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आई रैड एप बताएगा हादसों की असली वजह
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जिले में 15 मार्च से होगा आई रैड एप का लाइव अपडेट
पुलिस, डॉक्टर, एआरटीओ और पीडब्ल्यूडी विभाग होगा शामिल
लखीमपुर खीरी। पुलिस अब मोबाइल एप आई रैड के जरिए सड़क हादसों पर अंकुश लगाएगी। 15 मार्च को जिले में इस एप का लाइव अपडेट किया जाएगा। इसको लेकर ट्रैफिक पुलिस ने तैयारियां तेज कर दी हैं। हादसे सबसे अधिक कहां हो रहे और उसकी क्या वजह थी। एप इसकी असली वजह बताएगा। इसके बाद कारणों को दूर कराकर हादसों को रोकने का प्रयास होगा।
सड़क हादसों में तेजी से वृद्धि हो रही है। हादसा होने के बाद पीड़ित पक्ष कभी-कभी देर से रिपोर्ट दर्ज कराता है। इससे दुर्घटना की जगह और कारणों का सही पता नहीं चल पाता है। विवेचना के दौरान पुलिस को भी काफी दिक्कत होती है। रिपोर्ट दर्ज कराने वाला पीड़ित पक्ष चालक पर तेजी व लापरवाही से वाहन चलाने के कारण हादसा होना बताता है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। सड़क हादसों की सही वजह जानने के लिए शासन ने इंटीग्रेटेंड रोड एक्सीडेंट डेटाबेस (आई रैड ) लागू किया है। फोटोग्राफ, वीडियो और स्थान के जरिए पुलिस घटना की सही वजह पता लगा सकेगी। जिले में 15 मार्च को एप का लाइव अपडेट होगा।
हादसा होने पर पुलिसकर्मी घटना स्थल पर पहुंचकर जानकारी अपडेट करेंगे। फोटोग्राफ, वीडियो, दिशा, दुर्घटना का समय, तारीख, स्थान, हादसों वाली गाड़ियों का नाम, नंबर आदि भरना होगा। घटना के कारणों को भी मौके से ही फीड करेंगे। हादसा मौसम की खराबी से हुआ या सड़क की कमी से, इसे भी दर्ज करना होगा। यह एप हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में है। आई रैड पर पुलिस-एआरटीओ, पीडब्ल्यूडी विभाग के साथ ही अस्पतालों को भी शामिल किया गया है, ताकि हादसा होने पर तत्काल चिकित्सीय सहायता भी उपलब्ध हो सके। विशेषज्ञ इस पर मंथन करेंगे। उसके बाद जो खामियां सामने आएंगी, उन्हें सुधारा जाएगा।
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पुलिस लाइन में हुआ प्रशिक्षण
बुधवार को आई रैड एप को लेकर प्रशिक्षक अंशुल ने प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें सीओ सिटी अरविंद वर्मा के अलावा सभी थानों से दो-दो एसआई, टीएसआई सूर्यमणि यादव और परिवहन विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे।
विशेषज्ञों की टीम ने आकर बुधवार को प्रशिक्षित किया है। इस एप पर पुलिस, परिवहन विभाग, डॉक्टर और पीडब्ल्यूडी विभाग शामिवल होकर काम करेगा। यह एप लिंक के जरिए हमने अपलोड कर लिया है। एप सड़क हादसों को कम करने में कारगर साबित होगा।
- सूर्यमणि यादव, टीएसआई
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पुलिस, डॉक्टर, एआरटीओ और पीडब्ल्यूडी विभाग होगा शामिल
लखीमपुर खीरी। पुलिस अब मोबाइल एप आई रैड के जरिए सड़क हादसों पर अंकुश लगाएगी। 15 मार्च को जिले में इस एप का लाइव अपडेट किया जाएगा। इसको लेकर ट्रैफिक पुलिस ने तैयारियां तेज कर दी हैं। हादसे सबसे अधिक कहां हो रहे और उसकी क्या वजह थी। एप इसकी असली वजह बताएगा। इसके बाद कारणों को दूर कराकर हादसों को रोकने का प्रयास होगा।
सड़क हादसों में तेजी से वृद्धि हो रही है। हादसा होने के बाद पीड़ित पक्ष कभी-कभी देर से रिपोर्ट दर्ज कराता है। इससे दुर्घटना की जगह और कारणों का सही पता नहीं चल पाता है। विवेचना के दौरान पुलिस को भी काफी दिक्कत होती है। रिपोर्ट दर्ज कराने वाला पीड़ित पक्ष चालक पर तेजी व लापरवाही से वाहन चलाने के कारण हादसा होना बताता है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। सड़क हादसों की सही वजह जानने के लिए शासन ने इंटीग्रेटेंड रोड एक्सीडेंट डेटाबेस (आई रैड ) लागू किया है। फोटोग्राफ, वीडियो और स्थान के जरिए पुलिस घटना की सही वजह पता लगा सकेगी। जिले में 15 मार्च को एप का लाइव अपडेट होगा।
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हादसा होने पर पुलिसकर्मी घटना स्थल पर पहुंचकर जानकारी अपडेट करेंगे। फोटोग्राफ, वीडियो, दिशा, दुर्घटना का समय, तारीख, स्थान, हादसों वाली गाड़ियों का नाम, नंबर आदि भरना होगा। घटना के कारणों को भी मौके से ही फीड करेंगे। हादसा मौसम की खराबी से हुआ या सड़क की कमी से, इसे भी दर्ज करना होगा। यह एप हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में है। आई रैड पर पुलिस-एआरटीओ, पीडब्ल्यूडी विभाग के साथ ही अस्पतालों को भी शामिल किया गया है, ताकि हादसा होने पर तत्काल चिकित्सीय सहायता भी उपलब्ध हो सके। विशेषज्ञ इस पर मंथन करेंगे। उसके बाद जो खामियां सामने आएंगी, उन्हें सुधारा जाएगा।
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पुलिस लाइन में हुआ प्रशिक्षण
बुधवार को आई रैड एप को लेकर प्रशिक्षक अंशुल ने प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें सीओ सिटी अरविंद वर्मा के अलावा सभी थानों से दो-दो एसआई, टीएसआई सूर्यमणि यादव और परिवहन विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे।
विशेषज्ञों की टीम ने आकर बुधवार को प्रशिक्षित किया है। इस एप पर पुलिस, परिवहन विभाग, डॉक्टर और पीडब्ल्यूडी विभाग शामिवल होकर काम करेगा। यह एप लिंक के जरिए हमने अपलोड कर लिया है। एप सड़क हादसों को कम करने में कारगर साबित होगा।
- सूर्यमणि यादव, टीएसआई