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दुधवा अधिकारियों पर उत्पीड़न का आरोप
पलियाकलां
Updated Sun, 21 Jun 2015 11:46 PM IST
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आदिवासी थारू जनजाति क्षेत्र के ढखिया गांव में हुई वन ग्राम समितियों की बैठक में दुधवा नेशनल पार्क अधिकारियों और कर्मचारियों पर उत्पीड़न का आरोप लगाया गया। बैठक में उत्पीड़न को तत्काल बंद करने की मांग की गई।
बैठक की अध्यक्षता संभावना इंस्टीट्यूट आफ पालटिक्स स्टडी लालपुर हिमांचल प्रदेश के आदिवासी समस्याओं के शोधकर्ता जुनैद ने की। बैठक को वनाधिकार कानून राज्य निगरानी समिति के पूर्व सदस्य एवं सूरमा गांव के प्रधान रामचंदर राना समेत तमाम वक्ताओं ने संबोधित कर दुधवा नेशनल पार्क अधिकारियों और कर्मचारियों पर आदिवासी जनजाति के उत्पीड़न का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वनाधिकार कानून के तहत मिली सुविधाओं को दिए जाने की मांग की। वक्ताओं ने कहा कि आदिवासियों को जमीने जोतने पर पार्क प्रशासन नोटिस देर रहा जो जमीने उन्हीं की हैं। कहा कि यह जमीन उनका हक है और वह उसे लेकर रहेंगे। बैठक की अध्यक्षता कर रहे श्री जुनेद ने कहा कि यह उत्पीड़न बंद होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा की कमी है और आदिवासियों को इस क्षेत्र में आगे बढ़ना होगा तभी आदिवासियों का विकास हो सकेगा। इसी इंस्टीट्यूट की निखिला ने भी अपने विचार रखे। बैठक में उत्पीड़न को बंद करने की मांग की गई और सूरमा प्रधान ने यहां 30 जून को प्रत्येक ग्राम वन समिति से 15 लोगों के सोनभद्र पहुंचने का भी आवाहन किया। बैठक को रामचंदर बंदर भरारी, जवाहर राना, राम बहादुर, प्रताप, मोलीराम, दिनेश कुमार, मोती, बालकराम, राम सिंह, चेतराम आदि ने भी संबोधित किया।
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बैठक की अध्यक्षता संभावना इंस्टीट्यूट आफ पालटिक्स स्टडी लालपुर हिमांचल प्रदेश के आदिवासी समस्याओं के शोधकर्ता जुनैद ने की। बैठक को वनाधिकार कानून राज्य निगरानी समिति के पूर्व सदस्य एवं सूरमा गांव के प्रधान रामचंदर राना समेत तमाम वक्ताओं ने संबोधित कर दुधवा नेशनल पार्क अधिकारियों और कर्मचारियों पर आदिवासी जनजाति के उत्पीड़न का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वनाधिकार कानून के तहत मिली सुविधाओं को दिए जाने की मांग की। वक्ताओं ने कहा कि आदिवासियों को जमीने जोतने पर पार्क प्रशासन नोटिस देर रहा जो जमीने उन्हीं की हैं। कहा कि यह जमीन उनका हक है और वह उसे लेकर रहेंगे। बैठक की अध्यक्षता कर रहे श्री जुनेद ने कहा कि यह उत्पीड़न बंद होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा की कमी है और आदिवासियों को इस क्षेत्र में आगे बढ़ना होगा तभी आदिवासियों का विकास हो सकेगा। इसी इंस्टीट्यूट की निखिला ने भी अपने विचार रखे। बैठक में उत्पीड़न को बंद करने की मांग की गई और सूरमा प्रधान ने यहां 30 जून को प्रत्येक ग्राम वन समिति से 15 लोगों के सोनभद्र पहुंचने का भी आवाहन किया। बैठक को रामचंदर बंदर भरारी, जवाहर राना, राम बहादुर, प्रताप, मोलीराम, दिनेश कुमार, मोती, बालकराम, राम सिंह, चेतराम आदि ने भी संबोधित किया।
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