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मछली की जगह जाल में फंसा मगरमच्छ
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गोला गोकर्णनाथ। बिझौली क्षेत्र के जमुनाबाद फार्म के निकट ब्लाक नंबर तीन के एक तालाब में मछलियों के लिए डाला जा रहा दाना खत्म ही नहीं हो रहा था। शक होने पर जब जाल डाला गया तो उसमें मगरमच्छ फंस गया। इसी मगरमच्छ ने तालाब की मछलियों को अपना शिकार बना डाला था। जाल में फंसे मगरमच्छ को निकालने के बाद नदी में छोड़ दिया गया।
जमुनाबाद फार्म के पास स्थित एक तालाब में यह मगरमच्छ जाल में फंसा। इस तालाब में मछली पालन का ठेका लेने वाले शारदा राज ने बताया कि कई दिनों से तालाबों में मछलियां दाना नहीं खा रही थीं। उनको कुछ शक हुआ तो गुरुवार की सुबह बहेरवा निवासी शारदा राज और उनके साथी तालाब से मछली पकड़ने के लिए जाल डाला। लेकिन जाल में मछली की जगह मगरमच्छ फंस गया। जिसे देखकर सभी लोग डर गए। विकास सोनी, शंकर लाल, समलिया प्रसाद व अन्य ग्रामीणों ने किसी तरह हिम्मत कर उसे तालाब से निकालकर रस्सियों के सहारे पेड़ से बांध दिया। लोगों ने इसकी सूचना वनकर्मियों को दी। सूचना के करीब चार घंटे बाद फारेस्ट गार्ड व अन्य वनकर्मी मौके पर पहुंचे और मगरमच्छ को अपने साथ ले गए। बताया गया है कि बाद में इसे जंगल में एक नदी में छोड़ दिया गया।
शारदाराज ने बताया कि सभी तालाबों में मछली पालन कर अपनी जीविका चला रहे हैं। पिछली बार भी एक मगरमच्छ ने सब मछलियां खा ली थीं, इस बार लगभग एक लाख का नुकसान हो गया है। तालाब में अब एक भी मछली नहीं बची हैं।
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जमुनाबाद फार्म के पास स्थित एक तालाब में यह मगरमच्छ जाल में फंसा। इस तालाब में मछली पालन का ठेका लेने वाले शारदा राज ने बताया कि कई दिनों से तालाबों में मछलियां दाना नहीं खा रही थीं। उनको कुछ शक हुआ तो गुरुवार की सुबह बहेरवा निवासी शारदा राज और उनके साथी तालाब से मछली पकड़ने के लिए जाल डाला। लेकिन जाल में मछली की जगह मगरमच्छ फंस गया। जिसे देखकर सभी लोग डर गए। विकास सोनी, शंकर लाल, समलिया प्रसाद व अन्य ग्रामीणों ने किसी तरह हिम्मत कर उसे तालाब से निकालकर रस्सियों के सहारे पेड़ से बांध दिया। लोगों ने इसकी सूचना वनकर्मियों को दी। सूचना के करीब चार घंटे बाद फारेस्ट गार्ड व अन्य वनकर्मी मौके पर पहुंचे और मगरमच्छ को अपने साथ ले गए। बताया गया है कि बाद में इसे जंगल में एक नदी में छोड़ दिया गया।
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शारदाराज ने बताया कि सभी तालाबों में मछली पालन कर अपनी जीविका चला रहे हैं। पिछली बार भी एक मगरमच्छ ने सब मछलियां खा ली थीं, इस बार लगभग एक लाख का नुकसान हो गया है। तालाब में अब एक भी मछली नहीं बची हैं।
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