ली, सब्जी की फसल को नुकसान हो रहा है। धान की फसल पककर तैयार हो गई है, जो पानी खेतों में गिरने से पानी में डूबकर खराब होने लगी है।
पसगवां में धान और गन्ना की फसलों को बहुत नुकसान पहुंचा है। ग्राम कोटा मुगल, खड़सरा, किरियारा, ताजपुर, मछेछा, सिसोरा नासिर, बढैया, छोलाबारी आदि गांवों में धान की फसलें डूब गई हैं। कुछ गांवों में धान की फसल काटी गई थी, लेकिन खेत से उठा नहीं पाए। वहां भी पानी भरने से हानि हुई है।