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‘संकट की घड़ी में कलाकारों का उत्तरदायित्व भी संभाले शासन’
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लखीमपुर खीरी। भगवानदीन आर्यकन्या डिग्री कॉलेज में संगीत विभाग की ओर से गुरुवार को एक राष्ट्रीय वेबिनार हुआ। जिसमें देश के विभिन्न महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों ने संगीत और कलाकारों की स्थिति पर प्रकाश डाला। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि शासन संकट की घड़ी में कलाकारों का भी उत्तरदायित्व संभाले।
मां सरस्वती के पूजन से हुई शुरुआत के बाद ऑनलाइन हुए वेबिनार में केंद्रीय विश्वविद्यालय प्रयागराज की संगीत वादन प्रोफेसर डॉ. रेनू जौहरी ने प्राचीन परंपराओं का जिक्र करते हुए कोरोना काल में मानसिक तनाव एवं संगीत विषय पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में हम महामारी को याद न कर सकारात्मक सोच धारण करें। इसके लिए वैदिक मंत्रों का उच्चारण करें। इससे मन को शांति मिलेगी।
उन्होंने कहा कि सकारात्मक दृष्टिकोण धारण कर ही हम सकारात्मक दिशा की ओर बढ़ेंगे, जिससे हमारा मनोबल बढ़ेगा। वर्तमान में कला एवं कलाकारों की स्थिति पर प्रोफेसर डॉ. ज्योति मिश्रा ने कहा कि शासन, प्रशासन और समाजसेवियों को संकट के समय में कलाकारों का भी उत्तरदायित्व संभालना चाहिए, जो समाज का भावनात्मक रूप से सहयोग करते रहते हैं। कोई भी कलाकार हाथ फैलाकर याचना नहीं करेगा। मगर, हमें उसकी सहायता के लिए आगे आना चाहिए, क्योंकि संगीत केवल बाजारवाद का विषय नहीं है बल्कि यह हमें मानसिक एवं आत्मिक रूप से संबल प्रदान करता है और साधना का विषय है। छात्रा राधिका बाजपेई, साक्षी अवस्थी, अपर्णा सिंह आदि ने गीत प्रस्तुत किए। अध्यक्षता करते हुए डॉ. सुरचना त्रिवेदी ने कहा कि इस यांत्रिक युग में तकनीकी माध्यम से हम सब वेबिनार से जुड़े हैं, लेकिन संगीत हमारी भावना से जुड़ा है। संगीत के लिए हम सब को संगठित होकर प्रयास करना होगा। उन्होंने कहा कि शासन श्रमिकों के उद्धार की बात करता है, लेकिन कलाकारों की नहीं। जबकि यह भी हमारे समाज का ही अंग है। वेबिनार में राजस्थान, कोलकाता, मिजोरम, बड़ोदरा, बीएचयू की शिक्षिकाओं सहित आर्यकन्या डिग्री कॉलेज की डॉ. बीना रानी गुप्ता, डॉ. गीता शुक्ला, डॉ. शशि प्रभा बाजपेई, डॉ. रेखा पांडे, डॉ. अर्चना सिंह, रीता सिंह आदि ने भाग लिया।
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मां सरस्वती के पूजन से हुई शुरुआत के बाद ऑनलाइन हुए वेबिनार में केंद्रीय विश्वविद्यालय प्रयागराज की संगीत वादन प्रोफेसर डॉ. रेनू जौहरी ने प्राचीन परंपराओं का जिक्र करते हुए कोरोना काल में मानसिक तनाव एवं संगीत विषय पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में हम महामारी को याद न कर सकारात्मक सोच धारण करें। इसके लिए वैदिक मंत्रों का उच्चारण करें। इससे मन को शांति मिलेगी।
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उन्होंने कहा कि सकारात्मक दृष्टिकोण धारण कर ही हम सकारात्मक दिशा की ओर बढ़ेंगे, जिससे हमारा मनोबल बढ़ेगा। वर्तमान में कला एवं कलाकारों की स्थिति पर प्रोफेसर डॉ. ज्योति मिश्रा ने कहा कि शासन, प्रशासन और समाजसेवियों को संकट के समय में कलाकारों का भी उत्तरदायित्व संभालना चाहिए, जो समाज का भावनात्मक रूप से सहयोग करते रहते हैं। कोई भी कलाकार हाथ फैलाकर याचना नहीं करेगा। मगर, हमें उसकी सहायता के लिए आगे आना चाहिए, क्योंकि संगीत केवल बाजारवाद का विषय नहीं है बल्कि यह हमें मानसिक एवं आत्मिक रूप से संबल प्रदान करता है और साधना का विषय है। छात्रा राधिका बाजपेई, साक्षी अवस्थी, अपर्णा सिंह आदि ने गीत प्रस्तुत किए। अध्यक्षता करते हुए डॉ. सुरचना त्रिवेदी ने कहा कि इस यांत्रिक युग में तकनीकी माध्यम से हम सब वेबिनार से जुड़े हैं, लेकिन संगीत हमारी भावना से जुड़ा है। संगीत के लिए हम सब को संगठित होकर प्रयास करना होगा। उन्होंने कहा कि शासन श्रमिकों के उद्धार की बात करता है, लेकिन कलाकारों की नहीं। जबकि यह भी हमारे समाज का ही अंग है। वेबिनार में राजस्थान, कोलकाता, मिजोरम, बड़ोदरा, बीएचयू की शिक्षिकाओं सहित आर्यकन्या डिग्री कॉलेज की डॉ. बीना रानी गुप्ता, डॉ. गीता शुक्ला, डॉ. शशि प्रभा बाजपेई, डॉ. रेखा पांडे, डॉ. अर्चना सिंह, रीता सिंह आदि ने भाग लिया।
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