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Lakhimpur Kheri News: स्कूली बच्चों से खचाखच ई-रिक्शे, नियम लापता

Tue, 07 Apr 2026 12:38 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Updated Tue, 07 Apr 2026 12:38 AM IST
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E-rickshaws packed with school children, rules missing
लखीमपुर खीरी। जिले में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर लापरवाही बढ़ती जा रही है। शहर और ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में ई-रिक्शा चालक नियमों को ताक पर रखकर बच्चों को स्कूल लाने-ले जाने का काम कर रहे हैं। सोमवार को 20 से अधिक ऐसे ई-रिक्शा की पड़ताल में सामने आया कि ज्यादातर ई-रिक्शा पर उनके चालकों के नाम और फोन नंबर तक नहीं लिखे हैं। वैसे तो ई-रिक्शा बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए मान्य ही नहीं है, सामान्य सवारियों तक बैठाने के लिए तय नियम लापता हैं।
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सुबह और स्कूलों की छुट्टी के समय सड़कों पर ऐसे नजारे आम हैं, जहां एक ही ई-रिक्शा में कई-कई बच्चों को बैठाकर ले जाया जा रहा है, जबकि इसमें छह ही सवारी बैठाए जाने का नियम है। साथ ही बच्चे गिरे नहीं, इसके लिए चालकों ने रोक का कोई इंतजाम नहीं कर रखा है। इन वाहनों का न ही वैध परमिट है और न ही ड्राइविंग लाइसेंस की जांच होती है।
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हैरानी की बात यह है कि परिवहन विभाग के पास भी इन पर कार्रवाई के लिए स्पष्ट गाइडलाइन नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि बच्चों को सुरक्षित वाहन से भेजना अभिभावकों की जिम्मेदारी भी है। यदि समय रहते इस पर सख्ती नहीं की गई तो किसी बड़े हादसे से इन्कार नहीं किया जा सकता।
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अभिभावकों की काउंसलिंग के लिए दिए गए निर्देश

-स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर शासन काफी गंभीर है। तीन दिन पहले शासन ने प्रदेश के सभी डीएम के साथ वीडियो कॉफ्रेंसिंग की थी। इसमें किसी जिले से ई-रिक्शा से बच्चों को लाने-ले जाने का मुद्दा उठा था। इस पर शासन स्तर से सभी डीएम को निर्देश दिए गए कि अभिभावकों की काउंसलिंग करें कि वे खुद बच्चों को बिना सुरक्षा मानक वाले वाहनों से न भेजें। एआरटीओ ने बताया कि स्कूली बच्चों वाले ई-रिक्शों पर कार्रवाई की गाइडलाइन नहीं है। अभिभावकों की काउंसलिंग ही विकल्प है। उनसे बात करके समझाया जाएगा कि वे ऐसे वाहनों से अपने बच्चों को न भेजें।
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901 में से पोर्टल पर फीड हो चुके 614 वाहन, 15 तक मौका
परिवहन विभाग में 901 स्कूली वाहन पंजीकृत हैं। अब सभी स्कूली वाहनों को उत्तर प्रदेश इन्टीग्रेटेड स्कूल व्हीकल मैनेजमेंट पोर्टल पर फीड किया जाना है, जिसकी अंतिम तिथि 15 अप्रैल है। सोमवार तक 614 स्कूली वाहनों के नंबर फीड कर दिए गए। यानी यह वाहन मानक में हैं। एआरटीओ शांति भूषण पांडेय ने बताया कि जो वाहन पोर्टल पर फीड नहीं होंगे, वे 15 अप्रैल के बाद अवैध घोषित कर उनके संचालन पर रोक लगा दी जाएगी। अपील की गई कि संबंधित वाहनों की फिटनेस व परमिट सहित अन्य दस्तावेज पूरे कराकर समय रहते पोर्टल पर अपलोड कर लें। तय समय के बाद कोई वाहन संचालित मिला तो चालक पर एफआईआर व स्कूल की मान्यता रद्द की जाएगी। जनपद में करीब 242 निजी स्कूल हैं। ई-रिक्शा तो स्कूल वाहन के तौर पर मान्य नहीं है, इसलिए पोर्टल पर पंजीकरण नहीं हुआ है।
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बच्चों पर भारी पड़ सकती मानकों की अनदेखी
बच्चों को लाने व ले जाने वाले ई-रिक्शों पर भले ही कार्रवाई का प्रावधान नहीं है, लेकिन मानकों का तो ध्यान रखना चाहिए। पड़ताल में कई ई-रिक्शा चालक क्षमता से अधिक बच्चे बैठाए नजर आए, तो कई जगह उन्हें आगे वाली सीट पर बैठाया जा रहा था, जिससे बच्चों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ हो रहा है। इस ओर न तो परिवहन विभाग ध्यान दे रहा है, न ही पुलिस व प्रशासन।

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बच्चों की चिंता तो है, पर मजबूर हैं

मेरा बेटा केंद्रीय विद्यालय में पढ़ता है, लेकिन वहां से कोई भी स्कूल वाहन संचालित नहीं होता है। हमारे पास भी इतना समय नहीं है कि बच्चे को रोजाना स्कूल लेकर जाएं और छुट्टी पर वापस लाएं। मजबूरी में ई-रिक्शा लगा रखा है। चिंता तो रहती है, लेकिन मजबूरी है। -अमित कुमार, सुआगाड़ा
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केंद्रीय विद्यालय लखीमपुर में हमारी बेटी पढ़ती है। पहले हम खुद ही बाइक से छोड़ने और लाने का काम करते थे, जिससे काम प्रभावित होने लगा, तो ई-रिक्शा लगा दिया। स्कूल से वाहन संचालित होने चाहिए, ताकि बच्चों की सुरक्षा बनी रहे। -नबी मोहम्मद, नौरंगाबाद

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विभाग के पास केवल अभिभावकों की काउंसलिंग का ही विकल्प है या तो वे खुद जागरूक हों और बिना सुरक्षा मानकों वाले वाहनों से बच्चों को न भेजें। इधर, क्षमता से अधिक सवारी बैठाने सहित अन्य मानकों को लेकर विभाग की ओर से लगातार कार्रवाई की जाती है। -शांति भूषण पांडेय, एआरटीओ
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